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Title: जल है तो कल है, पेड़-पौधे हैं तो हम हैं
Author: Young Flame
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सिरसा - जल है तो कल है, पेड़-पौधे हैं तो हम हैं। सभी प्राणियों के जीवन में वनों एवं पेड़-पौधों का होना अति आवश्यक है। उक्त शब्द अतिरिक...
सिरसा - जल है तो कल है, पेड़-पौधे हैं तो हम हैं। सभी प्राणियों के जीवन में वनों एवं पेड़-पौधों का होना अति आवश्यक है।
उक्त शब्द अतिरिक्त उपायुक्त श्री डीके बेहरा ने लघु सचिवालय के प्रांगण में स्थित शहीद स्मारक स्थल व साथ में लगती पार्कों में पौधा रोपण करने उपरांत व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि पेड़-पौधों का जीवन में उतना ही महत्व है जितना की अन्न, जल, वायु आदि का है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने जन्मदिन के अवसर पर भी पेड़-पौधे अवश्य लगाने चाहिए। पर्यावरण को संतुलित बनाए रखने के लिए भी अधिक से अधिक संख्या में पेड़-पौधे लगाने चाहिए।
इस अवसर पर अतिरिक्त उपायुक्त कार्यालय के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों ने पेड़-पौधे लगाए। उपमंडलाधीश श्री रोशन लाल ने भी अपने शुभ हाथों द्वारा पौधारोपण किया। उन्होंने कहा कि जिला को हरा-भरा बनाने के लिए तथा पर्यावरण को संतुलित रखने के लिए जुलाई माह से पौधारोपण का कार्य आरंभ किया था और उपमंडल ऐलनाबाद में जिला स्तरीय वन महोत्सव समारोह भी बनाया गया है जहां वन विभाग द्वारा जिलावासियों को नि:शुल्क पौधे वितरित किए गए थे।
इस मौके पर जिला वन अधिकारी श्री नरेश रंगा ने बताया कि आगामी 5 सितंबर को उपायुक्त डा. युद्धबीर सिंह ख्यालिया की अध्यक्षता में लघु सचिवालय के परिसर में सभी विभागों के अधिकारियों व कर्मचारियों के द्वारा पौधारोपण का कार्य किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आज भी अतिरिक्त उपायुक्त श्री डीके बेहरा के नेतृत्व में एक हजार से भी अधिक पौधारोपण का कार्य किया गया है। उन्होंने कहा कि खाली पड़ी जगहों पर पौधारोपण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिला में वन विभाग द्वारा 31 लाख से भी अधिक पौधे नि:शुल्क लोगों को दिए जा रहे हैं ताकि सिरसा जिला हरा-भरा बने। जिला वन अधिकारी ने बताया कि भारतीय राष्ट्रीय वन नीति के अनुसार 33 प्रतिशत वनों का होना, पर्यावरण संतुलन के तथा वातावरण शुद्ध करने के लिए अधिक मात्रा में पेड़ पौधे लगाना बहुत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि ज्योग्राफिकली एरिया के अनुसार हरियाणा में वन भूमि सिर्फ 3.8 प्रतिशत है। परंतु कुल ट्री कवर एरिया कृषि भूमि को मिलाकर 8.6 प्रतिशत ही है। जो कि निर्धारित पर्यावरण संतुलन के लिए बहुत कम है। उन्होने बताया कि इस विषय को गम्भीरता से देखते हुए हरियाणा सरकार ने हर वर्ष लगभग 5 करोड़ पौधे किसानों, स्कूलों, सरकारी विभागों एवं स्वयं सेवी संस्थाओं को मुफ्त वितरण करती आ रही है, ताकि पर्यावरण संतुलन बना रहे । उन्होंने बताया कि जिले के विभिन्न गांवों में जड़ी बुटियों युक्त पौधे जैसे नीम, पिलखन,पापड़ी, बकैन, तुत, शीशम, सफेदा, गुलमोहर, केशिया, सामिया, चांदनी, कीकर, जण्ड, जामुन, अनार, आंवला ,पोपलर, बी विलिया ,फ्रांस, नींबू, बेल पत्थर आदि तरह के पौधे लगाने ेके लिए तैयार किए गए है।
श्री रंगा ने बताया कि भवदीन नर्सरी में 3 लाख 60 हजार , रामनगरीय में एक लाख 25 हजार, डिंग में 7 हजार 500, नहराना में एक लाख 73 हजार, डबवाली में एक लाख 80 हजार, खुईयां में 5 लाख 20 हजार, रानियां में दो लाख 11 हजार , जीवन नगर में 2 लाख 60 हजार, ऐलनाबाद में एक लाख 51 हजार , दमदमा एक लाख, केहरवाला में दो लाख,उमेदपुरा में दो लाख 10 हजार, बाहिया में एक लाख , कालांवाली में 3 लाख 11 हजार 430, खेरेकां में एक लाख 50 हजार तथा दौलतपुर खेडा़ में 1 लाख 12 हजार विभिन्न प्रजातियों के पौधे इन नर्सरियों में तैयार किए गए है।
इस मौके पर विभिन्न विभागों के अधिकारियों व कर्मचारियों ने भी पौधारोपण किया।
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