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रविवार, सितंबर 25, 2011

बाढ़ का पानी न निकलने से सकताखेड़ा में 200 एकड़ फसल बर्बाद

डबवाली (यंग फ्लेम) भारी बारिश के प्रकोप से सकताखेड़ा गांव के एक दर्जन किसानों की 200 एकड़ भूमि में नरमा की फसल पूरी तरह से तबाह हो गई है। खेत में अभी तक 2 से 3 फूट तक पानी भरा पड़ा है पीडि़त किसानों ने रकबे की गिरदावरी करवा कर मुआवजा दिए जाने की मांग उच्चाधिकारियों से की है। पत्रकारों की टीम ने बाढग़्रस्त क्षेत्र का अवलोकन किया तो पाया कि सारे क्षेत्र में दूर-दूर तक पानी भरा पड़ा है। नरमें के पौधे मुरझाने लगे है और मौके पर मौजूद किसान अमर सिंह खीचड़ ने बताया कि 12 सिंबतर से 16 सिंतबर तक लगातार भारी बारिश हुई। चूंकि हरियाणा क्षेत्र का रकबा साथ लगते बडिंगखेड़ा (पंजाब) गांव के रकबे से नीचा पड़ता है जिसके चलते पंजाब क्षेत्र का बरसात का पानी भारी मात्रा में आ गया व एक सप्ताह हुई बारिश बंद हो चुकी है लेकिन पानी कम नहीं हो पा रहा है। किसान भजनलाल व देवव्रत ने बताया कि ट्रैकटर द्वारा दिन-रात पानी को निकालने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि नरमें की फसल तो बर्बाद हो ही चुकी है अब तो हमारा प्रसाय है कि गेहूं की फसल की बिजाई किसी तरह संभव हो जाए। किसान स्नेहदीप व जगरूप सिंह ने बताया कि हालांकि स्थानीय उपमंडलाधीश डॉ. मुनीश नागपाल ने पानी निकासी हेतु डीजल उपलब्ध करवाया है लेकिन हमारी प्रशासन से मांग है कि यहां एक ट्रांसफार्मर लगवा दिया जाए ताकि पानी को जल्दी व आसानी से निकाला जा सके। साथ ही किसानों द्वारा पंजाब क्षेत्र से आने वाले पानी को रोकने हेतु जेसीबी से मिट्टी डाली जा रही है प्रशासन इस कार्य में अपना सहयोग दे ताकि भविष्य में होने वाले नुकसान को रोकने हेतु पुख्ता प्रबंध किए जा सके। गौरतलब है कि इस क्षेत्र में पानी का जमीनी लेवल केवल 3-4 फीट ही है तथा अब भारी बारिश एवं साथ लगते क्षेत्र का पानी भर जाने से लेवल और ऊंचा हो जाने की संभावना बन गई है। जिसके चलते यह क्षेत्र पूरी तरह से सेमग्रस्त हो जाने की संभावना बन गई है। प्रशासन को चाहिए कि तुरंत इस और ध्यान दे ताकि दर्जनों परिवारों की अजीविका का साधन बच सके।

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