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गुरुवार, नवंबर 24, 2011

अभी तो चांटा मारा है, कल गोली चली तो नहीं होगी हैरानी'


केंद्रीय मंत्री शरद पवार पर एक शख्‍स ने हमला कर दिया। पवार इफको के एक कार्यक्रम में हिस्‍सा लेने गुरुवार को एनडीएमसी सेंटर पहुंचे थे। तभी हरमिंदर सिंह नाम के इस शख्‍स ने शरद पवार को थप्‍पड़ जड़ दिया। इसी शख्‍स ने पूर्व मंत्री सुखराम पर कोर्ट परिसर में हमला किया था।

इस घटना के बारे में सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। हरेश कुमार के मुताबिक, आम-आदमी नेताओं से इतनी ज्यादा घृणा करने लगा है कि वह चाटा मारने पर उतारु हो गया है। कल कोई गोली चलाए तो हैरत नहीं होगा। क्योंकि नेतागण इसी के लायक हैं। जनता परेशान है और ये खुद मलाई खा रहे हैं। जिस जनता की गाढ़ी कमाई के टैक्स से वे मामूली कीमत पर अपने लिए सुविधायें जुटाते हैं उनकी वे परवाह करना ही भूल गए हैं। जब चुनाव आता है तो सारे रंगे सियार एक जैसे हो जाते हैं और आम-आदमी को अपना माई-बाप बताते हैं लेकिन वोटों के पड़ने के बाद भूल जाते हैं।

रितेश वर्मा के मुताबिक, अनुभवी नेता क्या होता है ये शरद पवार ने दिखा दिया। महंगाई से पीड़ित आम आदमी से थप्पड़ खाने के बाद भी वह बगैर विचलित हुए आगे बढ़ गए। जैसे कुछ हुआ ही न हो। आदर्श बातें, आदर्श स्थितियों के लिए होती हैं। जब सरकार और व्यवस्था आम लोगों के लिए आदर्श नहीं है तो जनता की प्रतिक्रिया आदर्श कैसे रहेगी।

वसीम अकरम के मुताबिक, गंदी राजनीति करते हुए इन नेताओं को चाहे जितना वैचारिक और राजनीतिक थप्पड मारो इन्हें कुछ असर नहीं करता, जब तक कि इन्हें वास्तविक थप्पड मारकर उसका एहसास न कराया जाये। भगत सिंह ने एसेंबली में बम फेंकने के बाद कहा था कि बहरों को सुनाने के लिए धमाकों की जरूरत होती है। जनता अपना दर्द सुना-सुनाकर थक चुकी है, लेकिन अभी तक इन नेताओं के कान पर जूं तक नहीं रेंगा। अब वक्त आ गया है इन्हें दर्द का एहसास थप्पडों से कराया जाये।

सतिश सिंह के मुताबिक, सरकार की नीतियो से जनता परेशान है। आम आदमियों की सरकार उन्हीं का संघार करने पर आमदा है। ऐसे मे लोगो का गुस्सा फूटना लाजमी है। शदर पवार पर थप्पड़ पड़ना ताज्जुब की बात नहीं है।

ज्ञानेन्द्र शुक्ल के मुताबिक, राजनेताओं पर जूते उछालकर लोग अभी तक नाराजगी उतार रहे थे तो अब मारपीट पर भी उतारू हो गए। सत्ताधीशों के खिलाफ जनाक्रोश की ज्वालामुखी फट पड़ने के कगार पर है। शबनम खान के मुताबिक, शरद पवार पर हमला व्यक्तिगत नाराज़गी से लेकर षडयंत्र कुछ भी हो सकता है। महंगाई पर विरोध करने के ऐसे तरीके लोकतंत्र में सही नहीं है।

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