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गुरुवार, नवंबर 25, 2010

खण्ड डबवाली में पंच सरपंचों को दी वित्तीय प्रबंधन की जानकारी-सिहाग

डबवाली- खण्ड विकास एवं पंचायत अधिकारी के स्थानीय कार्यालय में हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान नीलोखेड़ी के तत्त्वाधान में आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में पंच सरपंचों का प्रशिक्षण जारी है। यह जानकारी देते हुए समन्वयक मैनपाल सिहाग ने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर पंचायती राज के नव निर्वाचित प्रतिनिधियों को उनके अधिकार और कत्र्तव्यों के बारे में जागरूक करना है। मैनपाल सिहाग ने पंच सरपंचों को पंचायत की वित्तीय शक्तियों के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि हरियाणा सरकार द्वारा बनाए गये वित्त नियमों में धारा 39 से लेकर धारा 45 तक ग्राम पंचायत की वित्तीय शक्तियों के बारे में विस्तारपूर्वक बताया गया है। उन्होंने बताया कि धारा 39 में स्पष्ट किया गया है कि सभी ग्राम पंचायतों के पास ग्राम निधि होगी। ग्राम निधि का संचालन सरपंच द्वारा किया जायेगा। धारा 40 में ग्राम निधि के स्त्रोतों के बारे में जानकारी दी गई है जैसे कि स्थानीय प्राधिकरणों के प्राप्त सभी अनुदान, सभी प्रकार के दान, ग्राम पंचायत द्वारा वसूल किए गये सभी कर, शुल्क, ग्राम पंचायत को तालाबों व जोहड़ों के माध्यम से मछली पालन से आय, शामलात भूमि से पट्टे से होने वाली आय, धारा 41 के अनुसार ग्राम पंचायत सरकार की अनुमति से गांवों में सेवा शुल्क और दुकानों पर तह बाजारी फीस लगा सकती है। धारा 42 के अनुसार ग्राम पंचायतें 100 रूपये तक की अवसूली योग्य राशि बट्टे खाते में डाल सकती है। धारा 43 के अनुसार ग्राम पंचायतें अपने सभी खातों का दो साल में एक बार ऑडिट करवाऐंगी। धारा 44 के अनुसार ग्राम पंचायतों द्वारा अपने स्तर पर किये जाने वाले खर्चों के बारे में बताया गया है। जैसे कि गांव में करवाए गये विकास कार्यों के प्रचार के लिए 500 रूपये वार्षिक, पंच सरपंचों के सैमीनार के लिए 500 रूपये वार्षिक, राष्ट्रीय ध्वज खरीदने के लिए 500 रूपये वार्षिक, 26 जनवरी, 15 अगस्त, 2 अक्तूबर जैसे राष्ट्रीय त्यौहारों के लिए 500 रूपये प्रत्येक त्यौहार पर ग्राम पंचायत बच्चों में मिठाईयां, पैन-पैंसिल बांटने के लिए खर्च कर सकती है, किसी मंत्री या प्रशासनिक अधिकारी के गांव में आने पर मनोरंजन खर्च 3000 रूपये तक वार्षिक खर्च कर सकती है। धारा 45 के अनुसार ग्राम पंचायत सरकार की अनुमति से गांव में विशेष कर लगा सकती है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में नीलोखेड़ी से आए दूसरे प्रशिक्षक वजीर सिंह ने भी ग्राम पंचायतों को शामलात भूमि के प्रबंधन के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी देते हुए बताया कि गांव स्तर पर सांझी परिसम्पति के प्रबंधन व रख-रखाव की जिम्मेवारी पंचायत प्रतिनिधियों की होती है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में पंच सरपंचों को हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान नीलोखेड़ी द्वारा तैयार की गई किताब उपलब्ध करवाई गई है। जिसमें पंचायती राज से संबंधित आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गये हैं। इस किताब में हरियाणा सरकार द्वारा पंचायती राज के संदर्भ में किए गये कुछ नये सुधारों का भी विस्तापूर्वक वर्णन किया गया है। इस प्रोग्राम में समाज शिक्षा एवं पंचायत अधिकारी रामप्रकाश ने भी आए हुए प्रतिनिधियों को गांव स्तर पर ग्रामीण विकास की योजनाएं बनाने और लागू करने के लिए प्रेरित किया। आज के प्रशिक्षण कार्यक्रम में गंगा, रामपुरा बिश्रोईयां, बिज्जूवाली, रत्ताखेड़ा के नव निर्वाचित पुरूष व महिला पंच सरपंचों को प्रशिक्षण दिया गया।

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