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मंगलवार, अगस्त 16, 2011

उपचुनाव में कांग्रेस की साख दाव पर :-महंगाई, भ्रष्टाचार, भूमि अधिग्रहण तथा हिसार की अनदेखी का मुद्दा डूबो सकता है कांग्रेस की लूटिया चुनाव से पहले ही

चुनाव से पहले ही इनैलो हुई भारी
डबवाली (यंग फ्लेम) प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी भजनलाल के अचानक निधन से रिक्त हुई हिसार संसदीय सीट के होने वाले उपचुनाव में कांगं्रेस की साख दाव पर लगी है। प्रदेश में चहूं और हत्या लूट, डकैती व अपहरण, चोरी तथा चैन स्नैचिंग की घटनाओं में जबरदस्त इजाफा होने से पहले से ही मुश्किलों में गिरी मौजूदा प्रदेश की कांग्रेस सरकार का इन उपचुनावों में पार पाना बेहद मुश्किल होगा। हाल ही में चल रहे संसद सत्र में जिस तरह विपक्षी दलों ने हरियाणा सरकार को ससंद के दोनों सदनों में घेरने का प्रयास किया है। उससे मौजूदा प्रदेश सरकार की काफी छछीलेदारी हुई है। दूसरी और लगातार बढ़ता हुआ भ्रष्टाचार तथा भूमि अधिग्रहण का मामला भी कांग्रेस सरकार की साख को निरन्तर घटाने में अहम भूमिका निभा रहा है। महंगाई का बढ़ता हुआ तांडव लगातार प्रदेश की जनता को परेशान और हैरान कर रहा है। सरकार की यही सब मौजूद नाकामिया हिसार के लोकसभा उपचुनाव में मौजूदा प्रदेश सरकार की पीठ में कील ठोंकने के लिए तैयार है। हालांकि अभी चुनाव आयोग ने चुनावों की तिथि मुकरर नहीं की है। लेकिन विपक्षी दल अभी से हिसार उपचुनावों की तैयारी मेें जूट गए है। स्व: भजन लाल हिसार संसदीय सीट से हजकां की टिकट पर चुनाव लड़ संसद में पहुंचे थे। उनकी अचानक हुई मौत के बाद रिक्त हुई हिसार संसदीय सीट से हजकां भी ताल ठोंकने के लिए तैयार है। हालांकि हजकां प्रमुख कुलदीप बिश्नोई ने अपना प्रत्याशी घोषित नहीं किया और न ही अभी यह कहा है कि उनके परिवार में से कौन सा व्यक्ति चुनाव लड़ेगा। दूसरी और भजन लाल के ज्येष्ठ पुत्र एवं पूर्व उप मुख्यमंत्री चन्द्रमोहन भी बीतेे दिनों यह ब्यान दे चुके है कि वह अभी भी कांग्रेस में आस्था रखते है। उन्होंने यह भी कहा था कि कांग्रेस यदि मौका देगी तो वह चुनाव भी जरूर लड़ेंगे लेकिन इस ब्यान के कुछ समय बाद पंचकूला स्थित चौधरी भजन लाल के निवास पर हुई चन्द्रमोहन और अजय चौटाला की गुप्त बैठक में राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया। खबर यह भी उडी कि हिसार संसदीय उपचुनावों में इनैलो कोई भी गुल खिला सकती है। वैसे भी इनैलो हिसार में भारी पड़ती आ रही है। पूर्व के उपचुनावों पर यदि नजर डाली जाएं तो इनैलो ने चार बार संसदीय उपचुनावों में जीत हासिल की है। हालांकि उस क्षेत्र में उस समय कांग्रेस में रहे चौधरी भजनलाल का ही दब दबा रहा और कांग्रेस ने भी कई बार जीत अपनी झोली में डाली। लेकिन इस बार दृश्य बिल्कुल अलग है। हजकां के गठन से पहले हिसार में कांग्रेस ने चूंकि अपने दम पर कोई चुनाव नहीं लड़ा। इस बार वहां हजकां भी कांग्रेस को परेशान कर रही है। वहीं इनैलो ने भी राजनीतिक तौर पर अपनी उपस्थिति जबरदस्त रूप से दर्ज करवाई। हैरानी की बड़ी बात है कि इनैलो में रहे पूर्व मंत्री संपत सिह कांग्रेस में जाने के बाद खुद को हिसार के उपचुनावों से यह कहकर अलग कर चुके है कि वह और उनके परिवार को कोई भी व्यक्ति चुनाव नहीं लड़ेगा। कांग्रेस का विरोधी खेमा भी मौजूदा हुड्डा खेमा को पछाडऩे में लगा है। सरकार के पास केवल विकास का मुद्दा है। जिसके दम पर वह चुनाव लडेगी। मगर विकास केवल रोहतक जिले तक सीमित रहा। यह बात पिछले काफी समय से हरियाणा की राजनीतिक गलियारों में घूम रही है। लेकिन विपक्ष के पास कई ऐसे मुद्दे है जो इन चुनावों में सरकार को पटकनी दे सकते है। खास कर इनैलो ने जिस तरह हिसार में संगठन को मजबूती दी है उससे आने वाले चुनावों में इनैलो को ही लाभ मिलेगा। हजकां और कांग्रेस आपसी फूट का शिकार है। इसमें कोई दोराएं नहीं है। कांग्रेस खेमे की सबसे बड़ी परेशानी तो प्रत्याशी को लेकर ही है। कांग्रेस के पास हिसार में ही कोई दमदार प्रत्याशी नहीं है। जबकि हजकां भी इस दोहराएं पर खड़ी है। लेकिन इनैलो के पास मजबूत प्रत्याशी की कोई कमी नहीं है। उप चुनावों में हुई जीत और हार ही अगली सरकार तय करेंगे इसमें भी कोई दोराएं नहीं है।

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