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सोमवार, मार्च 23, 2015

खट्टर सरकार होश में आओ, होश में आओ..

स्वतंत्रता सेनानी पार्क में जुटे खंड डबवाली के पात्र अध्यापक, बोले

डबवाली। खट्टर सरकार होश में आओ, होश में आओ...। ज्वाइनिंग पाने के लिए ये नारे रविवार को नव चयनितों ने डबवाली के स्वतंत्रता सेनानी पार्क में लगाए। पात्र अध्यापक को संबोधित करते हुए जिला सिरसा के अध्यक्ष सुरेंद्र बैनीवाल ने कहा कि 29 मार्च को मुख्यमंत्री के गृह जिला करनाल में पात्र अध्यापक महा न्याय पंचायत करने जा रहे हैं।
जिला अध्यक्ष ने बताया कि 14 अगस्त 2014 को जेबीटी भर्ती का परिणाम घोषित होने पर 9870 युवाओं को नौकरी मिलने की आंस बंधी थी। ज्वाइनिंग से पूर्व उपरोक्त युवा सभी औपचारिकताओं से गुजर चुके हैं। देर है तो सिर्फ नियुक्ति की। समीक्षा करने की बात कहकर प्रदेश सरकार नियुक्ति करने में आनाकानी कर रही है। पिछले आठ माह से नियुक्ति के लिए दौड़ धूप करके पात्र अध्यापक थक चुके हैं। अबकी बार अध्यापकों ने सरकार से सीधी टक्कर लेने की ठानी है। इसी के तहत 29 मार्च को करनाल में महा न्याय पंचायत बुलाई गई है। जिसे किसान मोर्चा, मजूदर संगठनों, हरियाणा के अध्यापक संघों के साथ-साथ खाप पंचायतों ने भी अपना समर्थन दिया है। जिला अध्यक्ष के अनुसार 9870 पात्र अध्यापकों में जिला सिरसा के 330 युवा शामिल हैं।
इस मौके पर पात्र अध्यापक संघ की डबवाली इकाई के अध्यक्ष रविंद्र मांडी, नाथूसरी चौपटा के ब्लाक अध्यक्ष जगसीर सिंह, जगपाल सिंह, कपिल गंगा, बलजीत सिंह, विजय सहारण, कालू राम, तारा चंद उपस्थित थे।
बेटी के साथ संघर्ष करूंगा
मैं खेतीबाड़ी करता हूं। मेरी बेटी मनपिंद्र जेबीटी पास है। अगस्त 2014 में आए परिणाम के आधार पर मनपिंद्र को नौकरी मिलनी तय थी। मैं अपनी बेटी के साथ चलकर नौकरी के लिए सारी औपचारिकताएं पूरी करवाई। उसकी बेटी के कई बार अंगूठा निशान लिए गए। वेरिफिकेशन पूरी होने के बावजूद आज तक ज्वाईनिंग लेटर नहीं मिला है। 22 जनवरी 2015 में सरकार ने बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान की शुरूआत की। उस समय सपना सार्थक होता लगा। अब सरकार ही नौकरी में बाधा बन गई है। सरकार अन्याय कर रही है। बेटी के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं करेंगे।

करनाल जाकर सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद करूंगी
मेरी बेटी नेहा मिढ़ा ने मेहनत से जेबीटी की। बाद में परीक्षा पास की। अच्छा रिजल्ट आया। नौकरी के लिए अप्लाई किया। नौकरी मिलनी तय हो गई। अब सरकार ज्वाइनिंग लेटर इश्यू नहीं कर रही। बेटी बचाने की बातें करनी वाली सरकार ने मेरी बेटी का भविष्य दांव पर लगा दिया है। नौकरी के लिए संघर्ष में मैं अपनी बेटी के साथ खड़ी हूं। करनाल की पंचायत में अपनी बेटी के साथ भाग लेने जाऊंगी।

जब बेटी को नौकरी नहीं, फिर बेटी के नाम सिर्फ अभियान क्यों

डबवाली। सीएम मनोहर लाल खट्टर का बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान पर विरोध के स्वर गूंजने लगे हैं। लोगों का कहना है कि अगर सरकार बेटियों के प्रति इतनी ही संजीदा है तो वर्ष 2014 में घोषित हुए परिणाम के अनुसार उनकी बेटियों के नियुक्ति पत्र जारी करे। बेटी को नौकरी दिलाने के लिए उनके साथ संघर्ष में शामिल हुए परिजनों ने भी खट्टर सरकार के खिलाफ अभियान छेड़ दिया है। परिजनों का कहना है कि पात्र अध्यापकों की करनाल में होने वाली न्याय पंचायत में वे बढ़चढ़कर हिस्सा लेंगे। 

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