BREAKING NEWS

Post Top Ad

Your Ad Spot
�� Dabwali न्यूज़ है आपका अपना, और आप ही हैं इसके पत्रकार अपने आस पास के क्षेत्र की गतिविधियों की �� वीडियो, ✒️ न्यूज़ या अपना विज्ञापन ईमेल करें dblnews07@gmail.com पर अथवा सम्पर्क करें मोबाइल नम्बर �� 9354500786 पर

गुरुवार, नवंबर 19, 2009

किसानों के आंदोलन से थमी दिल्ली की रफ्तार

केंद्र सरकार द्वारा घोषित नई गन्ना मूल्य नीति के विरोध में गुरुवार को किसानों के प्रदर्शन से राजधानी की यातायात व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो गया। जंतर-मंतर की ओर जाने वाली सभी सड़कों पर भारी जाम लगा हुआ था जबकि कस्तूरबा गांधी मार्ग, मंडी हाऊस, नई दिल्ली रेलवे स्टेशन और गाजीपुर से जुड़ी सड़कों पर वाहन रेंग रहे थे।

इससे पहले हाथों में गन्ना लिए और नारे लगाते हुए हजारों की संख्या में किसान राजधानी के रामलीला मैदान से रैली के रूप में जंतर मंतर पहुंचे। रैली में राष्ट्रीय लोक दल (रालोद), भारतीय किसान यूनियन टिकैत और राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के कार्यकर्ता भी शामिल हुए।

उधर, किसानों के इस आंदोलन के समर्थन में पूरा विपक्ष एकजुट हो गया। राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने कहा कि सरकार संबंधित अध्यादेश को संसद की मंजूरी नहीं दिला सकती, क्यों कि उसके पास संसद के ऊपरी सदन में आवश्यक संख्या बल नहीं है। वहीं जनता दल (युनाइटेड) के अध्यक्ष शरद यादव ने कहा कि जब तक सरकार अध्यादेश को वापस नहीं लेती तब संसद को नहीं चलने दिया जाएगा।

रैली में मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेता बासुदेव आचार्य, रालोद नेता अजित सिंह, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) नेता डी. राजा व गुरुदास दास गुप्ता, राष्ट्रीय जनता दल के नेता रघुवंश प्रसाद और समाजवादी पार्टी महासचिव अमर सिंह सहित कई नेता मौजूद थे।

शरद यादव ने कहा कि यह अकेले गन्ना किसानों की लड़ाई नहीं है बल्कि यह सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ लड़ाई है। उन्होंने कहा कि महंगाई बढ़ रही लेकिन किसानों की चीजें सस्ती दरों पर खरीदी जा रही हैं। रघुवंश प्रसाद ने कहा, ''गन्ना मूल्य के बारे में जारी अध्यादेश किसान विरोधी है। इससे कोई समझौता नहीं हो सकता। अध्यादेश वापस लिए जाने तक लड़ाई जारी रहेगी।''

अमर सिंह ने कहा, ''यह अध्यादेश उन उद्योगपतियों, जिनपर राजनेताओं का नियंत्रण है, को लाभ पहुंचाने के लिए लाया गया है। मैं कृषि मंत्री शरद पवार और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर किसानों को लूटने का आरोप लगाता हूं। इससे मिल मालिकों को लाभ पहुंचेगा।''

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओर से गोपीनाथ मुंडे ने कहा, ''इससे मिल मालिकों को फायदा होगा। पवार कृषि मंत्री हैं, उन्हें किसानों का समर्थन करना चाहिए लेकिन वह उद्योगपतियों का साथ दे रहे हैं।'' केंद्र सरकार ने फेयर एंड रिम्युनेरेटिव प्राइस (एफआरपी) के तहत 2009-10 के लिए प्रति क्विंटल गन्ने का मूल्य 129.85 रुपए घोषित किया है जबकि उत्तर प्रदेश में राज्य सलाहकार मूल्य (एसएपी) प्रति क्विंटल 165 से 170 रुपए तय किया गया है।

यदि राज्य सरकार एसएपी को एफआरपी से अधिक रखती है तो ऐसी स्थिति में मूल्य में जितना अंतर होगा उसका भुगतान सरकार को अपने खाते से करना होगा। हालांकि इसके लिए सरकार को बाध्य नहीं किया जा सकता। किसानों की मांग है कि उनके उत्पाद के लिए प्रति क्विंटल 280 रुपए का भुगतान किया जाए।

राजधानी में किसानों के विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले राष्ट्रीय लोक दल के अजीत सिंह का कहना है, ''उत्तर प्रदेश में गन्ने की खेती पूरी तरह से डीजल पर निर्भर है और डीजल का मूल्य आसमान छू रहा है। ऐसे परिदृश्य में यदि किसानों को अपने उत्पाद के लिए उचित मूल्य नहीं मिलता है तो उनका विरोध पूरी तरह से न्यायोचित है।''

उन्होंने कहा कि देश में चीनी के कुल उत्पादन का 40 प्रतिशत हिस्सा केवल उत्तर प्रदेश से आता है। एक अन्य किसान ने कहा, ''हम अंत तक अपने अधिकारों के लिए लड़ेंगे। यदि हमें अपनी फसल का उचित मूल्य नहीं मिलता है तो हम दिल्ली में अनाज नहीं आने देंगे और प्रदेश में दूध, सब्जियां और अनाज लेकर आने वाली सभी गाडियों को रोक देंगे।''

कोई टिप्पणी नहीं:

Post Top Ad

पेज