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बुधवार, अगस्त 10, 2011

अब कम करो पेट्रोल-डीजल के दाम: अजय सिंह

डबवाली (यंग फ्लेम) इनेलो ने अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट के चलते यूपीए सरकार से पेट्रोल-डीजल, रसोई गैस व मिट्टी के तेल की कीमतें तुरंत घटाए जाने की मांग की है। इनेलो के प्रधान महासचिव व डबवाली के विधायक डॉ. अजय सिंह चौटाला ने कहा कि यूपीए सरकार ने पिछले साल पेट्रोल की कीमतों को सरकारी मूल्य नियंत्रण व्यवस्था से बाहर करते हुए देशवासियों को यह भरोसा दिया था कि कच्चे तेल की अंतर्राष्ट्रीय कीमतों के आधार पर अब पेट्रोल के मूल्य तय हुआ करेंगे। इसी के चलते पिछले साल 26 जून से लेकर इस साल मई तक पेट्रोल की कीमतों में नौ बार इजाफा करते हुए करीब 16 रुपए प्रति लीटर पेट्रोल की कीमतें बढ़ा दी गई थी। इतना ही नहीं इस दौरान अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों का बहाना लेकर कई बार डीजल, रसोई गैस व मिट्टी के तेल की कीमतें बढ़ाकर आम उपभोक्ता पर न सिर्फ अरबों रुपए का अतिरिक्त बोझ डाला गया बल्कि महंगाई की मार झेल रहे गरीब आदमी की पूरी तरह से कमर तोड़ दी गई। डॉ. अजय सिंह चौटाला ने कहा कि पिछले एक पखवाड़े के दौरान अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल से घटकर मात्र 79 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई है। इसलिए अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई कमी का लाभ देश के आम उपभोक्ता को मिलना ही चाहिए।
उन्होंने पेट्रोल की कीमतों में 15 रुपए प्रति लीटर, डीजल की कीमतों में 10 रुपए प्रति लीटर, मिट्टी के तेल की कीमतों में पांच रुपए प्रति लीटर और रसोई गैस की कीमतों में सौ रुपए प्रति सिलेंडर कटौती किए जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि जब अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें बढऩे का बोझ तुरंत उपभोक्ताओं पर डाल दिया जाता है तो फिर कीमतें घटने पर राहत भी आम आदमी को मिलनी ही चाहिए। चौटाला ने कहा कि यूपीए सरकार का इस मामले में स्टेंड पूरी तरह से अलोकतांत्रिक व जनविरोधी है। उन्होंने कहा कि आज पेट्रोल-डीजल, रसोई गैस व मिट्टी के तेल की कीमतों में कटौती करने की बजाय केंद्रीय मंत्री यह दलील दे रहे हैं कि अभी अंतर्राष्ट्रीय बाजार के भावों की समीक्षा की जा रही है और कीमतें घटाने का कोई फैसला नहीं लिया गया। उन्होंने कहा कि एक समय अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 145 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई थी, उस समय भी भारतीय बाजारों में पेट्रोल की कीमतें मात्र 40 रुपए लीटर के आसपास थी। उन्होंने कहा कि पेट्रोल को पिछले साल 25 जून को नियंत्रणमुक्त करते ही पेट्रोल की कीमतें तय करने का अधिकार तेल कंपनियों को दिया गया था। इसका नतीजा यह हुआ 26 जून से 15 दिसम्बर तक तेल कंपनियों ने सात बार पेट्रोल की कीमतों में बढ़ौतरी करते हुए 11 रुपए प्रति लीटर तेल की कीमतें बढ़ा दी थी। इसके बाद इस साल मई माह में पेट्रोल की कीमत में पांच रुपए लीटर की और बढ़ौतरी कर दी गई और जून माह में रसोई गैस सिलेंडर 50 रुपए, डीजल में तीन रुपए प्रति लीटर और कैरोसीन में दो रुपए प्रति लीटर बढ़ौतरी की गई।




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