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मंगलवार, नवंबर 10, 2009

खांसने लग गए कुत्ते, बिल्ली, गाय-भैंस

( डॉ सुखपाल)-


प्रदेश भर में किसानों द्वारा खेतों में खड़ी-पड़ी पराली जलाना तो आसान है, परंतु वह यह नहीं समझते कि उनकी जरा सी जल्दबाजी बेजुबान जानवरों की जिंदगी पर भारी पड़ रही है। कुत्ते, बिल्ली, गाय, भैंस समेत अनेक पशु-पक्षी पराली के धुएं की वजह से खांसने लग गए हैं। यहां स्थित गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनीमल साइंस यूनिवर्सिटी (गडवासू) के कालेज ऑफ डेयरी साइंस एंड टेक्नोलाजी के डीन डा. ओएस परमार के अनुसार अभी तक इसके संबंध में अनुसंधान नहीं किया गया है कि प्रदेश में पराली जलाने से कितने पशुओं व पक्षियों की मौत हो चुकी है। उन्होंने बताया कि खेतों में पराली जलाने से उमस व धुआं पैदा होने से वातावरण प्रदूषित हो जाता है। नतीजतन, वातावरण में आक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है। इसके चलते पशुओं व पक्षियों को सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। पंजाब राज्य वन्यजीव बोर्ड के सदस्य वेटरनरी डा. राजीव भंडारी का कहना है कि इस समस्या से बेजुबान पशु-पक्षी सांस संबंधी रोगों से ग्रस्त हो जाते हैं। धुएं से गाय, भैंस, कुत्ता, बिल्ली सहित सभी पशुओं को नजला, जुकाम भी हो जाता है। आंखों में पानी आना, आंखें लाल होना व आंखों में एलर्जी भी हो जाती है। उन्होंने बताया कि मोगा, गुरदासपुर, बठिंडा, जालंधर, पटियाला, लुधियाना सहित कई और जिलों में किसान पराली जलाते हैं। बड़ी हैरानी की बात है कि खेतों में एक तरफ डेयरी शेड बने होते हैं, जिनमें पालतू पशु बंधे होते हैं। दूसरी ओर किसान वहीं पराली जला देते हैं। उनको अपने पशुओं के स्वास्थ्य की कोई चिंता नहीं है। गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनीमल साइंस यूनिवर्सिटी (गडवासू) के मेडिसिन विशेषज्ञ डा. एमपी गुप्ता के अनुसार पराली जलाने से हर जीव प्रभावित होता है। खेतों में पेड़ों पर घोंसलों में रहते पक्षियों के लिए पराली का धुआं मौत का न्योता देना है। पराली जलाने से चिडि़या, कबूतर व अन्य पक्षी जल जाते हैं। इतना ही नहीं, कई बार तो चिडि़या व अन्य पक्षी दाना चुगते समय आग की तपिश से झुलस जाते हैं। इसके अलावा जमीन में रहने वाले रेप्टाइल, कीड़े-मकौड़े, उनके अंडे व बच्चे भी मर जाते हैं। पशु विशेषज्ञों ने खुलासा किया कि वन्यजीव सुरक्षा कानून 1972 के मुताबिक किसानों का पराली जलाना अपराध है। डा. राजीव भंडारी का तो साफ मानना है कि पराली जलाने से पशुओं का स्वास्थ्य तो प्रभावित होता ही है, उनके खान-पान पर भी असर पड़ता है। उनकी दूध देने की क्षमता प्रभावित होती है। ऐसे में सरकार को एक कड़ा कानून बनाना चाहिए, जो किसानों को पराली जलाने से रोके और नहीं मानने वालों को दंडित करे।

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