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शनिवार, अक्तूबर 31, 2009

जमशेदपुर में दोहरा सकती है जयपुर की कहानी


ऑयल साइडिंग पर पेट्रोल चोरी बन सकती है त्रासदी
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जयपुर में तो केवल एक ही कंपनी के तेल डिपो में लगी आग ने तबाही मचा दी, मगर जमशेदपुर में जहां एक ही स्थान पर तीन कंपनियों का सुरक्षित तेल भंडार है वहां एक छोटी सी चिंगारी कितना बड़ा दावानल भड़का सकती है, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। यहां रेलवे ऑयल साइडिंग से होने वाली पेट्रोल-डीजल की चोरी कभी भी भयानक हादसे को जन्म दे सकती है। शहर में बर्मामाइंस इलाके के लगभग आधा किलोमीटर की परिधि में इंडियन ऑयल कारपोरेशन, भारत पेट्रोलियम कारपोरेशन और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कारपोरेशन के तेल डिपो हैं। हालांकि इन कंपनियों के डिपो में तो आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम हैं, लेकिन रेलवे ऑयल साइडिंग पर वैगन से तेल की पंपिंग के दौरान होने वाली चोरी कभी भी जयपुर जैसे भयानक अग्निकांड को जन्म दे सकती है। दरअसल, रेलवे ऑयल साइडिंग में ट्रैक पर लगे रेल टैंकरों से पाइप लाइन के जरिए डिपो तक तेल पहुंचाया जाता है। इसके लिए रेल ट्रैक तक हर कंपनी ने अपने पाइप बिछा रखे हैं। इन पाइप में एक वाल्व लगा होता है। इस वाल्व को खोल रेल टैंकर से तेल पाइप में पहुंचता है। तेल चोरी का खेल यहीं से शुरू होता है। हर टैंकर के नीचे प्लास्टिक शीट बिछी टोकरी रखी होती है। इसी में तेल की चोरी की जाती है। हालांकि इस खेल में आरपीएफ जवान, तेल कंपनी के कर्मचारियों की भी मिलीभगत रहती है। इनकी शह पर ही स्थानीय लोग डिपो तक पहुंचने वाले पाइपों से तेल चोरी करते हैं। इस दौरान एक छोटी सी चिंगारी से भड़की आग तीनों तेल डिपो को लपेटे में ले सकती है। यही नहीं बर्मामाइंस स्थित तीनों कंपनियों के तेल डिपो के चारों तरफ आग लगने का पर्याप्त सामान भी है। यहां झुग्गी-झोपड़ी वाली बस्तियां बसी हैं, तो तेल डिपो के पास ही लकड़ी की टाल भी हैं। डिपो क्षेत्र में जगह-जगह सड़क छाप होटल व चाय ठेले भी हैं। इनमें बराबर आग जलती रहती है। हालांकि प्रावधान के अनुसार तेल डिपो के आसपास बस्तियां नहीं बसी होनी चाहिए। और जिस दौर में यहां तेल डिपो स्थापित हुए थे, उस वक्त आसपास कोई बस्ती थी भी नहीं। बाद में समय के साथ-साथ सार्वजनिक जमीन पर अवैध अतिक्रमण होता गया और आज यहां चारो तरफ बस्तियां बसी हुई हैं। इन बस्तियों में बसे गरीब तबके के लोगों की रोटी पेट्रोल-डीजल की चोरी से ही चलती है। ऑयल साइडिंग से चोरी पर अधिकारियों ने झाड़ा पल्ला रेलवे ऑयल साइडिंग में पटरी पर खड़े ट्रैंकरों से पेट्रोल-डीजल की चोरी रोक पाने में विवशता जाहिर करते हुए तीनों कंपनियों के तेल डिपो के अधिकारियों ने पल्ला झाड़ लिया। विभागीय प्रावधान का हवाला देते हुए नाम न छापने की शर्त पर भारत पेट्रोलियम कारपोरेशन, इंडियन ऑयल कारपोरेशन व हिंदुस्तान पेट्रोलियम तेल डिपो के अधिकारियों ने कहा कि डिपो के बाहर होने वाली चोरी को रोकने की जिम्मेदारी आरपीएफ के साथ-साथ जिला पुलिस व प्रशासन की है, इससे हम लोगों को कोई लेना-देना नहीं। 80 के दशक में टैंकर विस्फोट से मची थी तबाही रेलवे ऑयल साइडिंग से होने वाले पेट्रोल-डीजल की चोरी सन् 1980 के दशक में भयंकर तबाही मचा चुकी है। जमशेदपुर के लोग आज भी उस दिन को याद करते हैं, जब ऑयल साइडिंग से भड़की आग की लपटें टाटानगर रेलवे स्टेशन के 1 नंबर प्लेटफार्म तक आ पहुंची थीं। इस दौरान रेलवे के ऑयल टैंकर में विस्फोट हो गया था। हालांकि इस घटना का कारण ऑयल वैगन की लूज शंटिंग को बताया गया था, लेकिन सूत्रों का कहना है कि तेल चोरी ही इसकी वजह थी।

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