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गुरुवार, नवंबर 03, 2011

पूजनीय होने के बावजूद भी बेसहारा है गाय

डबवाली-आज गोपाष्टमी है अर्थात गौपूजन का दिन। माना जाता है कि गाय में 33 करोड़ देवी देवताओं का वास होता है। जो मनुष्य गौ सेवा करता है वह संपूर्ण संसारिक परलौकिक सुखों को प्राप्त करता है। उसे सभी तीर्थों का पुण्य भी प्राप्त होता है।
इसके विपरीत वर्तमान समय में गौ सेवा तो दूर गऊओं की हो रही दुर्गति को रोकने के लिए भी कोई प्रयास नहीं हो रहे। गाय बेसहारा हो चुकी है और उसे आवारा कहा जाने लगा है। शहर में बेसहारा रूप में घूम रही गऊओं की संख्या में दिन प्रतिदिन बढ़ोतरी हो रही है। गऊएं अपना पेट भरने के लिए एक गली से दूसरी गली व एक घर से दूसरे घर घूमती रहती है। कहीं से खाने को कुछ मिल जाता है तो अधिकांश लोग एक लाठी के सहारे उसे दुत्कार कर भगा देते हैं। अक्सर कूड़े के ढ़ेरों में पड़ी गंदगी को खाकर गुजारा करना पड़ता है। भूखी-प्यासी गाय दिन भर घूमने के बाद जब थक जाती है तो पक्की सड़क पर ही बैठ जाती है। कई बार तो लोग उसे बैठने भी नहीं देते ताकि वह उनके घर के बाहर गंदगी न फैलाए। इस प्रकार धार्मिक ग्रंथों में जिस गाय को पूजा के योग्य माना गया है उसे आज लाठियां मिल रही हैं। आईये गोपाष्टमी का यह उत्सव गऊओं को सहारा देकर मनाएं। केवल एक दिन ही नहीं बेसहारा घूम रहे गऊओं की हो रही दुर्गति रोकने के लिए मिलकर प्रयास करें। प्रशासन से भी अपील है कि बेसहारा गऊओं को आश्रय देने का प्रबंध करे।
डबवाली में इस समय दो गौशालाएं बनी हुई हैं जिनमें कितनी ही बेसहारा गऊओं को आश्रय मिला हुआ है। इन गौशालाओं में करीब 1200 गाय रह रही हैं। इन गौशालाओं की गाय रखने की क्षमता करीब इतनी ही है। इस कारण से शहर में बेसहारा होकर घूमने वाली सैंकडों गऊओं को यहां आश्रय नहीं दिया जा सकता। इसके अलावा गऊओं के पालन पोषण पर होने वाले खर्च को लेकर भी आर्थिक अभाव से जूझ रही गौशालाएं बेसहारा गऊओं को आश्रय देने से कतराती हैं।

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