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शुक्रवार, दिसंबर 25, 2009

राठौर के सिर पर चौटाला का हाथ : एस.सी. गिरहोत्रा

पंचकूला, सी.बी.आई. की विशेष अदालत द्वारा गत १२ अगस्त १९९० को १४ वर्षीय छात्रा रुचिका से छेडख़ानी करने के आरोप में पूर्व पुलिस महानिदेशक एस.पी.एस. राठौर को केवल ६ माह की सजा दिए जाने पर आज परिजनों में काफी रोष देखने को मिला। सै1टर-६ स्थित रुचिका की सहेली अराधना के घर पर मीडिया से बातचीत में रुचिका के पिता एस.सी. गिरहोत्रा ने कहा कि आरोपियों के किए की यह बहुत कम सजा है और वे अब खुलकर अपनी बेटी को इंसाफ दिलवाने के लिए सामने आएंगे। वह पहली बार मीडिया के सामने आकर खुलकर बोले।
उन्होंने राजनीतिक धुरंधरों को लपेटे में लेते हुए कहा कि राठौर को चौटाला का संरक्षण प्राप्त था। यदि वे चाहते तो राठौर को समय रहते सजा दिलवा सकते थे और आज उनकी बेटी 5ाी पुलिसिया कहर की भेंट न चढ़ती। आंखों में आंसू लिए गिरहोत्रा ने कहा कि वह अपनी बेटी को इंसाफ दिलवाने के लिए चौटाला सरकार व भजनलाल सरकार से 5ाी मिले लेकिन किसी ने भी उनका साथ नहीं दिया और हर बात राठौर के पक्ष में कही जाने लगी। उनकी बेटी पहले तो पूर्व डी.जी.पी. राठौर की प्रताडऩा का शिकार हुई और बाद में वह ३ साल तक हरियाणा पुलिस के खौफनाक चेहरे का सामना करती रही। अंत में उसने जहरीला पदार्थ निगलकर अपनी जान दे दी। गिरहोत्रा ने कहा कि उनकी बेटी रुचिका को मौत के मुंह में धकेलने वाले कोई और नहीं हरियाणा पुलिस के जालिम मुलाजिम हैं जो आज 5ाी आजाद घूम रहे हैं। आज १९ साल बाद उन्हें सी.बी.आई. अदालत से काफी उ6मीदें थीं लेकिन यहां 5ाी आरोपी को ६ माह की मामूली सजा सुना दी। गिरहोत्रा ने इस मामले के आरोपियों को आगाह करते हुए कहा कि वह अब रुचिका को आत्महत्या के लिए मजबूर करने संबंधी फाइल को री-ओपन करवाने जा रहे हैं और जो 5ाी लोग उनकी बेटी की मौत के जि6मेदार हैं उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दिलवाएंगे। उन्होंने कहा कि चौटाला के खिलाफ भी याचिका दायर होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि वह मरते दम तक बेटी को न्याय दिलाने के लिए लड़ते रहेंगे। गिरहोत्रा ने कहा कि आज भी उन्हें इस केस से हाथ पीछे करने को कहा जा रहा है और उनके पास धमकियां भी आ रही हैं। इस मामले में वह सरकार से सुरक्षा की मांग के बारे में भी सोच रहे हैं। रुचिका हत्या मामले में हरियाणा पुलिस ने एस.एस.पी. राठौर के साथ मिलीभगत होने का जिक्र करते हुए उनके भाई आशु ने कहा था कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की मौजूदगी में उसे यातना दी गई थी। आशु घटना के समय २० साल का था।

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