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रविवार, मार्च 15, 2015

पूर्व आईएएस अधिकारी, सरपंच की मिलीभगत से हुआ करोड़ों का घपला

जांच के लिए हाईकोर्ट में दायर करेंगे जनहित याचिका


डबवाली।
पंचायती रिकॉर्ड जलाने के आरोप में दोषी पाए जाने के बाद चुनाव लड़ने पर छह साल का प्रतिबंध झेल रहे उत्तर भारत की सर्वश्रेष्ठ पंचायत कालूआना के सरपंच की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। मामले को उजागर करने वाला आरटीआई कार्यकर्ता हाईकोर्ट में जनहित याचिका (पीआईएल) लगाने की तैयारी में है। कार्यकर्ता का कहना है कि प्रशासन ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। हाईकोर्ट में मामले की तारीख को नजदीक आता देख प्रशासन ने सरपंच को बर्खास्त किया है। गांव में विकास कार्यों के नाम पर करोड़ों का घपला हुआ है। एक पूर्व आईएएस अधिकारी समेत पंचायत विभाग के कई आला अधिकारी इसमें संलिप्त हैं। इधर, एडीसी ने सरपंच पर पुलिस कार्रवाई करने के संकेत दिए हैं।
एडीसी शरणदीप कौर बराड़ की रिपोर्ट के बाद उपायुक्त निखिल गजराज ने नौ मार्च 2015 को जगदेव सहारण को बर्खास्त करते हुए हरियाणा पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा 51 (4) के तहत आगामी छह वर्ष के लिए उनके चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया था। इससे बड़ा सवाल उभरकर सामने आ खड़ा हुआ है कि वर्ष 2005 से 2011 तक के पंचायती रिकॉर्ड को क्यों जलाया गया? मामले को उजागर करके वाले आरटीआई कार्यकर्ता विजेंद्र कुमार का कहना है कि उपरोक्त अवधि के दौरान एक आईएएस अधिकारी की छत्रछाया में सरपंच ने गांव में विकास करवाने के नाम पर खूब घपले किए थे।
इन घपलों को सामने लाने के लिए उन्होंने भरसक प्रयास किए। जब प्रशासन ने उनकी बात नहीं सुनी तो आरटीआई का सहारा लिया। आरटीआई के तहत रिकॉर्ड मिलता, इससे पहले ही दुर्घटना का नाम देकर रिकॉर्ड जला दिया गया। चूंकि रिकॉर्ड के अनुसार सरपंच तथा आईएएस अधिकारी फंसते थे। प्रशासन से न्याय न मिलने पर उन्होंने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट के एक आदेश के बाद प्रशासन ने आनन-फानन में सरपंच को निलंबित कर दिया। नियमित जांच के आदेशों के बावजूद प्रशासन ने करीब आठ माह तक मामला लटकाए रखा। अब हाईकोर्ट में तारीख से तीन-चार दिन पहले ही उपायुक्त ने सरपंच को बर्खास्त कर प्रतिबंध लगाने का फैसला दे दिया।
हाईकोर्ट में पीआईएल लगाएंगे
आरटीआई कार्यकर्ता के अनुसार हाईकोर्ट के डर से दिए गए प्रशासनिक फैसले में बहुत कमियां हैं। रिकॉर्ड घपलों पर पर्दा डालने के लिए जलाया गया था। घपलों की जांच के आदेश अभी तक प्रशासन ने नहीं दिए हैं। चूंकि मामले की स्वतंत्र जांच होने पर कई बड़े प्रशासनिक अधिकारी फंसेंगे, जिसमें एक आईएएस अधिकारी भी शामिल है। विजेंद्र के अनुसार विकास कार्यों के नाम पर 15 करोड़ रुपये से अधिक का घपला हुआ है। घपलों की जांच करवाने के लिए वे हाईकोर्ट में पीआईएल लगाने जा रहे हैं।
मामला उजागर करने वाला आरटीआई कार्यकर्ता बोला, प्रशासन से उम्मीद नहीं हाईकोर्ट के डर से सुनाया फैसला
तथ्यों पर आधारित किसी भी जांच के लिए मैं तैयार: जगदेव सहारण
अगर वर्ष 2005 से 2011 तक की बात की जाए तो करीब साढ़े पांच करोड़ रुपये गांव के विकास पर खर्च किए गए हैं। अब तक करीब 10 करोड़ रुपये खर्च कर दिए होंगे। सबसे अधिक पैसा मनरेगा के तहत लैंड लेवलिंग, खालों के निर्माण तथा हरियाली पर खर्च किया गया है। उपायुक्त ने एक मामले में उसे 99 हजार रुपये गबन का दोषी साबित किया है। पैसे भरने के आदेश दिए हैं। मैं हरगिज पैसा नहीं भरूंगा। चूंकि पंचायती कार्य के बदले अगर इस तरह से पैसा भरने लगा तो मुझे करोड़ों रुपये जमा करने पड़ेंगे। उस समय मैंने काम करवाया था। खाल में उस समय पानी गया था। अब शिकायतकर्ता कहें कि पानी नहीं जा रहा, उसमें मेरी गलती नहीं। आरोप बेबुनियाद हैं। मैं तथ्यों पर आधारित किसी भी जांच के लिए तैयार हूं।
-जगदेव सहारण, सरपंच, गांव कालूआना
पंचायती रिकॉर्ड जलाने के आरोप में सरपंच जगदेव सहारण दोषी पाए गए हैं। पंचायती रिकॉर्ड जलाया गया है, इसके पीछे कोई न कोई कारण रहा होगा। क्या कारण रहा, इसकी जांच का कार्य पुलिस का है। मैंने अपनी रिपोर्ट उपायुक्त को दी है। पुलिस जांच के लिए उपायुक्त को फैसला लेना है।
-शरणदीप कौर बराड़, एडीसी, सिरसा   

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