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रविवार, अगस्त 28, 2011

पालिका अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष चुनाव हेतु उपायुक्त महोदय के आदेश की उपमंडलाधीश ने नहीं की पालना

क्यों आम लोग दे रहे है अन्ना हजारे को समर्थन?
डबवाली-डबवाली नगर पालिका के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पद हेतु चुनाव संभवत निकट भविष्य में हो ही जाए। यू तो निदेशक शहरी स्थानीय निकाय, हरियाणा एवं उपायुक्त सिरसा महीनों पहले चुनाव करवाने हेतु आदेश दे चुके हैं लेकिन स्थानीय उपमंडलाधीश महोदय के लिए शायद ये आदेश कोई खास मायने नहीं रखते है।
गौरतलब है कि लगभग एक साल पूर्व नगरपालिका अध्यक्षा श्रीमती सिम्पा जैन व उपाध्यक्ष हरनेक सिंह के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित हो गया था। तब से लेकर आज तक स्थानीय प्रशासन ने नगरपालिका अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष पद हेतु चुनाव नहीं करवाए है। इस बारे में आरटीआई कार्यकर्ता महावीर सहारण द्वारा जब निदेशक शहरी स्थानीय निकाय से जानकारी आरटीआई कानून के तहत मांगी गई तो निदेशक शहरी स्थानीय निकाय ने उपायुक्त सिरसा को आदेश दिए कि डबवाली नगरपालिका के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष पद हेतु चुनाव करवा कर उन्हें सूचित करें। उपायुक्त महोदय ने चुनाव करवाने हेतु स्थानीय उपमंडलाधीश को काफी समय पूर्व ही निर्देष दे दिए थे तथा उपायुक्त कार्यालय से स्मरण पत्र भी भेजे गए लेकिन स्थानीय उपमंडलाधीश ने उपायुक्त महोदय के आदेशों को कोई तवज्जों नहीं दी। जब चुनाव बाबत उपमंडलाधीश डबवाली से पत्रकारों द्वारा पूछा जनता तो वे ये कह कर पल्ला झाड़ लेते थे कि कुछ पार्षद चुनाव नहीं चाहते हैं। इसी दौरान स्थानीय विधायक डॉ. अजय सिंह चौटाला एवं इनेलो-भाजपा के 9 पार्षद चुनाव करवाने हेतु उच्च न्यायलय पहुंच गए। माननीय उच्च न्यायलय ने मामले की सुनवाई करते हुए नोटिस जारी कर दिया है। अब उपायुक्त महोदय द्वारा एक बार फिर उपमंडल अधिकारी (ना.) को आदेश दिए गए है कि आपको नगरपालिका मंडी डबवाली के प्रधान व उपप्रधान का चुनाव करवाकर गजट नोटिफिकेशन के लिए हिन्दी व अंग्रेजी में प्रारूप तैयार करके प्रतियां भिजवाने के लिए लिखा गया था परंतु आपकी और से अभी तक कोई उत्तर प्राप्त नहीं हुआ है। इस मामले में शीघ्र कार्रवाई करके कार्रवाई रिपोर्ट भिजवाएं ताकि निदेशक शहरी स्थानीय निकाय हरियाणा को भेजा जा सके।
इस बारे में जब उपमंडलाधीश डॉ. मुनीश नागपाल से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि कुछ पार्षदों ने मुझे यह लिखकर दिया था कि अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के चुनाव न करवाए जाए। मैंने इस बाबत उच्च अधिकारियों से मार्ग दर्शन मांंगा हुआ है। लेकिन उन्होंने उन पार्षदों के नाम बताने से इंकार कर दिया जिन्होंने चुनाव न करवाने हेतु उन्हें लिखकर दिया हुआ है।
यह समूचा घटनाकर्म यह दर्शाने के लिए काफी है कि आज अन्ना हजारे का समर्थन करने के लिए क्यों पूरा देश उमड़ पड़ा है? अफसरशाही की ताकत कितनी है? तथा उनके लिए लोकतांत्रिक संस्थाएं कितनी मायने रखती है? तथा ये लोग अपनी निरंकुशशाही को मूर्त रूप देने के लिए अपनी कितनी मनमर्जी तक चला सकते है। यह बात यहां साबित हो गई है। इस प्रकरण में एक और तथ्य उभरकर सामने आया है कि अधिकारी वर्ग अगर अपने उच्च अधिकारियों के आदेशों को भी महत्व प्रदान नहीं करते हैं व उनकी पालना नहीं करते हैं तो ये लोग आम जनता के साथ किस रूप में पेश आते होंगे। इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है क्योंकि बेचारी आम जनता इनका क्या बिगाड़ सकती है।

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