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गुरुवार, मार्च 18, 2010

जिन खेलों के द्वारा भारत की पहचान थी वह अब खोती जा रही है।

हॉकी,खो-खो एवं कबड्डी ऐसे खेल
डबवाली - स्टेट बैंक ऑफ मैसूर में डिप्टी मैनेजर के पद पर कार्यरत डीसी सुरेश गोल्डमैडलिस्ट एवं उनके सहयोगी मन्जू नाथ ने कूका समाज के सम्माननीय व्यक्ति समाजसेवी सतनाम सिंह नामधारी के निवास पर आज प्रात: पत्रकार वार्ता को सम्बोधित किया। वे राजस्थान के जोधपुर में भारतीय स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एण्ड जयपुर द्वारा आयोजित 21वीं अखिल भारतीय स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एण्ड जयपुर कबड्डी प्रतियोगिता में भाग लेकर वापिस लोट रहे थे। श्री सुरेश ने पत्रकार वार्ता को सम्बोधित करते हुए कहा कि जिन खेलों के द्वारा भारत की पहचान थी वह अब खोती जा रही है। उन्होंने कहा कि हॉकी, खो-खो एवं कबड्डी ऐसे खेल थे। जिससे भारत की पहचान पूरे विश्व में थी तथा भारत हॉकी व कबड्डी के लिए जाना जाता था परन्तु आजकल क्रिकेट के बुखार ने इन खेलों के अस्तित्व को नगण्य कर दिया है। उन्होंने वार्ता के दौरान बताया कि वे अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर खेलते हुए कबड्डी में भारत के लिए 6 गोल्ड मैडल तथा राष्ट्रीय स्तर पर खेलते हुए 8 गोल्ड मैडल जीत चुके हैं। उन्होंने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि क्रिकेट में थोड़ी सी उपलब्धी के लिए खिलाडिय़ों को पद्मश्री से नवाजा जाता है तथा जाता रहा है तथा कबड्डी के खिलाडिय़ों को केवल अर्जुन पुरस्कार देकर केन्द्र सरकार अपना पल्ला झाड़ लेती है। उन्होंने कहा कि कबड्डी का खेल मात्र 45 मिनट का होता है तथा इससे शरीर के प्रत्येक अंग का व्ययाम होने से स्वास्थ्य ठीक रहता है। उन्होंने बताया कि उनके अनुज बीसी सुरेश भी कबड्डी के खिलाड़ी हैं तथा वे भी भारत के लिए खेल रहे हैं। इस अवसर पर बहादुर सिंह कूका, एकओंकार सिंह नामधारी उपस्थित थे।

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