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बुधवार, नवंबर 04, 2009

सिक्योरिटी ने रोकी सुमित की सांसें


वीआईपी की सुरक्षा के नाम पर आम आदमी को कैसे हैरान परेशान होना पड़ता है, यह आज मंगलवार को पीजीआई में तब सामने आया जब एक शख्स को सिक्योरटी बंदोबस्त की कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पीजीआई में तय कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे थे। मौके पर मौजूद सिक्योरटी और पुलिस वालों ने एक ऐसे मरीज के परिजनों को इमरजेंसी तक गाड़ी नहीं ले जाने दी जिसे तत्काल आक्सीजन लगानी थी। सेक्टर 35 के एक अस्पताल से मरीज को पीजीआई रेफर किया गया था। पीजीआई में पुलिस चौकी के सामने मौत से हारे सुमित प्रकाश वर्मा के परिजन लाश रखकर बिलख रहे थे। पीजीआई की ओर से देर शाम सफाई में प्रेस नोट जारी किया गया कि मरीज सुमित प्रकाश किडनी की बीमारी से परेशान थे और उन्हें मुर्दा ही अस्पताल में लाया गया। सुमित के भाई धीरज वर्मा, जो गाड़ी चला रहे थे, ने बताया कि उन्हें सिक्योरटी वालों ने गिड़गिड़ाने के बाद भी पीजीआई के मेन गेट से अंदर दाखिल नहीं होने दिया। उन्होंने बताया कि सेक्टर 35 के इंद्रजीत अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। सुमित की पत्नी निशा वर्मा ने बताया कि सुमित की किडनियां खराब थीं, लिहाजा हर हफ्ते वह अंबाला कैंट के सर्राफा बाजार से उन्हें डायलेसिस के लिए सेक्टर 35 के इस अस्पताल में लेकर आते थे। आज सुबह वह अस्पताल आए तो उन्होंने इंद्रजीत अस्पताल के डाक्टरों को सुमित को सांस लेने में दिक्कत की जानकारी दी। डाक्टरों ने तत्काल सुमित को पीजीआई ले जाने को कहा क्योंकि वहां आक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था नहीं थी। डाक्टरों ने बताया कि मरीज को तत्काल आक्सीजन की जरूरत है। वह तुरंत गाड़ी में मरीज को लिटाकर पीजीआई के मेन गेट पर पहुंचे। यहां तैनात सिक्योरटी और पुलिस वालों ने गाड़ी इमरजेंसी तक नहीं ले जाने दी। कह दिया कि दूसरे गेट से अंदर जाओ। वहां से भी गाड़ी वापस भेज दी गई। इस सारे चक्कर में वह सिक्योरटी और पुलिस वालों के सामने गिड़गिड़ाए भी लेकिन किसी ने न सुनी। करीब दो घंटे तक वह इधर से उधर घूमते रहे। सुमित ने भी इस दौरान अपनी जान बचाने की अपने परिजनों से कई बार गुजारिश की और ये भी कहा कि उससे सांस नहीं लिया जा रहा लेकिन वह कुछ नहीं कर सके। आखिरकार सुमित जिंदगी से हार गया और उसकी मौत हो गई। महज 32 साल का सुमित अंबाला कैंट के सर्राफा बाजार का रहने वाला था और वहीं सर्राफ की दुकान में कारीगर का काम करता था। उसके दो बच्चे हैं। एक 6 साल का जबकि दूसरा 12 साल का। साथ आए परिजनों जिनमें अरुण, ऋचा और धीरज वर्मा के आंसू थम नहीं रहे थे। रात ग्यारह बजे समाचार लिखे जाने तक सुमित के परिजन उसका शव लेने के लिए पीजीआई प्रशासन के आगे-पीछे भागदौड़ कर रहे थे। सुमित के परिजन गुरदास का कहना था कि वह दोपहर दो बजे से सुमित का शव मांग रहें हैं लेकिन पीजीआई वाले कभी कोई फार्म भरने को कहते हैं तो कभी पोस्टमार्टम की बात करते हैं।

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