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गुरुवार, नवंबर 25, 2010

खाता खुलवाने के नाम पर मिल रहे हैं धक्के

सांसद के निर्देश का नहीं दिखा असर
सिरसा-नगरपरिषद सिरसा में बैंक में खाता खुलवाने पहुंचे पेंशनधारकों को बैंक कर्मियों की काम न करने की नीति के कारण धक्के खाने पड़ रहे हैं। आज तो बैंक कर्मी काम छोड़कर ही वहां से भाग गए। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत बुढ़ापा, विधवा, विकलांग पेंशन प्राप्त करने वाले पेंशनधारक बैंक खाता खुलवाने के लिए नगरपरिषद कार्यालय में पहुंचे। उपायुक्त सीजी रजिनीकांथन ने आदेश जारी किया था कि सभी प्रकार की पेंशन प्राप्त करने वाले लोगों को अब बैंक से पेंशन मिलेगी। इसके लिए उन्हें बैंक में खाता खुलवाना होगा। जीरो बेलेंस पर खाता खुलवाने के लिए जिले भर में संबंधित नगरपरिषद व नगरपालिका कार्यालय में ही अलग-अलग तिथियों को बैंक कर्मी भेजने की व्यवस्था की गई थी। सिरसा में आज बैंक खाते खुलने थे, लिहाजा बड़ी संख्या में पेंशनधारक वहां पहुंच गए। एक साथ इतने लोगों को देखकर बैंक कर्मी वहां से भाग गए। उनका कहना था कि भीड़ की तुलना में उनकी संख्या बहुत कम है। ऐसे में वे बैंक खाता खोलने की प्रक्रिया पूरी नहीं कर सकते। उधर खाता खुलवाने पहुंचे लोगों का कहना था कि वे दो दिन से किराया खर्च करके नगरपरिषद में आ रहे हैं मगर खाता खोलने की बजाय उन्हें धक्के दिए जा रहे हैं। बैंक खाता खोलने की कोई व्यवस्था नहीं है। इससे से अच्छा था कि उन्हें पहले की तरह की पेंशन का भुगतान किया जाए ताकि इस तरह से धक्के तो नहीं खाने पड़े। उधर नगरपरिषद के चेयरमैन सुरेश कुक्कू ने कहा कि उन्होंने पहले ही प्रशासन को अवगत करा दिया था कि बैंक में खाता खोलने की माकूल व्यवस्था नहीं है। पेंशनधारकों की संख्या को देखते हुए कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई जाए। यदि पर्याप्त संख्या में बैंक कर्मी तैनात किए जाए तो परेशानी नहीं आएगी। उन्होंने इस संबंध में समाज कल्याण विभाग को पत्र लिखा है।
क्या हुआ सांसद के आदेश का
तीन दिन पूर्व सांसद अशोक तंवर ने नगरपरिषद सिरसा का दौरा किया था। अपने दौरे में उन्होंने पेंशनधारकों से मुलाकात की थी। उन्होंने नगरपरिषद के अधिकारियों को निर्देश दिया था कि पेंशनधारकों के बैठने व जलपान की व्यवस्था की जाए। उनकी इस बात से एक बार तो पेंशनधारकों के चेहरों पर खुशी दिखाई दी थी मगर आज जिस तरह से उन्हें इधर-उधर धक्के मिले तो उनकी जुबां पर यही सवाल था कि सांसद के निर्देश का क्या हुआ। उन्हें जलपान तो दूर बैठने तक की जगह नहीं मिली।

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