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शनिवार, जनवरी 09, 2010

हाकी इंडिया में बगावत, खिलाडि़यों ने मैदान छोड़ा

पुणे, एजेंसी : हाकी विश्व कप सिर पर है और राष्ट्रीय खेल है कि आगे बढ़ने की बजाय पीछे की ओर खिसका जा रहा है। 28 फरवरी से शुरू होने वाले विश्व कप में दो महीने से भी कम का समय बचा है। ऐसे में जहां टीम को पदक जीतने की रणनीति तैयार करने में जुटना चाहिए, वहां खिलाड़ी पैसा न मिलने के कारण बगावत पर उतर आएं हैं। बगावत पर आमादा खिलाडि़यों ने विश्व कप की तैयारियों के लिए चल रहे शिविर का अनिश्चितकाल के लिए बहिष्कार करने का फैसला किया है। मौजूदा हालातों में विश्व कप में पदक तो दूर, टूर्नामेंट में बने रहना भी टेढ़ी खीर दिखाई दे रही है। भुगतान के संबंध में दो पत्रों का हाकी इंडिया से कोई जवाब नहीं मिलने के बाद खिलाडि़यों ने शिविर के बहिष्कार का फैसला लिया। कप्तान राजपाल सिंह ने कहा कि हमने पैसा मिलने तक शिविर का अनिश्चितकालीन बहिष्कार करने का फैसला किया है। गुरुवार रात खिलाडि़यों की बैठक में यह फैसला लिया गया। पहले हमें हर टूर्नामेंट के बाद पैसा मिलता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है। हमने हाकी इंडिया के अधिकारियों को कई बार याद दिलाया, लेकिन कुछ नहीं हुआ। अब हम पैसा मिलने के बाद ही शिविर में जाएंगे। विश्व कप से डेढ़ महीपे पहले ही खिलाडि़यों ने यह कदम उठाया है, जिसका असर 28 फरवरी से 13 मार्च तक होने वाले टूर्नामेंट पर पड़ेगा। सीनियर खिलाडि़यों ने हाकी इंडिया के अध्यक्ष एके मट्टू को पत्र लिखकर सात दिन के भीतर भुगतान के लिए कहा था। पत्र में बहिष्कार की कोई धमकी नहीं थी, लेकिन सूत्रों ने बताया कि एक हफ्ते के भीतर भुगतान नहीं होने पर खिलाड़ी शिविर का बहिष्कार करने का मन बना चुके थे। हाकी इंडिया को मसले का समाधान निकल आने की उम्मीद है, जिसने शनिवार को यहां सीनियर खिलाडि़यों की बैठक बुलाई है। कप्तान राजपाल सिंह, सरदारा सिंह, प्रभजोत सिंह, संदीप सिंह, तुषार खांडेकर और अर्जुन हलप्पा विज्ञापन शूटिंग के सिलसिले में दिल्ली में होंगे, जिनके हाकी इंडिया के अधिकारियों से मिलने की उम्मीद है। हाकी इंडिया के अध्यक्ष मट्टू ने कहा कि मुझे दो दिन पहले पत्र मिला है। मैंने अपना जवाब भेज दिया है। मैंने उन्हें दिल्ली में बैठक के लिए बुलाया है। मैं उनसे बात करूंगा और उनकी शिकायतें सुनुंगा। मुझे विश्वास है कि जल्दी ही समस्या का हल निकल आएगा। खिलाडि़यों का दावा है कि उन्होंने हाकी इंडिया को आठ जनवरी तक का समय दिया था जबकि मट्टू ने कहा कि ऐसी कोई समय सीमा नहीं दी गई है। उन्होंने कहा कि पत्र में ऐसी कोई मियाद नहीं दी गई। वे राष्ट्रीय खिलाड़ी हैं और उन्हें इस तरह हमें धमकाना नहीं चाहिए। हमें उम्मीद है कि बातचीत से हल निकल आएगा। खिलाडि़यों ने पत्र में कहा कि हम अर्जेंटीना में खेले गए चैंपियंस चैलेंज के लिए भुगतान का इंतजार कर रहे हैं। पिछले तीन साल में हमें हर टूर्नामेंट में भारत से रवाना होने से पहले ही 25 हजार रुपये मिल जाते थे।

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