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बुधवार, मार्च 18, 2015

बस अड्डे पर कर्मियों का कब्जा


 
विरोध| ज्वांइट एक्सन कमेटी के आह्वान पर निजी बसें चलाए जाने का प्रदेशव्यापी विरोध 
परमीट रद्द करने की मांग 
 डबवाली
उपमंडलमें मंगलवार को रोडवेज की हड़ताल के चलते बस स्टैंड पर कर्मचारियों को कब्जा रहा और किसी बस को स्टैंड में आने जाने नहीं दिया गया है। इस मौके का रोड पर निजी बस ऑपरेटरों ने लाभ उठाया और बिना परमिट की बसों को रूट पर चलाकर यात्रियों को बिना टिकट दिए मनमर्जी से किराया लेकर यात्रा कराई।
बस स्टैंड पर सुबह से यात्रियाें का रोजमर्रा की तरह पहुंचना शुरू हो गया और दिन निकलने तक दिल्ली, हरिद्वार, चंडीगढ़ हनुमानगढ़ काे जाने वाली रोडवेज बसें निकली। इसके बाद करीब पौने 7 बजे सिरसा की ओर जाने वाले रोडवेज बसों को ले जाने से कर्मचारियों ने रोक दिया। इसी बीच निजी बसों के रूट परमिट को बदलकर सीधे रूटाें पर टाइम देते हुए निजी बसें चलाए जाने किे प्रदेशव्यापी विरोध की सूचना मिलने पर रोडवेज चालक परिचालक सहित सभी कर्मचारी हड़ताल पर चले गए।
इसी बीच बस स्टैंड से दिल्ली के लिए सुबह पौने 5 बजे चली रोडवेज को हिसार में कर्मियों ने रोक लिया जबकि हरिद्वार के लिए सुबह 6 बजकर 20 मिनट पर निकली रोडवेज को सिरसा में रोक लिया गया। इसके बाद दिल्ली से मध्यरात्रि को चली बसें ही बस स्टैंड में पहुंची और बाद में उनहें भी कार्यशाला में रोककर कर्मचारी हड़ताल पर चले गए। इससे यात्रियों को अपने काम और गंतव्य तक पहुंचने में परेशानी का सामना करना पड़ा।
जिसका फायदा उठाते हुए निजी बस ऑपरेटरों ने सभी रूटों पर राजस्थान पंजाब से बुलाकर बिना परमिट की बसें चला दी। रोडवेज कर्मियों की हड़ताल के चलते इन बसों में बिना टिकट दिए ही यात्रियों से मनमर्जी का किराया वसूला गया। जिससे यात्रियों को परेशानी के साथ आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा।
यात्री रमेश कुमार, कुलवंत सिंह, सोहन लाल, विक्रम सिंह ने बताया कि रात्रि को दिल्ली जाने की तैयारी कर ली थी और सुबह तक कोई हड़ताल की सूचना नहीं होने से बस स्टैंड पर सुबह 7 बजे पहुंच गए लेकिन बस स्टैंड से कोई राेडवेज बस नहीं चल रही थी। जिससे पता चला कि हड़ताल हो गई है। इससे सीधे दिल्ली के लिए कोई वाहन की सुविधा भी उपलब्ध नहीं हुई। जिससे निजी वाहनों में निकलना पड़ रहा है। जबकि परेशानी के चलते अधिकतर यात्रियों ने अपनी यात्रा रदद करनी पड़ी।
^बस स्टैड के डीआई ने बताया कि कर्मचारियों के हड़ताल पर चले जाने से बसें बंद हो गई और रेाजाना जहां 14 हजार किलोमीटर बसें चलती हैं उसकी बजाय साढ़े 5 हजार किलोमीटर ही बसें चली है। कुछ बसों को सिरसा हिसार में रोक लिए जाने से दिक्कत हुई है। कर्मचारी नेताओं सरकार की मिटिंग चल रही है। जिसके अादेश मिलने पर आगामी कार्रवाई की जाएगी। निजी बसों की मनमर्जी रोकने के लिए आरटीए सहित उच्चाधिकारी औचक निरीक्षण कर जांच कर सकते हैं।।'' विजयकुमार, डीआई
कर्मचारी महासंघ के डीपो प्रधान रामकुमार चुर्णिया हेमंत, हरियाणा कर्मचारी संघ प्रधान मदन लाल, हरियाणा मंच के प्रधान चंद्रशेखर धमी अन्य ने बताया कि सरकार ने पुराने निजी 927 परमिट जो गांवों में से बसें चलानी है। प्रदेशभर में 112 परमिट अब सरकार ने शहर से शहर कर दिया है। इसको रदद कराए जाने की जाने की मांग को लेकर पिछले दिनों से विरोध चल रहा था। यूनियनों के कर्मियों ने ज्वाइंट एक्शन कमेटी के आहवान पर सुबह 6 बजे हड़ताल का निर्णय लिया था। अब चंडीगढ़ में कमेटी पदाधिकारियों की सरकार के साथ बात चल रही है। जिसमें निजीकरण निती और रूट परमिटों को रदद कर 10 हजार नई रोडवेज बसें चलाने की मांग रखी गई। इसके फैसले के बाद ही हड़ताल खोली जाएगी। 

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