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Title: प्लैटलेट्स ने तोड़ी लोगों की आर्थिक कमर
Author: Young Flame
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सामाजिक संस्थाए व् प्रशासन मोंन डबवाली ( यंग फ्लेम ) विगत एक माह से क्षेत्र में बुखार का प्रकोप जारी है शहर के अधिकां...
सामाजिक संस्थाए व् प्रशासन मोंन
डबवाली (यंग फ्लेम) विगत एक माह से क्षेत्र में बुखार का प्रकोप जारी है शहर के अधिकांश अस्पताल बुखार पीडि़तों से भरे पड़े है। प्लैटलेट्स कम हो जाने के केस भारी तादाद में पहली बा सामने रहे है। जिसके चलते अनेक मरीजों को लुधियाना आदि शहरों के बड़े अस्पतालों में इलाज हेतु दाखिल होना पड़ रहा है।
कम आय वर्ग से संबंधित बुखार पीडि़तों को महंगे इलाज के चलते बेहद परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा कोई विशेष राहत नहीं मिल पा रही है। महंगे टैस्टों ने जहां पीडि़तों की कमर तोड़कर रख दी है वहीं कुछ लेबोरेट्रीयों की टैस्ट रिपोर्ट पर सवालिया निशान भी लगे है।
प्लैटलेट्स को बढ़ाने में कारगर रहा 'कीवीÓ फल भी 30 से 40 रूपए प्रति नग बि रहा है। उधर, बकरी का दूध भी इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। कुछ बकरी पालक तो दूध के बदले में कोई पैसा नहीं ले रहे लेकिन कहीं-कहीं यह 500-600 रूपए प्रति किलो तक बिक रहा है। गौरतलब है कि बकरी के दूध से भी प्लैटलेट्स बढऩे की बाते कहीं जा रही है। हालांकि आर्युवेद एवं होम्योपेथी पद्धति में प्लैटलेट्स बढाने हेतु बेहद कारगर इलाज बताया जा रहा है लेकिन आमजन अभी तक इन पद्धतियों से जुड़ा हुआ नहीं है तथा आमजन गिलोय, आवँला, तुलसी व सस्सी होम्योपेथी दवा को ज्यादा तरजीह नहीं दे रहा है खासकर ग्रामीणों को इन पद्धतियों बारे कोई जानकारी नहीं है तथा ये लोग मजबूरीवश महंगा इलाज करवा रहे है। प्रशासन को चाहिए कि जरूरतमंदों को मुफ्त टैस्ट सुविधा उपलब्ध करवाये तथा बीमारी एवं कारगर इलाज बारे जागरूकता पैदा करने हेतु प्रचार अभियान चलाएं। समाजसेवी संस्थाओं को भी तुरंत इस ओर ध्यान देना चाहिए तथा निशुल्क कैम्प आदि लगाकर अपना योगदान करना चाहिए।
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