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Title: सरकार को घेरने के लिए विपक्ष फिर तैयार
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नई दिल्ली-संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण के पहले ही दिन सरकार व विपक्ष आमने सामने होंगे। सरकार को सबसे पहले दंतेवाड़ा के नक्सली हमले पर विपक्...
नई दिल्ली-संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण के पहले ही दिन सरकार व विपक्ष आमने सामने होंगे। सरकार को सबसे पहले दंतेवाड़ा के नक्सली हमले पर विपक्ष के सवालों का जवाब देना होगा और उसके बाद विदेश राज्यमंत्री शशि थरूर के ताजा विवाद से जूझना होगा। मुख्य विपक्षी दल भाजपा व उसके सहयोगी दलों ने साफ कर दिया है कि वे दोनों सदनों में दंतेवाड़ा की घटना पर प्रश्नकाल स्थगित करने की मांग करेंगे और अगर सरकार नहीं मानी तो सदन नहीं चलने देंगे। सरकार भी जवाबी तैयारी में है और विपक्ष को कोई मौका देने के पहले ही गृह मंत्री बयान दे सकते हैं। विभिन्न मुद्दों पर सदन के भीतर कायम विपक्षी एकता सरकार के लिए अभी भी मुसीबत बनी हुई है। महिला आरक्षण विधेयक व रंगनाथ मिश्रा आयोग की रिपोर्ट पर तीखे मतभेद भी विपक्षी एकता को तोड़ नहीं सके हैं। ऐसे में बृहस्पतिवार से शुरू हो रहे बजट सत्र के दूसरे चरण में सरकार की मुसीबतें कायम रहेंगी। सरकार के सबसे महत्वपूर्ण वित्त विधेयक पर कटौती प्रस्तावों को लेकर विपक्षी एकता की चुनौती से जूझने के अलावा उसे अन्य प्रमुख राष्ट्रीय महत्व के ज्वलंत मुद्दों पर भी विपक्ष के तीखे तीरों का सामना करना पड़ेगा। विपक्षी हमलों की शुरुआत छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में नक्सली हमले से होगी। भाजपा ने पहले अपनी खुद की बैठक की और बाद में राजग के सहयोगी दलों के नेताओं के साथ बैठक कर इस मुद्दे पर दोनों सदनों में प्रश्नकाल स्थगित करने के नोटिस देने का फैसला किया है। राजग ने मांग की है सबसे पहले सरकार इस मामले पर बयान दे उसके बाद ही कोई और कामकाज करे। अगर सरकार नहीं मानी तो कार्यवाही नहीं चलने दी जाएगी। हालांकि सरकार इस मामले पर विपक्ष को कोई मौका नहीं देगी। सूत्रों के अनुसार गृहमंत्री इस मामले पर बिना किसी मांग के खुद ही बयान देंगे। इस मुद्दे के बाद राजग ने शशि थरूर के मुद्दे पर सरकार को घेरने का फैसला किया है। राजग की बैठक के बाद लोकसभा में भाजपा के उप नेता गोपीनाथ मुंडे ने कहा कि थरूर ने अपनी महिला मित्र को लाभ पहुंचाने के लिए अपने पद का दुरुपयोग किया है। यह भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत सीधा मामला है और प्रधानमंत्री को मामले टालने के बजाए सीधे कार्रवाई करना चाहिए। वामपंथी दलों ने भी इस मामले पर सरकार को घेरने का ऐलान किया है। शुरुआत में विपक्ष की इन दोनों चुनौतियों से जूझने के बाद सरकार को वित्त विधयेक पर विपक्ष के कटौती प्रस्तावों का सामना करना पड़ेगा। भाजपा, वामदल व अन्य सभी गैर संप्रग दलों (बसपा को छोड़कर) ने दो टूक कहा है कि महंगाई, डीजल व पेट्रोल में की कीमतों में की गई बढ़ोतरी के मुद्दों पर जो भी कटौती प्रस्ताव होंगे, उनका सभी दल समर्थन करेंगे।
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