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गुरुवार, अक्तूबर 23, 2014

धूल-मिट्टी ले लो भाई धूल-मिट्टी, एक दिन मरना तो है ही क्यों ना मीठे ज़हर से मरो !

शहर में एक मिठाई की दुकान के बाहर खुले में लगी मिठाई की स्टॉल
डबवाली -धूल-मिट्टी ले लो भाई धूल-मिट्टी, मरना तो है  ही क्यों ना मीठे  ज़हर से मरो ! कुछ इस तरह से बे धड़क हो कर आज प्रशासन के आदेशों को ताक पर धरकर अनेक लोगों ने खुले में मिठाईयों की बिक्री शुरू कर दी है, जिसके कारण लोगों का स्वास्थय दांव पर है। मिठाईयों की बिक्री की वजह से इन पर धूल-मिट्टी पड़ रही है और उनके प्रदुषित होने की आशंका भी बनी हुई है। शहर में कई जगह तो गंदगी के ढेरों के निकट मिठाई की स्टॉले सजाई गई है।
मिठाई के नाम पर कमाई करने की चाह रखने वालों ने शहर के बाहर कालौनियों में मिठाईयों की स्टॉल लगाई हुई है। जिन लोगों का मिठाई से दूर-दूर का वास्ता नहीं है, वे भी पर्व पर मिठाई बेचकर जेब भरने की ताक में है। ऐसे में इन दुकानदारों द्वारा किस दर्जे की, किस क्वालिटी की मिठाई बेची जा रही होगी, इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। इसके साथ ही मिठाई की स्टॉल लगाकर बैठे दुकानदारों द्वारा ग्राहकों को मिठाई के डिब्बे का वजन साथ तौलकर भी चपत लगाई जा रही है।  माप तौल विभाग के अनुसार मिठाई के डिब्बे का वजन मिठाई के साथ नहीं किया जा सकता। बावजूद यह खेल सरेआम खेला जा रहा है। ग्राहकों को गत्ते का डिब्बा 200 से 500 रूपये किलो की दर पर बेचा जा रहा है। चार दिन के लिए मिठाई बेचने वाले घटिया दर्जे की मिठाई बेचकर गायब हो जाएंगे और उनके खिलाफ कार्रवाई भी नहीं हो पाएगी। इसलिए ऐसे स्टॉल लगाने वालों की मिठाईयों की पहले लैब से जांच होनी चाहिए, उसके बाद ही बिक्री की अनुमति मिलनी चाहिए। 

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