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सोमवार, मई 06, 2013

'आया तो है बसंत मगर खार पहनकर, हम जीत मनाते हैं मगर हार पहनकर'


हास्य कवि सम्मेलन 
ऐसा रंग जमा कि हंस-हंस कर पड़ गए पेट में बल

डबवाली---डबवाली में शनिवार रात ठहाकों की ऐसी महफिल सजी कि हंस-हंस कर लोगों का हाल बेहाल हो गया। राजकीय सीनियर सैकेंडरी स्कूल के विशाल मैदान में सजी इस महफिल में मौजूद प्रत्येक शख्स ने भागदौड़ व तनाव भरे माहौल से दूर घंटों तक यहां हास्य रस का आनंद उठाया। नगर की अग्रणी संस्था वरच्युस क्लब ने खुशदिल कल्चरल सोसायटी के संस्थापक स्व. सुभाष शर्मा की याद में 'हास्य कवि सम्मेलन ' का आयोजन कर हंसी की यह अनोखी महफिल सजाई थी।
इस मौके पर मुख्यमंत्री के ओएसडी डॉ. केवी सिंह मुख्यातिथि के तौर पर उपस्थित हुए। उन्होंने मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर कवि सम्मेलन का आगाज किया। सम्मेलन में अपनी कविताएं सुनाने के लिए पहुंची कवियित्री मुमताज नसीम ने अपनी मधुर आवाज में सरस्वती वंदना की। इसके बाद हास्य कवि चिराग जैन ने माईक थाम लिया और इसके साथ ही ठहाकों का दौर शुरू हो गया। उन्होंने सबसे पहले हास्य कवि शंभु शिखर को मंच पर बुलाया। माईक पकड़ते ही शंभु शिखर ने  'आया तो है बसंत मगर खार पहनकर, हम जीत मनाते हैं मगर हार पहनकर, पगड़ी यहां नाचती है साड़ी के इशारे पर, बाबा जी भागते हैं यहां सलवार पहनकर  सुनाकर राजनीति पर एक तीखा व्यंग्य किया ।  हास्य कवि सम्मेलन के इस बेहतरीन आगाज से ही सैंकडों की संख्या में वहां उपस्थित लोगों को अहसास हो गया कि हंसी की इस महफिल का अंजाम कितना अच्छा होगा। शंभु शिखर ने इस प्रकार हास्य व व्यंग्य के बाण छोडे कि लोगों को पता लग गया कि यह धुरंधर कवि हास्य कविता के किस 'शिखर पर बैठा है। उनके बाद चरणजीत चरण ने अपनी कविताओं के माध्यम से लोगों का मनोरंजन किया। तत्पश्चात प्रसिद्ध हास्य कवि वेद प्रकाश वेद को माईक सौंपा गया। वेद ने मिलावटखोरी पर एक कविता सुनाकर खूब वाहवाही बटोरी। फिर बारी आई गुलाबी व काले रंग की साडी पहने मंच पर बैठी खूबसूरत कवियत्री मुमताज नसीम की। वह अब तक कई कवियों के व्यंग्यबाण झेल चुकी थी। उसने पहले कुछ शेयर पढ़े और फिर एक रोमांटिक कविता 'प्यार हो गया है मुझे प्यार हो गया है, सूना-सूना जीवन त्यौहार हो गया है  सुनाकर माहौल को अलग ही रंग से भर दिया।  भारत-पाकिस्तान के रिश्ते पर एक कविता 'ऐ अजीजो मुझे कुछ तुमसे शिकायत भी नहीं सुनाकर मुमताज ने सबको बता दिया कि वे हिंदी कविता के सिर का 'ताज हैं। दर्शकों ने खूब तालियां बजाकर मुमताज को दाद दी। सिरसा की शान, हास्य कवि हरि सिंह दिलबर ने भी मंच पर खूब छक्के लगाए। उन्होंने 'कबूतर जा जा जा, पहले प्यार की दूजी चिठ्ठी तीजे को दे आ

व कई अन्य हास्य पंजाबी कविताएं सुनाकर दर्शकों को हंसा-हंसा कर लोटपोट कर दिया। मंच संचालन कर रहे चिराग जैन ने भी हास्य रस की खूब मिठास फिजां में घोली। लोगों को उनका अंदाज खूब पसंद आया। सबसे अंत में हास्य रस के प्रसिद्ध हरियाणवी कवि अरूण जैमिनी ने महफिल को थामा। रात के एक बज चुके थे मगर लोग अब भी भारी संख्या में वहां डटे हुए थे। अरूण जैमिनी ने आम आदमी से जुड़ी हंसी की ऐसी-ऐसी बातें सुनाई कि पंडाल में बैठे लोग समय और जगह को भूलकर हंस-हंस कर धरती पर लोटने लगे। स्थिति यह हो गई कि लोगों की हंसी रूक ही नहीं रही थी और एक बारगी अरूण जैमिनी को ही बीच में रूकना पड़ा। वो फिर शुरू हुए तो फिर ठहाके गूंजने लगे। आम लोगों के साथ-साथ कवि सम्मेलन में मौजूद मुख्यातिथि व अतिथि के रूप में मौजूद नेता, अधिकारी व पुलिस वालों तक को कवि अपनी कविताओं में लपेट रहे थे मगर हंसी की कीमत पर सबको सब मंजूर था।
इस दौरान लोगों को संबोधित करते हुए मुख्यातिथि डॉ. केवी सिंह ने इस बेहतरीन व सफल आयोजन के लिए वरच्युस क्लब को बधाई दी व क्लब को अपनी ओर से 51 हजार रूपए की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। उन्होंने यह भी बताया कि डबवाली के खेल स्टेडियम में बने ओपन एयर थियेटर में लाईट एवं साऊंड की सभी व्यवस्थाएं पूरी करने के लिए हरियाणा सरकार की ओर से 10 लाख रूपए मंजूर किए जा चुके हैं। आगामी दो-तीन माह में सभी औपचारिकताओं को पूरा कर ओपन एयर थियेटर डबवाली की जनता को समर्पित कर दिया जाएगा। इससे कला को प्रोत्साहन मिलेगा और डबवाली की प्रतिभाएं उभर कर सामने आएंगी। इस अवसर पर डॉ. केवी सिंह ने वरच्युस क्लब की ओर से स्व. सुभाष शर्मा के परिजनों व डबवाली पहुंचे तमाम कवियों को स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। इससे पहले क्लब के प्रधान नरेश शर्मा ने स्व. सुभाष शर्मा के सम्मान में उनका जीवन परिचय सबको पढ़कर सुनाया। क्लब संस्थापक केशव शर्मा व प्राजैक्ट चेयरमैन विजय मुंजाल ने सभी का आभार जताया। इस अवसर पर डबवाली के एसडीएम सुभाष श्योराण, डीएसपी पूर्ण चंद पंवार, हरियाणा पंजाबी साहित्य अकादमी के पूर्व निदेशक सीआर मुदगिल, क्लब के सलाहकार आत्मा राम अरोड़ा, डॉ. पुरूषोत्तम सिंगला, प. लाल जी महर्षि व शहर की गणमान्य हस्तियां मौजूद थी।

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