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मंगलवार, मई 28, 2013

रोशनी तो है, लेकिन परछाइयां गायब

डबवाली/माना (मुक्तसर) घर का मुख्य गेट खुला हुआ है, घर के बाहर लगी ट्यूब और बल्ब दिन में भी जल रहे हैं। बाड़े में बंधे हुए पशु बिन पानी और चारे के बेबस खड़े हैं। आवाज लगाने पर भी घर से किसी ने कोई जवाब नहीं दिया। भीतर जाकर देखा तो सभी कमरों में ट्यूबें जल रही थीं, दरवाजे खुले थे और घर का सामान भी वहीं का वहीं पड़ा हुआ था। यह हाल था गांव माना से कांग्रेसी नेत्री अमनप्रीत कौर के घर का। वह जिला परिषद चुनाव के लिए खड़ी थीं।

यही हाल उसके पति अमरजीत सिंह के भाई के घर का था। जहां पर काफी संख्या में कुर्सियां और चारपाई यहां-वहां पड़ी हुई थीं। घर के एक तरफ चूल्हे के पास छिटियां पड़ी हुई थीं और पास में दो गैस सिलेंडर भी थे। यहां भी काफी आवाजें लगाने के बावजूद जब किसी ने कोई जवाब न दिया तो चूल्हे पर धरे हुए पतीले का ढक्कन उठाकर देखा। एक दम से सड़ांध ने नाक में दम कर दिया। पता लगा कि यह तो चने की दाल थी, जोकि खराब हो गई थी। जबकि साथ पड़े एक अन्य पतीले में पड़ी चाय से भी ऐसी ही बेहद गंदी बदबू आ रही थी। इसी के साथ काफी सारे बर्तन और एक वाटर कूलर भी पड़ा हुआ था। परंतु उसमें पानी के स्थान पर मिट्टी पड़ी हुई थी। इस सारे सामान को देख ऐसा लग रहा था जैसे चुनाव के दिन कांग्रेसी वर्करों के लिए खाना और चाय बनाई जा रही थी। परंतु उसी दौरान हुई हिंसक घटना ने सारे गांव का माहौल ही बदल कर रख दिया।

इस घर के साथ रहती कुछ महिलाओं ने दबी जुबान में माना कि चुनाव के दिन हुई हिंसक घटना के बाद से यह घर ऐसे ही पड़े हुए हैं। बेजुबान पशुओं के दर्द को समझते हुए कोई न कोई घर के भीतर जाकर पशुओं को चारा और पानी डाल जाता है। घर खुला होने पर सामान की चोरी होने की आशंका को रद्द करते हुए महिलाओं ने गर्व से कहा कि इस गांव की यही खासियत है। गांवों के लोगों में एक सांझ है। परंतु उस दिन की घटना ने गांव के माहौल को पूरी तरह से बदल कर रख दिया है।

घर के एक तरफ चूल्हे पर बर्तन में धरी चने की दाल, जोकि बदबू मार रही है। बताया गया कि चुनाव के दिन यह दाल कांग्रेसी वर्करों के खाने के लिए बनाई गई थी।

गांव माना में गुरतेज सिंह के घर उसकी बेटी, पत्नी तथा अन्य महिलाओं की दुखभरी दास्तां सुनते हुए कांग्रेस प्रधान प्रताप सिंह बाजवा।



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