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गुरुवार, मार्च 12, 2015

‘दलहन फसलों की बिजाई का लक्ष्य चूका’


डबवाली । दलहन फसलों के प्रति किसानों को जागरूक करने के लिए चलाए जा रहे राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन की रफ्तार धीमी हो गई है। अब की बार दलहन फसलों का रकबा कम हो गया है। इससे सबक न लेते हुए कृषि विभाग ने उपमंडल डबवाली में मूंग के महज पचास प्लांट वितरित करने के लिए भेजे हैं। पिछले वर्ष 250 एकड़ में प्लाट लगाए गए थे।
लक्ष्य पूरा होने पर नहीं चेता विभाग: कृषि विभाग ने दलहन फसलों की बिजाई एक हजार हेक्टेयर में करने का लक्ष्य रखा था। जो कि 650 हेक्टेयर में सिमट गया। चूंकि हर वर्ष कृषि विभाग लक्ष्य को पूरा करने के लिए दलहन फसलों के प्लांट किसानों में वितरित करता था। साथ में किसानों को मुफ्त में दवाइयां तक मुहैया करवाई जाती थी। इस बार कृषि विभाग ने दलहन फसलों के प्लांट किसानों में नहीं बांटे हैं। लक्ष्य कम रहने के बावजूद कृषि विभाग चेता नहीं है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत उपमंडल डबवाली को मूंग के महज 50  प्लांट मिले हैं। जिसमें खंड डबवाली को 30 तथा खंड औढ़ां को 20 प्लांट मिले हैं। जबकि दोनों खंडों में 90 गांव के किसान आते हैं।
दो माह की फसल
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार मूंग 60 दिनों की फसल है। इसे धान रोपित एरिया में लगाया जा सकता है। यही नहीं मूंग दाल मिलने के बाद किसान इसकी पत्तियों को खाद के रूप में प्रयोग कर सकता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि मूंग दाल की पत्तियों को हरी खाद के रूप में प्रयोग करने से उर्वरा शक्ति बढ़ती है।
मूंग दाल के प्लांट कम आने से मुश्किलें बढ़ी
90 गांवों के किसानों के लिए आए महज 50 प्लांट
गांव खारिया में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के कृषि वैज्ञानिक जौ की फसल का खेतों में जकर निरिक्षण कर जानकारी देते हुए।
गांव खारिया में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के कृषि वैज्ञानिक जौ की फसल का निरिक्षण करते व फसल के बारे जानकारी देते हुए ।
एडीओ की सहमति से दिए जाएंगे प्लांट
समर मूंग को साठी धान में लगाया जाता है। इससे धान को अधिक पानी की जरूरत नहीं पड़ती। किसानों को दलहन फसलों के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ प्राकृतिक रिसोर्स बच जाता है। इस बार पिछले वर्ष की अपेक्षा कम प्लांट आए हैं। लेकिन ये डेमो के लिए ही आते हैं। ताकि किसान इससे प्रेरित होकर दलहन की खेती कर सकें। एडीओ की सहमति से ही प्लांट दिए जाएंगे।
-सतवीर सिंह, कार्यकारी उपमंडल कृषि अधिकारी, डबवाली

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