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सोमवार, दिसंबर 28, 2009

डेट्रॉयट कांड से खुली अमेरिका की पोल!

वॉशिंगटन ।। लंदन यूनिवर्सिटी के एक्स-स्टूडेंट उमर फारूक अब्दुल मुतल्लब द्वारा शनिवार को डेल्टा एयरलाइं
स के विमान को उड़ाने की कोशिश के मामले ने अमेरिका में सुरक्षा इंतजामों की पोल खोलकर रख दी है। जांच से यह बात सामने आई है कि अल कायदा से रिश्तों के शक में उमर का नाम अमेरिका के टेरर डेटाबेस में शामिल था। इसके अलावा, उमर के पिता ने भी चार सप्ताह पहले अमेरिका को उसके बारे में आगाह किया था। अब सवाल उठ रहे हैं कि इन सबके बावजूद उसे अमेरिका की यात्रा करने की इजाजत कैसे दे दी गई।

उमर ने जांच अधिकारियों से कहा था कि वह अल कायदा के आदेश पर विमान को अमेरिकी धरती पर विस्फोट से उड़ाने जा रहा था। यह भी पता चला है कि 23 साल का उमर विस्फोटक, केमिकल और सिरिंज अपने अंडरवेयर में छिपाकर लाया था। यमन में अल कायदा के एक बम एक्सपर्ट ने उसे इस विस्फोटक का इस्तेमाल करना सिखाया था। उसी ने यह विस्फोटक भी मुहैया कराए थे। उसके इन दावों की जांच चल रही है।

पिछले साल यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन से मकैनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले उमर के पिता अल्लाह उमर मुतल्लब एक सम्मानित बैंकर हैं। खुद अल्लाह ने चार सप्ताह पहले नाइजीरिया की राजधानी अबुजा स्थित अमेरिकी दूतावास में शिकायत दर्ज कराई थी जिसमें उन्होंने उमर के धार्मिक विचारों पर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि मेरा बेटा किसी तरह के जिहाद में शामिल हो सकता है। यह जानकारी अमेरिका के जांच अधिकारियों को भी दी गई थी।

इसके अलावा इस हमलावर का नाम अमेरिका के टेरर डेटा बेस में भी शामिल है। लेकिन अभी तक इसे फौरी खतरे के तौर पर नहीं देखा गया था इसलिए उसे उड़ान भरने से रोकने वाली नो फ्लाई लिस्ट में शामिल नहीं किया गया था। उसे सामान्य निगरानी सूची में रखा गया था। अधिकारियों का कहना है कि उमर के खिलाफ सूचनाएं इतनी पुख्ता नहीं थीं कि उसका वीजा वापस लिया जाता या उसे हवाई यात्रा से रोका जाता।


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