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Title: यह गलत बात है
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ख़ुशी तो हमको एक खास मौके पर ही मिलती है लेकिन कहते है की परेशानी कभी भी और कहीं भी हमारी जिंदगी में दस्तक दे सकती है. अब देखो न सुबह घर से ...
ख़ुशी तो हमको एक खास मौके पर ही मिलती है लेकिन कहते है की परेशानी कभी भी और कहीं भी हमारी जिंदगी में दस्तक दे सकती है. अब देखो न सुबह घर से निकलने से लेकर रात होने तक हम बहुत से ऐसे नज़ारे देखते है जो हमारे साथ-साथ अन्यो को भी परेशानी में डाल देते है. इसके साथ ही आम होने वाली घटना कभी-कभी हमारे दिलो-दिमाग पर इतना असर छोड़ जाती है की हम ना तो कुछ कर पाते है और ना ही किसी को कुछ कह पाते है, लेकिन बाद में किसी न किसी से जिक्र जरुर करते है. अब क्या कहूँ की किसी बात का जिक्र होगा तो गुफ्तगू भी होगी.
ऐसी ही आम होने वाली घटनाओं, परेशानियों और गुफ्तगू को आप तक पहुँचाने के लिए मैंने यह कालम शुरू किया है. इस कालम में शहर, प्रदेश व देश में होने वाली उन घटनाओं पर गुफ्तगू की जायेगी जिसे देखते ही हमको लगता है की यह गलत बात है. कहते है कि इंसान गलती का पुतला है लेकिन अगर यह कालम उन गलतियों को सुधारने में ना सही लेकिन उनको समझाने तक में कामयाब हुआ तो मै समझूंगा की इस कालम में गुफ्तगू करना कारगर साबित हुआ। इस कालम को नाम दिया गया है यह गलत बात है  सबसे पहले हम बात करते है अनाधिकृत रूप से चलने वाली जीपों की आज हर शहर में निजी जीप वालो का अपना अलग ही आतंक छाया हुआ है। आम आदमी तो इसमें सफऱ करना तो दूर इसके नजदीक भी जाना पसंद नहीं करता। फिर भी इनकी पौ-बारह मात्र इसीलिए है की यह अन्य साधनों से ज्यादा तेजी से चलती है और सवारी को उसके गंतव्य तक बहुत जल्दी पहुंचा देती है. बस यही जनता के लिए परेशानी का सबब है। इतना ही नहीं किसी-किसी नगर में तो इनकी संख्या इतनी ज्यादा है की चौपहिया वाहन तो क्या दूपहिया वाहन को चलने तक की जगह नहीं मिलती. यह हर चौक पर    आपको जाम लगाये मिलेगी.
        जनता की परेशानी सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है. इसके अतिरिक्त अपनी रफ़्तार पर आने के बाद यह इतनी आड़ी-तिरछी चलती है कि इसके नजदीक से गुजरने वाले की साँसे तब तक अटकी रहती है जब तक वो इसको पार न कर दे। साथ ही साथ इसमें बैठने वालो की संख्या इतनी अधिक होती है कि जीप में भी जहाँ 12 से 15 सवारी होती है वहीँ 5 से 7 सवारी बाहर लटकी होती है. सवारियों के लिए दुआ की जा सकती है कि कोई दुर्घटना का शिकार न हो जाये। सरकार या प्रशासन भी इन पर रोक लगाने में अभी तक नाकामयाब हुए है। यहीं कारण है कि इनको देखने के बाद यहीं विचार आता है यह गलत बात है।    
                                                                                                                               डॉ. सुखपाल सिंह
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