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गुरुवार, जुलाई 29, 2010

राज्य सरकार लोगों को वर्तमान व भविष्य में बाढ़ से स्थायी निजात दिलाने के लिए गंभीर --गुलाटी

सिरसा,29 जुलाई। प्रदेश में हाल ही में आई बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को बाढ़ राहत प्रदान करने के लिए धन की कमी को आड़े नहीं आने दिया जाएगा। राज्य सरकार लोगों को वर्तमान व भविष्य में बाढ़ से स्थायी निजात दिलाने के लिए गंभीर है और इस दिशा में सरकार द्वारा कारगर कदम उठाए जा रहे है।
यह बात राजस्व विभाग के वित्तायुक्त एवं प्रदेश के नोडल अधिकारी श्री नरेश गुलाटी ने जिला के विभिन्न बाढ़ प्रभावित गांवों का दौरा करते हुए ग्रामीणों से रुबरु होते हुए कही। श्री गुलाटी ने जिला के बणी, नरेल खेड़ा, मोरीवाला, ढाणी सतनाम, रानियां, ओटू वीयर, करीवाला सहित अनेक बाढ़ प्रभावित गांवों का दौरा किया। दौरे के दौरान उन्होंने लोगों को आश्वस्त किया कि प्राकृतिक आपदा के इस घड़ी में सरकार व प्रशासन पूरी तरह से आपके साथ है और बाढ़ में जिन किसानों की फसल तबाह हुई व जिनके मकान व अन्य संपत्ति का नुकसान हुआ है उसका मुआवजासरकार द्वारा अवश्य दिया जाएगा। केंद्र सरकार से हरियाणा के लोगों को बाढ़ राहत के तौर पर सहायता प्रदान करने के लिए 1300 करोड़ रुपए के पैकेज की मांग की है। उन्होंने बणी में लोगों से मुखातिब होते हुए कहा कि विपत्ति की इस घड़ी में वे संयम बरते और दुष्प्रचार से बचे। साथ ही उन्होंने लोगों से अपील की कि राजस्व विभाग द्वारा क्षतिग्रस्त फसलों की विशेष गिरदावरी में प्रशासन का सकारात्मक सहयोग करे ताकि सही रुप में प्रभावित लोगों को सरकार द्वारा उचित मुआवजा मिल सके।
श्री गुलाटी ने बताया कि राज्य सरकार भविष्य में प्रदेश में बाढ़ के स्थायी समाधान के लिए प्रयासरत है। इसके लिए राज्य सरकार द्वारा बरसाती मौसम में नदियों के अधिकतम पानी बहाव प्रबंधन और उसका उचित प्रयोग करने के लिए पड़ोसी राज्य सरकारों विशेष कर पंजाब सरकार से बातचीत की जा रही है। उन्होंने बताया कि भविष्य में बाढ़ के स्थायी समाधान के लिए घग्घर, रंगोई नाले सहित विभिन्न नहरों की सफाई तथा उनकी तट मजबूती के लिए राज्य सरकार दीर्घकालीन विशेष योजना बनाने पर भी विचार कर रही है। उन्होंने बताया कि इस बार की बाढ़ से जिला सिरसा में लगभग 60 हजार एकड़ से ज्यादा की भूमि प्रभावित हुई है जिसमें 40 हजार एकड़ में धान तथा 10 हजार एकड़ में कपास व 10 हजार एकड़ के करीब की अन्य फसले तबाह हुई है। जिला के रानियां खंड में सबसे ज्यादा लगभग एक दर्जन गांव में बाढ़ के पानी से नुकसान हुआ है। इसके अलावा ऐलनाबाद उपमंडल में तकरीबन चार हजार एकड़ भूमि जलमग्र हुई है। नगराना गांव में 438 एकड़ भूमि जबकि बणी व करीवाला गांव में भी सैकड़ों एकड़ भूमि बाढ़ से प्रभावित हुई है। इन क्षेत्रों में किसानों की फसल लगभग शत्-प्रतिशत नष्ट हो चुकी है।
वित्तायुक्त श्री गुलाटी ने आगे बताया कि जिला प्रशासन द्वारा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को स्वास्थ्य व बचाव सेवाएं उपलब्ध करवाने के लिए विशेष अभियान चलाया हुआ है। इसके लिए प्रशासन द्वारा राजस्व, कृषि, स्वास्थ्य, विकास एवं पंचायत सहित विभिन्न विभागीय अधिकारियों की टीमें बनाकर संबंधित गांवों में भेजी जा रही है। विशेष गिरदावरी में अब तक जिला के कुल 60 हजार 493 बाढ़ प्रभावित एकड़ भूमि में से 34 हजार 544 एकड़ भूमि का कार्य पूरा किया चुका है। विशेष गिरदावरी के अब तक के 59 प्रतिशत पूरे किए कार्य में राजस्व विभाग द्वारा किसानों के लगभग शत्-प्रतिशत फसलों की तबाही बताई गई है।

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने के पश्चात श्री गुलाटी ने स्थानीय लोक निर्माण विश्राम गृह में अधिकारियों की बैठक ली तथा जिला में प्रशासन द्वारा किए जा रहे बाढ़ राहत एवं बचाव कार्यों की प्रगृति की समीक्षा की। इस मौके पर उन्होंने राजस्व विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि बाढ़ के दौरान नष्ट हुई फसलों की गिरदावरी व क्षतिग्रस्त मकानों तथा लोगों की अन्य नष्ट संपत्तियों का ब्यौरा सरकार को पारदर्शिता के साथ भेजे, ताकि सरकार पात्र व्यक्तियों को मुआवजा व आर्थिक सहायता दी जा सके। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि बाढ़ प्रभावित गांवों में लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं में कमी नहीं आनी चाहिए। उन्होंने कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि ट्यूबवैलों व भूमिगत अन्य संसाधनों के द्वारा बाढ़ के पानी को निकालने के पुख्ता इंतजाम किए जाए तथा किसानों को दोबारा फसल रोपाई के लिए सरकार द्वारा निर्धारित सब्सिडी पर बीज इत्यादि मुहैया करवाया जाए । इसके साथ-साथ बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पशुधन के लिए चारे आदि की व्यवस्था करवाने के भी निर्देश दिए।
उपायुक्त श्री सी.जी रजिनीकांथन ने इस अवसर पर वित्तायुक्त को जिला में प्रशासन द्वारा बाढ़ राहत कार्य एवं बचाव कार्यों के लिए किए जा रहे इंतजाम की विस्तृत जानकारी दी। उपायुक्त ने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में नष्ट हुई फसलों की विशेष गिरदावरी में पारदर्शिता बरतने के उद्देश्य से प्रशासनिक अधिकारियों के साथ ग्रामीण स्तर पर भी छह-छह आदमियों की कमेटियां गठित की गई है। इन कमेटियों में संबंधित गांव के सरपंच, अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग सहित सामान्य वर्ग के नंबरदारों के साथ अन्य मौजिज आदमियों को शामिल किया गया है। उन्होंने बताया कि विशेष गिरदावरी के कार्य में लगे राजस्व विभाग के अधिकारियों को संबंधित गांव में नंबरदार व प्रभावित जमीन मालिक के समक्ष मुआयना करने के आदेश दिए गए है ताकि गिरदावरी निष्पक्षता व पारदर्शिता से हो। श्री रजिनीकांथन ने आगे बताया कि स्वास्थ्य विभाग की मोबाइल टीमें गांव-गांव में स्थापित की गई है और प्रभावित लोगों को समय पर चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध करवाई जा रही है। उन्होंने बताया कि बाढ़ से प्रभावित बणी गांव के लोगों के लिए नथौर गांव में बाढ़ राहत शिविर लगाया गया है जिसमें 382 परिवारों को शिफ्ट किया गया है और परिवारों के लिए वाटर पू्रफ टैंट लगाए गए है। शिविर में रह रहे परिवार को खाद्य सामग्री के साथ सभी प्रकार की सुविधाएं मुहैया करवाई जा रही है। उन्होंने बताया कि जिला में बाढ़ से छह दर्जन से ज्यादा गांव प्रभावित हुए है। इन गांवों में लोगों को सभी प्रकार की राहत सामग्री व पशुओं के लिए चारा वगैरह की व्यवस्था के लिए जिला प्रशासन द्वारा पुख्ता इंतजाम किए है। सर्वे का कार्य युद्धस्तर पर जारी है तथा सर्वे में सभी प्रकार की नियमितताएं बरती जा रही है।
्र वितायुक्त श्री गुलाटी के साथ बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा के दौरान हिसार के मंडलायुक्त बलबीर सिंह, उपमंडल अधिकारी नागरिक एस.के जैन, जिला राजस्व अधिकारी राम सिंह बिश्रोई सहित सभी विभागों के अधिकारीगण मौजूद थे।

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