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गुरुवार, फ़रवरी 12, 2015

सरकार के खिलाफ आंदोलन की तैयारी में किसान! सरकार वादा भूल गई

डबवाली। हरियाणा में मनोहर लाल खट्टर सरकार के करीब साढे तीन माह ठीक-ठाक बीतने के बाद अब सरकार की मुश्किलें मार्च माह में बढऩे वाली है। अपने कामों की डिलीवरी ना होने के कारण प्रदेश का किसान अब सरकार के खिलाफ लामबंद होने लगा है। स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने के बहाने किसान सरकार के खिलाफ एक बड़े आंदोलन की रणनीति बना रहा है। इस प्रकार के आंदोलन पहले भी सरकारों के लिए मुश्किलें पैदा कर चुके हैं। सरकार के खिलाफ अंदरखाने बनाई जा रही रणनीति में आंदोलन का मुख्य केन्द्र बिंदू जींद को बनाए जाने की संभावना है। इससे पूर्व भी किसान आंदलनों का केन्द्र बिन्दू जींद रहा है। इस आंदोलन का मुख्य कारण प्रदेश में करीब १८ साल बाद गैर जाट सीएम का आना भी माना जा रहा है। क्योंकि अधिकत्तर किसान एक जाति विशेष से है और इन किसानों को लग रहा है कि जाति विशेष का ही सीएम उनका ज्यादा हितैषी है। इसे सरकार की अनुभवहीनता कहे या सरकार कमजोर तंत्र जो कि इस आंदोलन की धार कुंद करने को कोई कदम नहीं उठा रहे हैं। हरियाणा सरकार को सत्ता में आए करीब साढे तीन माह हो गए है। असेंबली चुनाव से पहले भाजपा ने स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने की घोषणा की थी। किसानों ने इस मांग को लेकर चुनाव में कांग्रेस का विरोध तक करने की धमकी दी थी। चुनाव में इस बात का सीधा-सीधा फायदा भाजपा को हुआ और भाजपा सत्ता के शिखर पर पहुंच गई। अब प्रदेश में भाजपा को सत्ता में आए करीब साढे तीन माह हो जाने के बाद किसानों को स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू न करने की बात अखरने लगी है। किसान इस मुद्दे को लेकर १५ मार्च को भिवानी जिले में एक महापंचायत का आयोजन कर रहे हैं। किसानों ने इस दिन सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई लडऩे के उेलान की घोषणा करने का निर्णय ले रखा है। प्रदेश की कई खाप-पंचायत व अलग-अलग किसान संगठन इस महापंचायत का न्यौता देने के लिए हर रोज अलग-अलग गांवों में दस्तक दे रही है। इस महापंचायत में भीड़ इकट्ठी हो, इसके लिए ये लोग प्रचार में जुटे हैं। प्रदेश में अलग-अलग समय में कई किसान आंदोलन हुए हैं और उनमें अधिकत्तर का केन्द्र बिंदू जींद ही रहा है। बिजली बिल न भरने को लेकर बीकेयू (भारतीय किसान यूनियन) का किसान आंदोलन हो या मिर्चपुर कांड हो इन दो बड़े आंदोलनों को जींद जिले ने ही झेला है। १५ मार्च को भिवानी जिले में बुलाई गई इस महापंचायत का केन्द्र बिंदू भी जींद हो सकता है। जींद में जब भी किसानों ने आंदोलन किए है उनको जबरदस्त कामयाबी मिली है और वे आंदोलन सत्ता बदलने के गवाह बने हैं। प्रदेश में बंसी लाल की सरकार रही हो, चौटाला सरकार या फिर हुड्डा सरकार रही हो, सबको किसानों के विरोध ने ही सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाया है। मात्र साढे तीन माह बीतने के बाद हरियाणा सरकार द्वारा स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू न करने को लेकर किसानों के विरोध का सामना करना पड़ सकता है।

                                               (सरकार वादा भूल गई)

खाप-पंचायतें हो या फिर बीकेयू (भारतीय किसान यूनियन) या फिर अन्य कोई किसान संगठन सब इस महापंचायत की कामयाबी के लिए काम कर रहे हैं। इस महापंचायत में लाखों की संख्या में किसानों के पहुंचने की संभावना है और उस दिन निर्णयक लड़ाई का ऐलान हो सकता है। किसानों का कहना है कि भाजपा सरकार में सबसे ज्यादा किसान ही दुखी है। खाद को लेकर किसानों की महिलाएं तक पूरा-पूरा दिन लाइनों में लगी रही। किसानों को खाद के बदले पुलिस की लाठियां मिलीं। चुनाव से पहले तो भाजपा स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने के लिए धरने-प्रदर्शन करती थी और सत्ता में आने पर इसे लागू करने को कहती थी मगर सत्ता में आते ही भाजपा अपना वायदा भूल गई।

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