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Title: पंजाब में औंधे मुंह गिरे अफसर, तो यूपी में दुखी अफसरों की लगी मौज
Author: Dabwalinews.com
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पंजाब में जहां चुनावी परिणामों ने कई अफसरों को औंधे मुंह गिरा दिया है, वहीं उतर प्रदेश में पिछले पांच सालों से हाशिए पर आए अधिकारियों के च...
पंजाब में जहां चुनावी परिणामों ने कई अफसरों को औंधे मुंह गिरा दिया है, वहीं उतर प्रदेश में पिछले पांच सालों से हाशिए पर आए अधिकारियों के चेहरे खिला दिए है। जहां पंजाब में कई आईएएस और पुलिस अधिकारियों को इस चुनाव परिणाम ने नींद उड़ा दिए, वहीं मायावती के करीबी अधिकारियों ने पहले से ही चुनाव परिणाम का अंदाज लगाकर अपना बोरिया बिस्तर बांध लिया था। यूपी में बसपा का जाना तय था और सपा का आना तय था। इसलिए मायावती के करीबी अधिकारियों ने पहले ही इंतजाम शुरू कर लिया था। जबकि पंजाब में अकाली दल का जाना तय मानकर कांग्रेसी समर्थित अधिकारियों ने जश्न मनाने शुरू कर दिए थे। पंजाब पुलिस हेडक्वार्टर में कुछ अधिकारी तो पद भी बांटने में लग गए थे। लेकिन कांग्रेस की हार के बाद इन अधिकारियों में बेहोशी का आलम है।
यूपी मे मुलायम सिंह के आने के बाद कई अधिकारियों पर गाज गिरनी तय है। मायावती के सबसे हनक वाले अधिकारी कुंवर फतेहबहादुर लाल बहादुर शास्त्री भवन छोड़ पतली गली पकड़ चुके है। वे चुनाव परिणाम वाले दिन 12 बजे के करीब ही दफ्तर छोड़ निकल गए। मायावती के दूसरे आंख-कान-नाक शशांक शेखर ने इस्तीफा दे दिया है। जबकि मुख्य सचिव अनूप मिश्र केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने को तैयार हो रहे है। नवनीत सहगल को जेल जाने का भय सता रहा है। एनएचआरएम घोटाले में सीबीआई कभी भी उन्हें गिरफ्त में ले सकती है। वैसे नवनीत सहगल पर मुलायम सिंह कई और जांच बिठाने की तैयारी में है। क्योंकि नवनीत सहगल उन अधिकारियों में से ही जिन्होंने सबसे पहले मुलायम को धोखा दिया था। वैसे कुंवर फतेहबहादुर इस समय सबसे ज्यादा डरे हुए है। क्योंकि उन्हें लग रहा है कि मुलायम सिंह के समर्थकों को पुलिस से पिटवाना उन्हें अब महंगा पड़ने वाला है।
वैसे जिन अधिकारियों को मुलायम के समय में तव्वजों मिलेगा, उनमें प्रमुख नामों में जावेद उस्मानी, नीता चौधरी और आलोक रंजन शामिल है। ये सारे मुख्य सचिव के दावेदार है। जबकि मुख्यमंत्री प्रधान सचिव के तौर पर दिप्ति विलास, माजिद अली और अनिल गुप्ता के नामों की चर्चा है। मायावती के कार्यकाल में हाशिए पर रही अनिता सिंह और आमोद कुमार जैसे अधिकारियों को भी मुख्यमंत्री कार्यालय में अहम पद मिलने की संभावना है। बताया जा रहा है कि मायावती के कार्यकाल के अधिकारियों के खिलाफ शिकायतों का पुलिंदा पहले से ही सचिवालय में पड़ा है। इन पुलिंदा को खोलने की तैयारी मुलायम सिंह के नजदीकी अधिकारी करने लगे है। क्योंकि इन अधिकारियों को प्रताडित करने में कहीं भी कोई कमी नहीं छोड़ी गई।
इधर पंजाब में हालात बदले है। पंजाब में सत्ता में अब वही अधिकारी कायम रहेंगे जो पिछले कार्यकाल में थे। क्योंकि यहा पर सताधारी दल की वापसी हो गई है। लेकिन यह वापसी कांग्रेस के खास अधिकारियों पर गाज गिरा गई है। कुछ दिन पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह के मीडिया एडवाइजर रह चुके भरतइंद्र सिंह चहल ने एक पार्टी पटियाला में दी थी। इस पार्टी में बकायदा कई अधिकारी पहुंचे थे और वहां पार्टी के दौरान ही कई पदों को आपस में बांट लिया था। क्योंकि उस समय चुनाव होकर हटे थे और कांग्रेस के हिस्से में 70 सीटें बतायी जा रही है। कांग्रेस राज आने की घोषणा कर दी गई थी और सुधीर मित्तल को कई कांग्रेसी नेताओं और पत्रकारों ने अखबारों में भावी का मुख्य सचिव घोषित कर दिया था। उधर सीएम के प्रिसिंपल सेक्रेटी पद पर भी लगने की होड़ शुरू हो गई थी। आईएएस सुरेश कुमार, डीपी रेड्डी और हिम्मत सिंह तीन अधिकारी प्रिसिंपल सेक्रेटी के होड़ में थे। कई अधिकारी इन अधिकारियों के सामने हाजिरी भी लगाने शुरू कर दिए थे। कई पत्रकार जाकर इन अधिकारियों को बधाई देने लगे थे। क्योंकि आखिर पत्रकारों के आधे से ज्यादा काम तो इन अधिकारियों से ही हो जाते है।
उधऱ पंजाब पुलिस में भी जोरदार हलचल मच गई थी। डीजीपी पद के लिए दौड़ शुरू हो गई थी और वर्तमान डीजीपी अनिल कौशिक के उताराधिकारी के कयास भी लगाने शुरू हो गए थे क्योंकि उनका रिटायरमेंट सिंतबर 2012 में है। 1982 बैच के आईएएस संजीव गुप्ता, 1978 बैच के राजन गुप्ता आदि डीजीपी बनने के लिए कांग्रेसी संपर्कों के यहां जोरदार हाजिरी पिछले एक साल से लगा रहे थे। संजीव गुप्ता की कांग्रेसी नजदीकी बढ़ते देख सुखबीर बादल ने उन्हें हाशिए पर ला दिया था और एडीजीपी रेलवे बनाकर भेज दिया था। और तो और पंजाब पुलिस हेडक्वार्टर में तैनात एक एडीजीपी रैंक के अधिकारी तो खुद ही पदों को बांट रहें थे। कांग्रेस से राजनीतिक तौर पर नजदीक उपरोक्त एडीजीपी ने लोगों को धमकाना शुरू कर दिया था। उन्होंने अपने एडीजीपी रैंक के कुछ दोस्तों को भी पोस्टिंग देने का वादा कर दिया था।
इसका एक अहम कारण था। पद बांटने वाले एडीजीपी साहब कांग्रेस की तरफ से घोषित मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की नजदीकी पाकिस्तानी महिला पत्रकार अरूषा आलम से नजदीकी बढ़ा चुके थे। अरूषा आलम जब चंडीगढ़ में होती थी तो उक्त एडीजीपी के घर खाना खाने जाती थी। उस नजदीकी का फायदा उठा उन्होंने कांग्रेस राज आने के बाद खुद को डायरेक्टर जनरल विजिलेंस घोषित कर दिया था। जबकि अपने एक खास आईपीएस दोस्त को एडिशनल डारयेक्टर जनरल, इंटेलिजेंस घोषित कर दिया था। लेकिन पंजाब सरकार की ब्यूरोक्रेसी में अब कोई खास परिवर्तन नहीं होना है। चीफ सेक्रेटी पद पर सुबोध अग्रवाल ही रहेंगे। उनके रिटायरमेंट तक उन्हें नहीं छेड़ा जाएगा। डीजीपी भी वर्तमान डीजीपी अनिल कौशिक ही रहेंगे। सितंबर में उनके रिटायरमेंट के बाद सुरेश अरोड़ा जो वर्तमान में एडीजीपी है, के डीजीपी बनने की संभावना है।
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