BREAKING NEWS

Post Top Ad

Your Ad Spot
�� Dabwali न्यूज़ है आपका अपना, और आप ही हैं इसके पत्रकार अपने आस पास के क्षेत्र की गतिविधियों की �� वीडियो, ✒️ न्यूज़ या अपना विज्ञापन ईमेल करें dblnews07@gmail.com पर अथवा सम्पर्क करें मोबाइल नम्बर �� 9354500786 पर

रविवार, अक्तूबर 02, 2011

गरीबो का मजाक उड़ाती गरीबी की नयी परिभाषा

योजना आयोग जिसके मुखिया है अर्थशाश्त्र के ज्ञाता प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह है उनकी टीम ने गरीबो का मजाक उड़ाते हुए गरीबी की नयी परिभाषा बताई है उनके मुताबिक़ शहर में एक व्यक्ति एक दिन में अपने ऊपर अगर ३२ रूपए खर्च करता है तो वो गरीब नहीं हैऔर गाँव के व्यक्ति के लिए यही आंकड़ा २६ रूपए है.. इतना ही नहीं MMS यानि मनमोहन सिंह जी ने बाकायदा एक दैनिक बजट भी पेश किया है जोकि कुछ इस प्रकार है- अनाज के लिए-.५० रूपए, दाल के लिए-.०२ रूपए दूध के लिए .३३ रूपए , सब्जी के लिए -.९५ रूपए , तेल के लिए-.५५ रूपए , फल के लिए-४४ पैसे , चीनी के लिए- ७० पैसे ,नमक और मसाले के लिए-७८ पैसे , अन्य फ़ूड आइटम्स के लिए- .५१ रूपए ,ईंधन के लिए-.७५ रूपए……
लगता है योजना आयोग के मुखिया अपना मानसिक संतुलन खो बैठे हैअपने को गरीबो की हमदर्द होने का ढोंग करने वाली कांग्रेस पार्टी के नेता कौनसी दुनिया में जी रहे है..सच्चाई से कितना दूर है योजना आयोगइन्हें शर्म भी नहीं आती गरीबी की ऐसी परिभाषाएँ देने में ..लेकिन शर्म आये भी तो कैसे आखिर ये तो ठहरे नेता इनके अन्दर बेशर्मी तो कूट-कूट कर भरी होती है ….चोरी पे चोरी ऊपर से सीना जोरी- ये परिभाषा कम थी की जो कांग्रेस के प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी का बयान आयासभी आंकड़े रीसर्च और सर्वे के बाद प्रस्तुत किये गए हैअभिषेक जी लगता है रीसर्च और सर्वे के बजाये योजना आयोग के सदस्यों और उनके मुखिया ने खेल-खेल में अपनी-अपनी जवानी के दिनों के ऊपर रीसर्च कर के ये दैनिक बजट तैयार किया है..इस नयी परिभाषा के पीछे भी इनकी गन्दी चाल है वो ऐसे की जब देश में ये परिभाषा लागू हो जायेगी तो देश में हकीकत में बढती हुई ग़रीबी आंकड़ो में कम हो जायेगी और जब गरीबी आंकड़ो में कम हो जायेगी तो इससे सरकार को तीन फायदे होंगे..- गरीबो को मिलने वाली सेवाओं में सरकार कटौती कर देगी..- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की गरीब देश की छवि कम होगी..- और इन झूठे आंकड़ो का सबसे बड़ा फायदा तो यह है की २०१४ के चुनाव में वोट मांगने के लिए एक मुद्दा मिल जाएगा की हमारी सरकार ने गरीबी कम कीपर ये पब्लिक है ये सब जानती हैऔर वैसे भी अगर ३२ और २६ रूपए कमाने वाला व्यक्ति गरीब नहीं होता है तो हमारे नेताओ का भी मासिक ३८४० रूपए का मासिक वेतन मिलना चाहिए..क्यों सरकार अपनी सभी गन्दी चाले जनता के ऊपर आजमाती है ? दिन पर दिन बढती महंगाई महंगे होते खद्या पदार्थ पेट्रोल के दाम तो आसमान को छु रहे है और अब LPG सिलेंडर की भी सब्सिडी हो जायेगी एक वर्ष में केवल सिलेंडर ही प्राप्त होंगे इससे अधिक पर और अधिक भुगतान करना पड़ेगा इस सबसे झूजना तो जनता को ही पड़ता हैमंत्रियो का क्या जो हज़ारो करोडो के मालिक है उनके लिए ये १०००,५०० रूपए क्या मायने रखते होंगेयोजना आयोग द्वारा प्रस्तुत किया गया गरीबी का नया पैमाना पूर्ण रूप से अव्यवाहरिक है..अगर योजना आयोग इसे व्यवहारिक समझता है तो इस पैमाने को वह स्वयं खुद के ऊपर लागू कर के देखे तब उसे हकीक़त का अहसास होगासरकार के लिए तो मै इतना ही कहना चाहता हूँविनाशकाले विपरीत बुद्धिजब किसी का अंत होना होता है तो उसकी बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है
*जय हिंद जय भारत*

कोई टिप्पणी नहीं:

Post Top Ad

पेज