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सोमवार, मार्च 23, 2015

शिक्षक गढ़ता है भगत सिंह की प्रतिमा

गरुड़ चालक चला रहे भगत सिंह के नाम का एकाउंट, जमा हैं लाखों रुपये  

डबवाली  शहीद भगतसिंह की शहादत के बाद आज भी उनकी याद ताजा है। उन्हीं की प्रेरणा से डबवाली के एक स्कूल की लाइब्रेरी में शहीद भगतसिंह की पूरी गाथा रखी गई है। वहीं गरुड़ (ई रिक्शा) ेचालकों ने एक समूह बनाकर बीमा पॉलिसी की तर्ज पर भगत सिंह के नाम पर एकाउंट खोल रखा है। मुसीबत पड़ने पर गरुड़ चालक इस एकाउंट का प्रयोग करते हैं।
विचारधारा का नाम है भगतसिंह- यशपाल सिंह
गांव सांवतखेड़ा के कला अध्यापक यशपाल सिंह को भगत सिंह की प्रतिमाएं बनाने का अनोखा शौक है। स्कूलों में शहीद ए आजम की मूर्ति बनाने पर ये कला अध्यापक एक पाई भी नहीं लेते। प्रदेश के एकमात्र कला अध्यापक हैं जो फाइबर से खुद स्टेच्यू तैयार करते हैं। उनके द्वारा बनाया गया शहीद ए आज़म भगत सिंह का स्टेच्यू राजकीय मिडिल स्कूल सांवतखेड़ा में प्रेरणा स्रोत बना हुआ है। वहीं खंड डबवाली के सबसे बड़े राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में एक फरवरी 2015 को भगत सिंह के स्टेच्यू का अनावरण हुआ है। इस स्टेच्यू को यशपाल सिंह ने तैयार किया है। 22 मार्च 2015 को कालांवाली इलाके के गांव धर्मपुरा में भी भगत सिंह के स्टेच्यू का अनावरण हुआ। यशपाल सिंह का कहना है कि भगत सिंह एक विचारधारा हैं। जिसे कभी खत्म नहीं किया जा सकता। मैं भगत सिंह का फैन हूं, उनका स्टेच्यू बना पाता हूं, यह मेरे लिए गर्व की बात है। मेरा मानना है कि सरकार को भगत की जीवनी अपने पाठ्यक्रम में शामिल करनी चाहिए। साथ में भगत सिंह की प्रतिमा प्रत्येक स्कूल में लगे।
इस स्कूल में बच्चे पढ़ते हैं भगत सिंह
स्वतंत्रता संग्राम के समय अंग्रेजों को देखकर गौ बेक के नारे लगाने वाले डबवाली के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में भगत सिंह की जीवन गाथा बच्चे बड़े चाव से पढ़ते हैं। प्रिंसिंपल सुरजीत सिंह मान ने बिना किसी सरकारी सहायता के बच्चों को शहीद ए आजम भगत सिंह की पाठन सामग्री उपलब्ध करवाई है। लाइब्रेरी में भगत सिंह की जीवन गाथा पर 25 पुस्तकें उपलब्ध हैं। प्रिंसिंपल के अनुसार विद्यालय के बच्चों में भगत सिंह को पढ़ने की रुचि है। भगत सिंह कौन थे? वे कैसे क्रांतिकारी बने? यह सवाल अक्सर बच्चे उनसे करते हैं। बच्चों की जिज्ञासा शांत करने के लिए उन्होंने उपरोक्त पुस्तकों को लाइब्रेरी में रखा है।
गरुड़ चालक चला रहे भगत सिंह के नाम का एकाउंट, जमा हैं लाखों रुपये
अकाउंट में जमा कराए छह लाख रुपए

शहर में गरूड़ (ऑटो रिक्शा) चलाकर अपना जीवन यापन करने वाले लोगों का दिल भगत सिंह के नाम के सहारे धड़कता है। जून-जुलाई 2014 में जिला प्रशासन ने शहर के ऐसे चालीस लोगों को गरूड़ वाहन उपलब्ध करवाए थे, जिनके पास जीविका का कोई साधन नहीं था। इनमें रिक्शा पर सवारियां खींचकर थक हार चुके लोग भी शामिल थे। चालकों ने अपने परिवार तथा गरुड़ की देखभाल के बीमा की तर्ज पर जुलाई 2014 में डबवाली के एक बैंक में एकाऊंट ओपन करवाया। तत्कालीन उपमंडलाधीश सतीश कुमार के दिशा-निर्देश में एकाउंट का नाम शहीद भगत सिंह रखा। प्रत्येक चालक ने करीब पंद्रह हजार रुपए की राशि एकाउंट में जमा करवाई है। इस राशि से मिलने वाली ब्याज की रकम से गरूड़ चालक वाहन खराब होने की स्थिति में पैसे निकलवा सकते हैं। एकाऊंट में करीब छह लाख रुपये से ज्यादा की राशि जमा है। 

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