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मंगलवार, मार्च 17, 2015

एकमात्र पूर्ण साक्षर गांव चकजालू की इनामी राशि लैप्स

डबवाली। जिस गांव में कोई अंगूठा टेक नहीं। 80 वर्षीय बुजुर्ग भी तीन भाषाओं का ज्ञान रखते हैं। प्रदेश का एकमात्र पूर्ण साक्षर गांव चकजालू पांच लाख रुपये की इनामी राशि लेने के लिए पिछले एक साल से संघर्ष कर रहा है। साक्षर भारत मिशन में जुटे अधिकारी अब बता रहे हैं कि गांव को मिलने वाली इनामी राशि लैप्स हो गई है। इसके लिए अधिकारी पंचायत को ही जिम्मेवार ठहरा रहे हैं। इस बीच सपनों से गांव की पंचायत तथा अभियान का हिस्सा बने बुजुर्ग खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। पंचायत ने इनामी राशि को गांव में बने स्कूल तथा बुजुर्गों पर खर्च करना था।
जुलाई 2012 में खंड डबवाली की सभी 48 गांवों में सर्वे कर निरक्षरों की पहचान की गई। खंड में 35 हजार निरक्षर मिले। 15 या इससे अधिक आयु वर्ग के ये वे लोग थे, जो अपना नाम तक नहीं लिखना जानते थे। न ही कुछ पढ़ सकते थे। गांव चकजालू में 111 निरक्षर सामने आए थे। गांव चकजालू में टेस्ट पास करने के बाद अमरजीत बतौर प्रेरक नियुक्त हुए। उसने 15 से 80 वर्ष की उम्र तक के अंगूठा टेक को हिंदी, अंग्रेजी तथा पंजाबी का ज्ञान दिया। प्रेरक ने 21 निरक्षरों को साक्षर कर परीक्षा दिलाई। दूसरी बार 90 निरक्षरों को प्रशिक्षण देकर परीक्षा में बैठाया। सभी 111 ने परीक्षा पास कर साक्षर होने का प्रमाण दिया। प्रेरक ने पूर्ण साक्षरता का प्रस्ताव ब्लॉक कोर्डिनेटर के समक्ष रखा। तत्कालीन एडीसी शिवप्रसाद शर्मा ने प्रस्ताव की जांच के लिए तत्कालीन उपमंडलाधीश सतीश कुमार सैनी को नियुक्त किया। सैनी ने एक टीम गठित कर स्वयं नव साक्षरों का इम्तिहान लिया। इम्तिहान में सभी पास हुए।
वर्ष 2014 में गांव चकजालू प्रदेश का पहला पूर्ण साक्षर गांव बना। एडीसी ने गांव के विकास के लिए पांच लाख रुपये देने पर सहमति जता दी।
लैप्स हो गई है राशि
गांव चकजालू पूर्ण साक्षर गांव हैं। हरियाणा का पहला पूर्ण साक्षर गांव बनने के बाद तत्कालीन एडीसी ने गांव के विकास के लिए पांच लाख रुपये देने की बात कही थी। एडीसी की घोषणा के अनुरूप पांच लाख रुपये अलग से रखे गए थे। पंचायत की ओर से विकास का कोई प्लान नहीं आया, जिसके चलते राशि लैप्स हो गई है। पत्र भेजकर सरकार से लैप्स हुई राशि पुन: भेजने का अनुरोध किया जाएगा।
-सुरेंद्र आर्य, जिला कोर्डिनेटर, साक्षर भारत मिशन, सिरसा
पहले नकद, फिर ग्रांट देने का किया था वादा
गांव के सरपंच देवीलाल ने बताया कि गांव की आबादी करीब 950 है। करीब साढ़े पांच सौ वोटर हैं। प्रेरक अमरजीत ने मेहनत कर गांव को साक्षर बनाया था, लेकिन अधिकारियों ने उनसे वादाखिलाफी की है। प्रशासन की ओर से पांच लाख रुपये देने का वायदा किया गया था। अपने वायदे के अनुसार इनामी राशि से बुजुर्गों को धार्मिक यात्रा तथा बच्चों की शिक्षा पर खर्च करना था। लेकिन न कुछ नकद मिला, न ही कोई ग्रांट। वहीं, प्रेरक अमरजीत ने बताया कि साक्षर भारत मिशन में लगे अधिकारियों जो कार्य प्राथमिकता के तौर पर करना चाहिए था, वह अभी तक नहीं किया है। सोमवार को एडीसी शरणदीप कौर डबवाली आ रही हैं। पूरा मामला उनके समक्ष रखा जाएगा, ताकि इनामी राशि मिलने के बाद गांव का विकास करवाया जा सके।
एक साल से राशि के लिए संघर्ष कर रही पंचायत
पूर्ण साक्षर होने पर प्रशासन की ओर से मिलने थे पांच लाख रुपये |

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