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शुक्रवार, जुलाई 09, 2010

छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाईयों के मालिकों को अपने उद्योगों के एफ्यूलैंट ट्रीटमेंट प्लांटों का स्तर बढ़ाने के निर्देश

सिरसा,9 जुलाई -प्रदेश के पर्यावरण विभाग द्वारा सभी छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाईयों के मालिकों को अपने उद्योगों में पर्याप्त क्षमता के एफ्यूलैंट ट्रीटमेंट प्लांटों का स्तर बढ़ाने के निर्देश दिए गए है। यदि किसी उद्योग में विभाग के मापदंडों के अनुसार ट्रीटमेंट प्लांट नहीं पाए जाते तो उसके खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाएगी। यह बात प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड हरियाणा के चेयरमैन डा. ए.एस चहल ने आज सिरसा जिला के बकरियांवाली कचरा प्रबंधन प्लांट में दौरा करने के पश्चात स्थानीय लोक निर्माण विभाग के विश्राम गृह में पत्रकारों से कही। उनके इस दौरे में उनके साथ पर्यावरण विभाग के वित्तायुक्त श्री जी. प्रसन्ना कुमार, उपायुक्त श्री सी.जी रजिनीकांथन प्रशासनिक अधिकारी व पर्यावरण विभाग अधिकारी भी थे।
उन्होंने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों द्वारा औद्योगिक इकाईयों में औचक निरीक्षण किया जा रहा है। जो भी औद्योगिक इकाईयां प्रदूषण नियंत्रण के मापदंडों में खरा नहीं उतर रही उनके खिलाफ कार्यवाही की जा रही है ओर नोटिस दिए जा रहे है। प्रदेश में औद्योगिक वेस्ट के अलावा प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण शहरों और कस्बों से निकलने वाला कूड़ा कचरा है। विभाग द्वारा राज्य स्तर पर निर्णय लिया गया है कि प्रदेश के सभी शहरों में कचरा प्रबंधन प्लांट स्थापित किए जाएंगे। अभी तक हरियाणा के सिरसा और अंबाला शहर में कचरा प्रबंधन प्लांट स्थापित किए जा चुके है। प्रदेश के अधिकतर शहरों व कस्बों में कचरा प्रबंधन प्लांट स्थापित करने की प्रक्रिया शुरु है। कई शहरों में इसके लिए जमीन अधिग्रहण का कार्य कर लिया गया है। इसके साथ-साथ शहरों में सीवरेज का पानी भी प्रदूषण का एक कारण है। इस पानी को ट्रीट करके खेती योग्य बनाने व अन्य कार्यों में प्रयोग लाने के लिए सभी शहरों में राज्य स्तर पर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगवाने का निर्णय लिया गया है।
उन्होंने बताया कि शहरों में स्थापित अस्पतालों, पैथोलॉजिकल लैब व अन्य स्थानों से निकलने वाले बायोमैडीकल गैस के डिस्पोजल के लिए भी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा कुछ पार्टियों को अनापत्ति प्रमाण पत्र दिया गया है। इन पार्टियों द्वारा बायोमैडीकल वेस्ट का डिस्पोजल सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सभी अस्पतालों, नर्सिंग होम इत्यादि को निर्देश दिए गए है कि वे 31 जुलाई तक अपने-अपने प्रतिष्ठानों में बायोमैडीकल वेस्ट स्टोर करने के लिए इंतजाम करे। यदि कोई संस्थान या प्रतिष्ठान इन मापदंडों पर खरा नहीं उतरेगा तो उसके खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जाएगी।
श्री चहल ने बताया कि प्रदेश में पेंट, रंग रोगन की फैक्टरियों से निकलने वाले वेस्ट के प्रबंधन के लिए विभाग द्वारा हेम्स नामक कंपनी से समझौता किया गया है। यह कंपनी फरीदाबाद जिले के पाली गांव में हजर्ड देश प्लांट लगाएगी। इस प्रकार के वेस्ट को अप्रभावित करके जमीन के अंदर दबाया जाएगा और उस जमीन के ऊपर पार्क जैसी जगह विकसित की जाएगी। इसके साथ-साथ हरियाणा में पॉलीथीन के प्रयोग पर भी रोक लगाई हुई है। कोई भी व्यक्ति चालीस माइक्रो से कम पॉलीथीन का प्रयोग न तो कर सकता है और न ही उसका उत्पादन कर सकता है। इसके साथ-साथ चालीस माइक्रो से अधिक के पॉलीथीन का साईज भी 12 318 इंच से छोटा नहीं होना चाहिए। पॉलीथीन के प्रयोग पर विभाग द्वारा पूरी सख्ताई बरती जा रही है। प्रदेश में विभागीय मापदंडों के खिलाफ पॉलीथीन का प्रयोग करने पर 800 से भी अधिक लोगों के चालान किए जा चुके है। सिरसा जिला में तीन दर्जन से भी अधिक लोगों के चालान किए गए है। उन्होंने स्थानीय प्रशासन के साथ सिरसा जिले के बकरियांवाली स्थित कचरा प्रबंधन प्लांट का दौरा किया और प्लांट का कार्य देख रही कंपनी के अधिकारियों से कहा कि वे विभिन्न प्रकार के कचरे की छिटाई करके खाद तैयार करे, तभी उनकी खाद की बिक्री हो पाएगी। उन्होंने कहा कि इस प्लांट में कुछ कमियां पाई गई। इसीलिए अधिकारियों को निर्देश दिए है कि वे इसे शीघ्र दुरुस्त करवाए जिससे आसपास के क्षेत्र में किसी प्रकार का प्रदूषण न फैले। प्रदूषण की समस्या को लेकर स्थानीय बकरियांवाली गांव के किसानों ने भी अपनी शिकायत उनके सामने रखी। उन्होंने आश्वासन दिया कि उनकी समस्या का शीघ्र समाधान किया जाएगा। उन्होंने आज स्थानीय मिल्क प्लांट और जगदंबा पेपर मील का दौरा कर निरीक्षण किया।

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