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मंगलवार, मार्च 17, 2015

खेतों में नुकसान, शहर में बदहाली

पूरी रात तेज हवा के साथ बारिश, गेहूं, सरसों की फसल को भारी नुकसान


डबवाली- रात भर हुई बरसात से जहां गेहूं, सरसों की फसल को भारी नुकसान पहुंचा, वहीं शहर में जगह-जगह जलभराव हो गया। पानी निकालने के लिए मंडी किलियांवाली में बने पुराने डिस्पोजल के पास भूमि छोटी पड़ गई। पब्लिक क्लब क्षेत्र में स्थित नगर परिषद कार्यालय, लोक संपर्क कार्यालय, प्राथमिक पाठशाला नंबर-1 गंदे पानी में जलमगभन हो गए। सोमवार सुबह बच्चे पानी के बीच में से होकर परीक्षा देने पाठशाला पहुंचे।
तेज हवा के साथ हुई बारिश
रविवार शाम को शुरू हुई हल्की बूंदाबांदी देर रात तक मूसलाधार बारिश में बदल गई। तेज हवा के झोकों के साथ हुई बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। शहर में बिजली गुल हो गई। सब्जी मंडी, गोल बाजार, गांधी चौक, कालोनी रोड, न्यू बस स्टेंड रोड़, गोल चौक के नजदीक जलभराव हो गया। मंडी किलियांवाली में रात भर पुराना डिस्पोजल चालू रहा। पानी निकालने के लिए भूमि कम पड़ गई।
पुराने डिस्पोजल के पानी को चौटाला रोड़ पर बने नए डिस्पोजल पर शिफ्ट किया जाता। इससे पहले ही सीवरेज बहने लगे। डिस्पोजल के निकट पब्लिक क्लब क्षेत्र गंदे पानी में डूब गया। नगर परिषद कार्यालय की दीवार के साथ परिषद द्वारा लगाया गया बोरवेल एक बार फिर सफेद हाथी साबित हुआ। शहर की अन्य जगहों पर बोरवेल लगाने की तैयारी में परिषद पिछले एक वर्ष की अवधि से उपरोक्त बोरवेल पर ट्रायल कर रही है। हर बार ट्रायल बेकार साबित हुआ है।
लटका है एसटीपी
पुराने डिस्पोजल पर निकासी के लिए जगह कम होने के कारण पिछले दिनों जनस्वास्थ्य विभाग ने डिस्पोजल के निकट करीब चार एकड़ भूमि तीन माह के लिए किराए पर ली है। इस अवधि के दौरान विभाग किसानों को एक लाख अस्सी हजार रुपये अदा करेगा। बरसाती पानी निकालने के लिए विभाग ने उपरोक्त जमीन पर गड्ढे खोदे हैं। मूसलाधार बरसात की वजह से जमीन कम रह गई। हालांकि कस्बा डबवाली को सीवरेज की समस्या से निजात दिलाने के लिए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट प्रस्तावित है। चौटाला रोड पर गांव शेरगढ़ के नजदीक इसका निर्माण करवाया जाना है। यह प्रोजेक्ट पिछले दो वर्षों से अधर में लटका हुआ है।

अंधाधुंध दवा का छिड़काव न करें
तेला और चेपा के लिए किसान अंधाधुंध दवाओं का छिड़काव न करें, इससे ‘वीटल’ नामक मित्र कीट जो कि तेले को खाता है समाप्त हो सकता है। किसान इसके लिए निमीसीडीज 400 एमएल प्रति एकड़ दवा को डेढ़ सौ लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। इसके अलावा सरसों में जो रोग है वो अल्ट्रनेरिया ब्लाइट रोग है जो कि मुख्यत: ज्यादा नमी व बढ़े तापमान के कारण होता है, हम किसान को सरसों में एक ही पानी लगाने की सिफारिश करते हैं लेकिन किसान दो से तीन तक पानी लगाते हैं जो कि अल्ट्रनेरिया ब्लाइट का सबब बनता है। इसके लिए किसान डाइथेन एम 45 या मेनकोजैक दवा का छिड़काव 400 ग्राम प्रति एकड़ 150 लीटर पानी में मिलाकर 10 दिन के अंतराल पर करें।
कृष्ण कुमार जांगड़ा, कृषि अधिकारी ओढ़ां
मौसम की मार से किसान चिंतित
यूरिया से जले थे बारिश ने छिड़का नमक
ओढां। कभी फसल को बचाने के लिए यूरिया के लिए मारा मारी करते रहे किसानों की फसलें जैसे ही पक कर तैयार हो रही थी तो मौसम दुश्मन बन गया। पिछले करीब एक पखवाड़े से बदलते मौसम के मिजाज ने धरतीपुत्रों के सामने गुजर बसर की भारी चिंता खड़ी कर दी है।
बेमौसमी बरसात से पकने के कगार पर खड़ी गेहूं व सरसों की फसल अचानक धराशायी हो गई है। आसमान पर उमड़ते काले बादलों की गड़गड़ाहट किसानों की धड़कनों को तेज कर रही है। भयग्रस्त धरतीपुत्र इस समय इंद्रदेव से अच्छे मौसम की फरियाद कर रहे हैं ताकि वे सुरक्षित ढंग से फसल समेट सकें। किसानों के अनुसार इस बार नरमे की फसल पर अंतिम समय में उखेड़ा रोग ने फसल बरबाद कर दी।
इसके अलावा गेहूं में समय पर यूरिया खाद नहीं मिला। जैसे तैसे देर सवेर मिला तो अब मौसम पकी फसल को बरबाद कर रहा है। वहीं मौसम में तबदीली के कारण गेहूं पर तेले व चेपे रसायनों का छिड़काव न कर प्रकृति के मित्र कीटों को उपयोगी बना सकते हैं।
गांव नुहियांवाली के जागरूक किसान आसाराम नेहरा, ओढ़ां के मदन लाल, कौर सिंह कुंडर, रूपेंद्र कुंडर, जंडवाला के गुरमीत सिंह माकड़, घुकांवाली के राजीव सिहाग आदि ने बताया कि पिछले करीब एक सप्ताह पूर्व बरसात के साथ चली तेज हवा के कारण उनके खेतों में काफी गेहूं की फसल बिछ गई थी जिस कारण खेतों में उत्पादन पर 25 से 30 प्रतिशत विपरीत असर पड़ेगा, साथ ही इस समय सरसों की फसल में भी उखेड़ा रोग का प्रकोप देखा जा रहा है जिस कारण उनकी परेशानी और भी बढ़ गई है। अगर मौसम की मेहरबानी न रही तो लागत की भरपाई भी मुश्किल हो जाएगी।
कम पड़ गई है जमीन
पब्लिक क्लब क्षेत्र शहर से करीब चार फुट नीचा है। रात को बरसाती पानी निकालने के लिए जमीन कम पड़ गई। डिस्पोजल के निकट स्थित होने के कारण पानी क्षेत्र में भर गया। पुराने डिस्पोजल के पानी को नए डिस्पोजल की भूमि में शिफ्ट कर दिया गया है। एसटीपी के टैंडर 31 मार्च को होने हैं। एसटीपी के निर्माण से डबवाली सीवरेज समस्या से मुक्त हो जाएगा।
-सतपाल रोज़, कनिष्ठ अभियंता, जनस्वास्थ्य विभाग, डबवाली
कार्यालय के नजदीक ट्रायल के तौर पर बोरवेल बनवाया गया था, जो आज तक नहीं चला है। निर्माण करने वाले ठेकेदार की पेमेंट रोक ली गई है। बोरवेल 200 फुट गहरा बना हुआ है। इसे अब 400 फुट गहरा किया जाएगा।

-जयवीर डुडी, एमई, नगर परिषद, डबवाली
डबवाली में नगर परिषद कार्यालय के नजदीक बने डिस्पोजल के गंदे पानी में डूबा नगर परिषद कार्यालय व कार्यालय के सामने से गुजरते वाहन ।

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