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रविवार, मार्च 15, 2015

मिलीभगत से बाजार पहुंचा सरकारी गेहूं, पकड़ा


डबवाली। एफसीआई अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी गेहूं चोरी होकर बाजार में पहुंच रहा है। शुक्रवार रात को खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के एक निरीक्षक ने इसका खुलासा किया। निरीक्षक की शिकायत पर रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) मामले की जांच कर रहा है। सरकारी गेहूं बाजार में पहुंचने का यह पहला मामला नहीं है।
देर शाम को एमपी कॉलेज के नजदीक एक ट्रक पहुंचा। ट्रक में एफसीआई की गेहूं के बैग भरे हुए थे। गेहूं गली में स्थित एक कमरे में उतरने लगे। इसकी जानकारी एसडीएम डबवाली सुरेश कस्वां को मिली। उन्होंने खाद्य एवं आपूर्ति अधिकारी अरविंद पूनियां को मौका पर भेजा। पूनियां के पहुंचते ही चालक ट्रक को ले भागा। मौके पर पहुंचे गोल बाजार पुलिस के एएसआई आत्मा राम तथा एएसआई राजेंद्र कुमार ने एक कमरे में रखे गेहूं के सात बैग तथा बारदाना को कब्जे में कर लिया। मामला रेलवे सीमा में होने के कारण पुलिस ने केस आरपीएफ को सौंप दिया। निरीक्षक अरविंद पूनियां ने बताया कि फरार हुए ट्रक में गेहूं भरा हुआ था।
मौके पर मिला गेहूं एफसीआई की है। शुक्रवार को स्पेशल लगी हुई थी। अधिकारियों की मिलीभगत से गेहूं कमरे तक पहुंचा। एसडीएम सुरेश कस्वां उपरोक्त मामले को स्वयं देख रहे हैं। उन्होंने पूरी जानकारी लेने के बाद संलिप्त एफसीआई अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज करवाने के आदेश दिए हैं। इसके बाद जांच अधिकारी अरविंद पूनियां ने आरपीएफ में शिकायत दर्ज करवाई है।
आरटीआई में मिले तथ्य
डबवाली में छापामारी के दौरान बोरियां उतरावते पुलिसकर्मी।
इधर, आरटीआई में रिकॉर्ड की बात की जाए तो वर्ष 2008 से 2012 तक लगी स्पेशल में काफी अंतर है। अकेले फरवरी 2011 में सोलह स्पेशल में 1108 क्विंटल गेहूं की शॉर्टेज मिली है। एफसीआई डबवाली डिपो के मैनेजर ने आरटीआई के जवाब में लिखा है कि इन स्पेशल को दुरई, नागपुर, साबरमती, वीरतेज, कंकरिया, पाली मारवाड़, नागौर, आनंद, सूरत, नड़ियाड, बहरूच आदि स्थानों पर भेजा गया था। इससे सवाल खड़ा होता है कि अगर वर्ष 2011 के एक माह में लगी स्पेशल में इतना अंतर आ रहा है, तो अब तक लगी स्पेशल में कितना अंतर आया होगा। सबसे खास बात यह है कि स्पेशल के दौरान जितने बैग डबवाली से रेल बोगियों में भरे गए हैं, उतने ही उपरोक्त जगहों पर पहुंचे हैं। इसके बावजूद गेहूं कम हो गया। चूंकि स्पेशल के दौरान लूज ग्रेन को पुन: बोगियों में भरा नहीं जाता। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के निरीक्षक अरविंद पूनियां ने नियमों का हवाला देते हुए बताया कि लूज ग्रेन को बोगियों में भरा जाना जरूरी होता है। लेकिन एफसीआई अधिकारी या कर्मचारी ऐसा नहीं करते। मिलीभगत से सरकारी गेहूं को मार्केट में बेच दिया जाता है, जिसका नुकसान सरकार और व्यापारी को झेलना पड़ता है।
आरटीआई में खुल चुकी है पोल, लूज ग्रेन को नहीं भरा जाता बोगियों में
वर्ष 2005 से 2012 तक स्पेशल के चौंकाने वाले आंकड़े
अरविंद पूनियां की शिकायत पर मामले की गहनता से जांच की जा रही है। किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा।
-रमेश कुमार, प्रभारी, आरपीएफ डबवाली
छापामारी के दौरान बरामद गेहूं।

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