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Title: अकाली-भाजपा गठबंधन को 65 सीटों पर बढ़त,दोबारा सत्ता में लोटना लग-भग तय
Author: Young Flame
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बागी , भीतरघात व मनप्रीत के मोर्चें ने कांग्रेस को पीछे धकेला महावीर सहारण 9354862355 पंजाब प्रदेश में मतदाता अब की बार रिवायत ...
बागी, भीतरघात व मनप्रीत के मोर्चें ने कांग्रेस को पीछे धकेला
महावीर सहारण
9354862355

पंजाब प्रदेश में मतदाता अब की बार रिवायत वाकई बदलने जा रहे है। अकाली-भाजपा गठजोड़ हैरानीजनक तौर पर लगातार दूसरी बार सता सम्भालने के नजदीक पहुंच गया है। प्रदेश भर में कहीं भी सतारूढ़ गठबंधन को एन्टी-एनकम्बैंसी फैक्टर का बड़ा नुकसान होने की कोई सूचना नहीं है। हालांकि चुनावी घोषणा से पूर्व कांग्रेस की बढ़त मानी जा रही थी। मनप्रीत बादल द्वारा अकालीदल से बगावत कांग्रेसी खेमे के लिए वरदान समझी जा रही थी मालवा के बड़े इलाके को प्रभावित करने वाला डेरा सच्चा सौदा का समर्थक वोट बैंक भी कांग्रेस के पक्ष में एकतरफा माना जा रहा था। परंतु टिकट बंटवारे से कांग्रेस में हुई बड़ी बगावत से हालात पलटने शुरू हुए तथा उसके बाद प्रदेश की राजनीति में घटा प्रत्येक घटनाक्रम अकाली-भाजपा गठबंधन के पक्ष में होता चला गया। जैसे कि मनप्रीत बादल द्वारा वामपंथियों से समझौता कांग्रेस के लिए बेहद नुकसान देह रहा। साथ ही सिरसा के सच्चा सौदा डेरा ने भी कांग्रेस के पक्ष में पिछले चुनाव की तरह स्पष्ट ऐलान करने से इंकार कर दिया। तथा एक दर्जन सीटों पर डेरा प्रेमियों द्वारा अकाली दल गठबंधन के पक्ष में मतदान करने की पुख्ता सूचनाऐं है। प्रदेश में मनप्रीत बादल के नेतृत्व में 115 सीटों पर सांझा मोर्चा चुनाव लड़ा, जिन में 22 सीटों पर वामपंथियों ने उम्मीदवार उतारे। गौरतलब है कि वामपंथियों ने पिछले चुनाव में कांग्रेस का समर्थन किया था। मनप्रीत के मोर्चे की तरफ सतापक्ष से नाराज होने वाले काफी मतदाताओं का रूझान देखा गया। यह भी कांग्रेस के लिए नुकसान देह माना जा रहा है। चूंकि सांझा मोर्चा बनता तो इन मतों का झुकाव स्वाभाविक रूप से कांग्रेस के पक्ष में होना था। इसके अलावा चुनाव आयोग द्वारा शुरूआती दौर में की गई जबरदस्त सख्ती अंत में खोखली साबित हुई तथा कथित रूप से पैंसों का जो खुला खेल हुआ उसमें भी कांग्रेस पिछड़ती दिखाई दी। कुल मिलाकर वरिष्ठतम मुख्यमंत्री . प्रकाश सिंह बादल ने राजनीतिक चार्तुय का जैसा सटीक प्रदर्शन चुनावी चक्रव्यूह के प्रत्येक क्षेत्र में किया यह बेमिसाल कहा जा सकता है। एक-दो नेताओं को छोड़कर सभी नामवर नेताओं या उनके प्रभावशाली संबंधियों को चुनाव मैदान में उतारा। जोकि अधिकांश स्थानों पर जीत की ओर अग्रसर है। प्रदेश में प्रभावी किसान जत्थेबंदी प्रधानो के साथ-साथ संत समाज प्रमुखों को भी गठबंधन के पक्ष में चुनावी मुहिम चलाने हेतु रजामंद किया साथ ही डेरा प्रेमियों का एक हिस्सा भी अपने पक्ष करने में सफल रहे है कांग्रेस के मुकाबले सतारूढ़ गठबंधन का घोषणापत्र भी मतदाताओं को आकर्षित करने में सफल रहा। वहीं सुखबीर बादल हरसिमरत कौर बादल के जोशीले भाषणों से जनसभाओं में अकाली कार्यकर्ताओं को उत्साहित होते देखा गया। वहीं कैप्टन अमरेंद्र सिंह का जादू बड़ी बगावत के चलते ढलता सा प्रतीत होता रहा। तथा राजेंद्र कौर _ जगमीत बराड़ जैसे दूसरे नेता प्रदेश में अपना प्रभाव नही छोड़ पाए।
माझा, दोआबा में हालांकि सतारूढ़ गठबंधन पिछला प्रदर्शन नहीं दोहरा पा रहा है। वैसे भी जब किसी चुनाव में अगर बड़ी लहर हो तो स्थानीय समीकरण ही जीत हार तय किया करते है। ऐसे ही हालातों में बागी उम्मीदवार या भीतरघात चुनावी नतीजों को पूरी तरह से बदलने में सफल हो जाते है। परिसिमन के चलते चुनाव क्षेत्रों में हुई फेरबदल चुनावी नतीजों को प्रभावित कर रही है तथा सुच्चा सिंह छोटेपुर हंसराज जोसन जैसे कई बागी प्रत्याशी दो-दो हलकों के नतीजों को प्रभावित कर रहे है। कांग्रेस के बागी उम्मीदवारों या भीतरघात से पार्टी को जिन सीटों पर यकीनन हार का सामना करना पड़ रहा है उनमें सुजानपुर, पठानकोट, गुरदासपुर, कांदिया, डेरा बाबा नानक, मजीठा, अमृतसर (पूर्वी), बाबा बकाला, जालंधर (उतरी), जालंधर(केंट), मुकेरिया, चब्बेवाल, बलाचौर, आनंदपुर साहिब, चमकौर साहिब, खरड़, डेरा बस्सी, फतेहगढ़ साहिब, अमलोह, साहनेवाल, बाघापुराना, फिरोजपुर शहर, जलालाबाद, बल्लुआना, गिदढ़बाहा, मलोट, कोटकपुरा, रामपुरा फूल, भदोड़, शुतराना,जीरा शामिल है। अकाली-भाजपा गठजोड़ को बागियों के चलते निम्रलिखित स्थानों पर हार का सामना करना पड़ सकता है। तरनतारन, आत्म नगर, अबोहर, घनौर, महलकलां, नवां शहर। डेरा बस्सी फतेहगढ़ साहिब ऐसी सीटे है जहां अकाली दल एवं कांग्रेस दोनों के ही बागी है। इसके अलावा ऐसे हलके हैं जहां कांग्रेस छोड़कर पीपीपी की टिकट पर चुनाव लड़ रहे सीपीआई, सीपीएम के चिन्ह पर चुनावी किस्मत आजमा रहे मजबूत प्रत्याशी अकाली दल गठबंधन की जीत का कारण बन रहे ळै। इसमें बठिंडा देहाती, भूच्चो मंडी, तलवंडी साबो, बुडलाडा, होशियारपुर, मानसा आदि है। बसपा भी फाजिल्का, आदमपुर तथा मलेरकोटला जैसी सीटों पर भारी तादाद में कांग्रेस के वोट बैंक में सेंध लगा रही है।
माझा में पिछली बार 21 सीटों पर सत्तारूढ़ गठबंधन को विजय प्राप्त हुई थी। अब थोड़ी कमजोरी यहां है। पठानकोट जिले की पठानकोट सुजानपुर सीटों पर कांग्रेस की यकीनी हार है। भाजपा के अश्विनी शर्मा के लिए कांग्रेस के बागी अशोक शर्मा ने राह आसान कर दी है। जबकि सुजानपुर में भाजपा के दिनेश बब्बू, बागी कांग्रेसी नरेशपुरी पर भारी है। यहां कांग्रेस के विनय महाजन तीसरे स्थान पर है।भोआ में भाजपा एवं कांग्रेस के क्रमश: सीमा देवी बलबीर राज दोनों को भीतरघात से जूझना पड़ रहा है। थोड़ी बढ़त कांग्रेस की यहां है। गुरदासपुर जिले में बटाला सीट पर अश्विनी सेखड़ी (कांग्रेस) की जीत तय है तो गुरदासपुर से अकालीदल के गुरबचन सिंह बब्बेहाली बढिय़ा काम एवं कांग्रेस के भीतरघात के सहयोग से आसान जीत दर्ज कर रहे है। दीना नगर में भाजपा कांग्रेस में नजदीकी मुकाबला है। कांग्रेस के बागी सुच्चा सिंह छोटेपुर ने कांदिया में जहां सेवा सिंह सेखवा (अकालीदल) की राह आसान कर दी। वहीं डेरा बाबा नानक से सूच्चा सिंह लंगाह (अकालीदल) को भी राहत दे रहे हैं। फतेहगढ़ चूडिय़ा में निर्मल सिंह काहलो (अकालीदल) कांग्रेस के तृप्त राजेंद्र सिंह बाजवां पर भारी पड़ रहे है। रिर्जव हलके हरगोबिंदपुर से भी अकालीदल के देशराज घुग्गा की कांग्रेस के बलविंद्र सिंह लाड़ी पर साफ बढ़त है। तरनतारन जिले में अकालीदल का दबदबा बरकरार है। तरनतारन हलका में अकाली बागी दविंद्र सिंह लाली का कांग्रेस के धर्मवीर अग्हिोत्री से मुकाबला है। यहां मौजूदा विधायक हरमीत सिंह संधु पिछे रह गए है। पट्टी से आदेश प्रताप केरो खेमकरण से बिरसा सिंह बल्टोहा साफ जीत दर्ज कर रहे है। खडूर साहिब हलका से मांझे के दिग्गज अकाली नेता रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा कांग्रेसी रमनजीत सिंह पर भारी माने जा रहे है। अमृतसर जिला में सत्तारूढ़ गठबंधन को बढ़त हासिल हो रही है। अजनाला से अकाली अमरपाल बोनी कांग्रेस के हरप्रताप अजनाला से आगे है। सांसद डॉ. रतन सिंह अजनाला का यह क्षेत्र अकाली दल का परम्परागत गढ़ माना जाता है। मजीठा में विक्रम सिंह मजीठिया बड़ी जीत दर्ज कर रहे है। राजा सांसी में सुखविंद्र सिंह सरकारिया अकाली वीर सिंह लोपोके में बड़ी टक्कर है। परंतु सरकारिया को थोड़ी बढ़त है। जंडियाला रिर्जव में भी इसी प्रकार का मामला है यहां भी सरदूल सिंह (कांग्रेस) बलजीत सिंह जलाल (अकालीदल) में नजदीकी टक्कर है। अटारी रिर्जव में अकाली गुलजार सिंह राणिके आरामदायक स्थिति में है। तो बाबा बकाला रिजर्व में भी कांग्रेस की बगावत ने अकाली मनजीत सिंह मना को जीत के राह पर ला दिया है। अमृतसर (उतरी) में भाजपा के अनिल जोशी बेहद मजबूत है तो अमृतसर (पश्चिमी)में यहीं स्थिति कांग्रेस के राजकुमार वेरका की है। अमृतसर केंद्रीय में कांग्रेस के ओपी सोनी भाजपा के तरूण चुघ पर भारी पड़ रहे है। अमृतसर (पूर्वी) में डॉ. नवजोत कौर सिधु की राह कांग्रेस की लड़ाई ने आसान कर दी है। अमृतसर (दक्षिण) में अकाली उम्मीदवार इन्द्रवीर सिंह बुलारिया कांग्रेस के जसबीर सिंह डिम्पा पर भारी पड़ रहे है। हालांकि गुरप्रताप टिक्का (अकाली बागी) उनका नुकसान कर रहे है। माझा में अकाली-भाजपा 15 सीटों पर तथा कांग्रेस 6 पर बढ़त बना पायी है जबकि 4 स्थानों पर कड़ा मुकाबला है।
दोआबा के कपूरथला जिला के कपूरथला हलका में कांग्रेस के गुरजीत राणा को अकाली दल के सर्वजीत मक्कड़ ने कड़ी टक्कर दी है। पीपीपी के रघुवीर सिंह ने मुकाबला तिकोना बनाने का प्रयास किया। कुल मिलाकर गुरजीत राणा की राह आसान नहीं है। तो भुुलत्थ में बीबी जागीर कौर पिछली हार का बदला चुकाती प्रतीत हो रही है। सुल्तानपुर लोधी में अकाली डॉ. उपीन्द्रजीत कौर की जीत तय है। वहीं फगवाड़ा से भाजपा के पूर्व आईएएस सोम प्रकाश विधानसभा में पहुंच जाएंगे। जालंधर जिला हैरानी जनक नतीजे दे सकता है। नकोदर से अमरजीत समरा (कांग्रेसी) की हालत पतली है। अकाली गुरप्रताप सिंह बडाला अपने पिता कुलदीप बडाला की हार का बदला लेने के बेहद नजदीक माने जा रहे है। शाहकोट में भी अकाली दिग्गज अजीत सिंह कोहाड़ कांग्रेस के कर्नल सीडी सिंह कम्बोज पर भारी पड़ रहे है। फिल्लोर (सु.) करतारपुर (सु.) में कांग्रेसी संतोख सिंह जगजीत सिंह मजबूत स्थिति में है लेकिन आदमपुर मं अकाली कांग्रेस दोनों ही प्रत्याशी बसपा से जुडे रहे है। यहां बसपा के साथ इनका तिकोना मुकाबला है लेकिन अकाली पवन टिनू को बढ़त है। जालंधर पश्चमी में सांसद पत्नी सुमन केपी जीत के नजदीक है। वहीं जालंधर केंदी्रय में मनोरंजन कालिया भी सीट बचा ले जा रहे है लेकिन जालंधर उतरी में कांग्रेस दिग्गज अवतार हैनरी को बागी दिनेश ढल्ल ने झटका दिया है। यहां भाजपा के केडी भंडारी की लॉटरी खुल रही है। जालंधर केंट में जगवीर सिंह बराड़ का पीपीपी छोडऩा घातक साबित हुआ है तथा प्रसिद्ध हॉकी खिलाड़ी प्रगट सिंह का स्कूप गोल में तबदील होने जा रहा है। होशियारपुर जिला के मुकेरियां हलके से कांग्रेस मुकाबले से बाहर है। यहां पूर्व विधानसभा स्पीकर केवल कृष्ण के पुत्र रजनीश बब्बी का भाजपा के अरूणेश शाकर से मुकाबला है। दसूहा में भाजपा के अमरजीत शाही कांग्रेस के रमेश चंद्र डोगरा में कड़ी टक्कर है। शाम चौरासी (सु.)में कांग्रेस के चौधरी राम लुभाया की अकाली महेंद्र कौर जोश पर थोड़ी बढ़त हासिल है। होशियारपुर में भाजपा के तीक्षण सूद की प्रतिष्ठा दाव पर है। कांग्रेस के सुंदर शाम अरोड़ा उन्हें कड़ी टक्कर दे रहे है। परंतु वे भीतरघात से नहीं बच पाए है। चब्बेवाल (सु.)में अकाली सोहन सिंह ठंडल जीत रहे है तो उड़मुड़ में मुकाबला सख्त है। यहां अकाली प्रत्याशी को थोड़ी बगावत झेलनी पड़ी है। गढशंकर में लव कुमार गोल्ड़ी के लिए चिंताजनक खबरे है यहां भाजपा से सीट बदलकर अकालीदल ने सुरेंद्र सिंह राठा को मैदान में उतारा था। यह दाव अकाली दल के लिए चलता दिखाई दे रहा है। नवांशहर में कांग्रेस की गुरइकबाल कौर की जीत भी तय मानी जा रही है। जबकि बंगा (सु.) में सोहन सिंह अकालीदल तरलोचन सिंह कांग्रेसी में पलड़ा थोडा कांग्रेस का झुका हुआ लग रहा है। बलाचोर में अकाली दल के चौ. नंद लाल जीत की और है दोआबा में 23 सीटों में कांग्रेस 9 सीटों, अकाली भाजपा 8 सीटों पर जीत दर्ज कर रही है। जबकि एक पर आजाद 5 सीटों पर नजदीकी मुकाबला है।
अब बारी मालवा की है। मालवा को दो भागों