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मंगलवार, मई 28, 2013

पुलिस की दहशत के मारे माना में सन्नाटा,कई घरों पर ताले


डबवाली/ माना (मुक्तसर) गांव की फिरनी में ऐसा सन्नाटा पसरा हुआ है, जैसे यहां कोई रहता ही न हो। ज्यादातर घरों में ताले लगे हैं। जिन घरों पर ताले नहीं हैं, उनमें या तो चारपाई पर बुजुर्ग लेटे दिखते हैं पेड़ों की छाया में भूखे-प्यासे मवेशी। यह हाल है मुख्यमंत्री परकाश सिंह बादल के हलके लंबी के गांव माना का।

गांव के 150 लोग भागे हुए हैं और अधिकांश घर बंद पड़े हैं। गांव में जो लोग हैं, वे किसी भी अनजान व्यक्ति से बात नहीं कर रहे। यदि कोई बात करता भी है तो कहता है कि वह इस गांव का नहीं है, बाहर का है। गांव में भारी मात्रा में पुलिस बल तैनात है। गांव से भागे करीब १५० लोगों का गुनाह सिर्फ इतना है कि उन्होंने 19 मई को जिला परिषद और ब्लॉक समिति चुनाव के दौरान बूथ कैप्चरिंग का विरोध किया था। भीड़ ने उन कई गाडिय़ों को जला डाला था, जिनमें बैठकर एक दल के लोग बूथ कैप्चरिंग के लिए आए थे।

इसके लिए पुलिस ने 137 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। हालांकि एफआईआर में 28लोगों के ही नाम हैं। लोगों को डर है कि पुलिस कहीं उन्हें ही न गिरफ्तार कर ले। दूसरी ओर, बूथ कैप्चरिंग के आए लोगों के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई नहीं की है। उस दौरान यहां धारा 144

भी लगी थी। बावजूद वे लोग बूथ कैप्चरिंग का प्रयास कर रहे थे।


क्या हुआ 19 मई को

गांव मान में 3000 के लगभग वोट हैं। १९ मई को सरकारी स्कूल में ब्लाक समिति व जिला परिषद चुनाव को लेकर मतदान हुआ। तीन बूथ बने। दोपहर तक शांति थी। दोपहर बाद 8 गाडिय़ों का काफिला आया, जिसमें सवार लोगों के बूथ में दाखिल होने का प्रयास किया तो तनाव बढ़ गया। भड़के लोगों ने गाडिय़ों को आग लगाकर तोडफ़ोड़ की। पुलिस ने लाठीचार्ज व हवाई फायङ्क्षरग कर स्थिति कंट्रोल की। मगर पुलिस ने गांव के 138 के लगभग लोगों पर केस दर्ज किया। जबकि गाडिय़ों में सवार होकर आए बाहरी लोगों को छोड़ दिया।

रात में छापा मारती है पुलिस
 टीम जब गांव के सरकारी स्कूल पहुंची तो बच्चे क्रिकेट खेल रहे थे। जब उनसे १९ मई को हुए घटनाक्रम के बारे में पूछा गया तो सहम के मारे बच्चे खेल छोड़कर ही मौके से चले गए। गांववासी दबी आवाज में कहते हैं कि पिछले एक दिन से पुलिस गांव से हटा ली गई है, मगर रात को पुलिस घरों में छापामारी करती है।

ज्यादातर घरों में ताले
गांव में अधिकांश घरों पर ताले थे। जो खुले थे, उनके भी दरवाजे बंद थे। एक गांववासी ने यह कहकर कुछ कहने से इनकार कर दिया कि वह तो किसी और गांव का रहने वाला है। ज्यादा टटोलने पर उसने कहा कि उसका नाम इकबाल सिंह है तथा गांव की फिरनी में उसका भी एक मकान है। वह अपनी पहचान इसलिए नहीं बताता क्योंकि उसे डर है कि कहीं पुलिस उसे ही न उठाकर ले जाए।

हर आहट फैलाती खौफ
 टीम सिकंदर सिंह के घर गई तो वहां ताला लगा था। सामने घर से कुछ महिलाओं की आवाज आ रही थी। दरवाजा खटखटाया तो आवाज बंद हो गई, किसी ने दरवाजा भी नहीं खोला। जब टीम ने पहचान बताई तो दरवाजा खुला। वृद्धा मनजीत कौर ने बताया कि वह शेरगढ़ की रहने वाली है। अपने भाई सिकंदर के घर की देखरेख के लिए आई है। उसने बताया उनका पूरा परिवार घर छोड़कर चला गया है।



डीजीपी को नजर नहीं आती दहशत
डीजीपी सुमेध सिंह सैणी का कहना है कि गांव में दहशत का माहौल नहीं है। पुलिस कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात है। उधर, सोमवार को कांग्रेस अध्यक्ष प्रताप सिंह बाजवा सांसदों व विधायकों के साथ गांव माना पहुंचेंगे। उन्हें आशंका है कि पुलिस घुसने नहीं देगी।

सरकार जिम्मेदार
सीएम के हलके में यह हाल है तो पूरे पंजाब में क्या हाल होगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। इस दहशत के पीछे सरकार है।
- सुनील जाखड़, नेता विपक्ष

खौफ का पता नहीं
डीजीपी सुमेध सिंह सैणी को निर्देश दिए हैं कि वे सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध करें, ताकि किसी भी प्रकार का नुकसान न हो। लोगों में किसी बात का खौफ  है, इसकी मुझे कोई जानकारी नहीं है।
-सुखबीर बादल, उपमुख्यमंत्री




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