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Title: एचपीएस एस सीनियर सैकण्डरी स्कूल में वर्कशॉप का आयोजन
Author: Young Flame
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डबवाली - एचपीएस एस सीनियर सैकण्डरी स्कूल में पर वर्तमान युग में सफलता पूर्वक परवरिश कैसे करें विषय पर एक वर्कशॉप का आयोज...
डबवाली- एचपीएस एस सीनियर सैकण्डरी स्कूल में पर वर्तमान युग में सफलता पूर्वक परवरिश कैसे करें विषय पर एक वर्कशॉप का आयोजन गत शाम किया गया जिसमें गिनिज़ बुक के वल्र्ड रिकार्ड होल्डर दिल्ली से पधारे मुहम्मद फैज़ल ने परवरिश के सिद्धांत, बच्चे के लिए स्वास्थ्यवर्द्धक था क्षमतावान वातावरण कैसे बनांए, अपनी परवरिश शैली का अवलोकन कैसे करें तथा बच्चों के मनोविज्ञान को समझने की विधांए बताई। उन्होंने बताया कि परवरिश की विधांए सीखाने के लिए किसी स्कूल या कालेज में अथवा विष्वविद्यालय में कोई डिग्री अथवा कोर्स नहीं करवाया जाता जबकि आधुनिक युग में यह अति आवश्यक हो गया है। अक्सर अभिभावक अपनी इच्छांए बच्चों पर थोंपते हैं अथवा वे अपने जीवन में जो नहीं कर पाए उन्हें पूरा करने के लिए बच्चों पर बड़े-बड़े सपने लालच के साथ लाद देते हैं।
उन्होंने बताया कि जन्म के समय न तो कोई चोर पैदा होता है और न ही कोई झूठ बोलना सीख कर आता है। इसमें अधिकतर योगदान माता-पिता का अथवा वातावरण को होता है जिसमें वह रहता है। उन्होंने वर्कशॉप के दौरान बताया कि बहाने बनाने वाले बच्चे अपनी आँखे किधर फेरते हैं, झूठ बोलने वाले कैसे, लीक पीटने वाले किधर तथा जीवन में आगे बढऩे वाले बच्चे कैसे देखते हैं। जरूरत है माता-पिता को वह सब समझने की। इसके लिए उन्होंने अभिभावक को कम्पयूटर व प्रोजैक्टर की मदद से विस्तार पूर्वक समझाया। उन्होंने पेरंटिग के बारे में बोलते हुए कहा कि जन्म के बाद से लेकर यौवन तक के विकास की शैली ही पेर्टिंग है अर्थात् परवरिश है। उन्होंने कहा कि केवल बड़ा कर देना अथवा खाना-खिलाना, कपड़े आदि देना फीस देकर स्कूल भेजना पेर्टिंग नहीं है। पेंर्टिंग के बारे में उन्होंने बहुत सी बातें टिप्स के रूप में बताई जिससे परवरिश का भी अपना एक आनंद आने लगता है। उन्होंने कहा कि तुलना के आधार पर परवरिश नकारात्मक परवरिश है। 7 वर्ष तक के बच्चों को तो कभी भी न्यूज़ नहीं दिखानी चाहिए। बच्चों को टी.वी. या विडियो गेम्ज़ से रोकें नहीं अपितु अच्छे चैनल तथा अच्छी गेम्ज़ लेकर दें व दिखांए। बच्चों को थैंक्स गीविंग विधा अर्थात् आभार व्यक्त करना जरूर सीखांए। बच्चों को पैसे की मैनेज़मैंट तथा टाईम की मैपेज़मैंट जरूर सीखांए। अधिकतर विकास की बातें रात 9 बजे से सुबह 7 बजे की बीच ही सम्पन्न होती हैं। बच्चे के खाना खाने के समय, उसके द्वारा अपनी पुस्तकें व युनिफार्म आदि उचित स्थान पर रखने के साथ-साथ घर को भी साफ व सुन्दर बनाना तथा आडोस-पडोस में व्यवहार करना जरूरी सीखांए। 7 वर्ष की उम्र तक सीखी गई बातें कभी भूलती नहीं और उसके बाद सीखी बतांए अक्सर बिगड़ जाती हैं।
उन्होंने बताया कि बच्चों की सदैव बिना की शर्त के मदद करें तथा मदद लें। अपने बच्चों को सामान्य बनने दो विशेष वह खुद बन जाएगा। बच्चों से आज ही बुढापे का सहारा ढूंढना उचित नहीं। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान माता-पिता बनने पर चुटकी लेते हुए कहा कि हालांकि वे अभी स्वयं पिता नहीं बने परन्तु अपने बचपन तथा अच्छी परवरिश का ही वे परिणाम मानते हैं कि वे आज इस विशय पर 100 से अधिक वर्कशॉप कर चुके हैं। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अभिभावकों को मुहम्मद फैजल द्वारा वैदिक गणित के भी अनेकों सूत्रों का प्रयोग करना सीखाया। अभिभावकों ने न केवल इसमें रूचि ली अपितु प्रबंधक समिति द्वारा किए गए इस प्रयास के लिए आभार भी व्यक्त किया। कार्यक्रम का शुभारम्भ माँ सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलन कर मुहम्मद फैजल, विद्यालय संचालिका सुजाता सचदेवा तथा बाल विभाग की प्रमुख मैडम नोरीन दास ने किया।
कार्यक्रम का संचालन मैडम रमनदीप कौर सिद्धू ने बाखूबी किया। कार्यक्रम के अंत में विद्यालय प्रबंधक समीति की और से मुहम्मद फैजल को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
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