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गुरुवार, मार्च 19, 2015

अब सर्वे के बहाने बिल वसूलने की तैयारी

इंदिरा गांधी पेयजल परियोजना
डबवाली। इंदिरा गांधी पेयजल परियोजना के तहत मिले मुफ्त पेयजल कनेक्शन से प्यास बुझा रहे दलितों से प्रदेश सरकार ने बिल लेने की पूरी तैयारी कर ली है। दलितों के विरोध के बीच सरकार ने सर्वे का ड्रामा रच दिया है। जनस्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के बाद सरकार आगामी कदम उठाएगी। उधर, दलित समाज सरकार के इस फैसले को दलित विरोधी बता रहा है।
वर्ष 2006 में हरियाणा सरकार ने इंदिरा गांधी पेयजल परियोजना का शुभारंभ किया था। इसके तहत गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों को पेयजल कनेक्शन मुहैया करवाये गए थे। साथ में स्टोरेज के लिए 200 लीटर टंकी दी गई थी। डबवाली क्षेत्र में 2010 में योजना की शुरूआत करते हुए शहरी तथा ग्रामीण क्षेत्र में टंकिया वितरित करके कनेक्शन किए गए थे। अकेले डबवाली कस्बे में ऐसे कनेक्शनों की संख्या करीब चार हजार है। चार वर्षों तक मुफ्त पानी देने के बाद अब सरकार को ऐसे लोगों से वसूली की याद आई है। सरकार के आदेशों की पालना करते हुए जनस्वास्थ्य विभाग ने दिसंबर 2014 में 18-18 माह के बिल बनाकर धड़ाधड़ बांट दिए थे। उपरोक्त योजना के तहत पेयजल कनेक्शनों को छोड़ दिया जाए तो जनस्वास्थ्य विभाग के करीब 9800 पेयजल कनेक्शन शहर में चल रहे हैं। इन कनेक्शन धारकों को आठ माह के बिल भेजे गए थे। मीटर लगे कनेक्शनों को तय रेट तथा बिना मीटर कनेक्शन धारकों को फ्लेट रेट पर बिल भेजे गए।
सबसे खास बात यह है कि इंदिरा गांधी पेयजल योजना के तहत कनेक्शन धारकों को जो बिल भेजे गए हैं, वह भी उपरोक्त नियमों के अनुसार भेजे गए हैं। कई घरों को दो बिल जारी हुए थे। बिलों के विरोध में समाज के लोगों ने एसडीएम कार्यालय के आगे प्रदर्शन किया था। इसके बाद सरकार ने सर्वे करवाने के आदेश दिए हैं। सर्वे की रिपोर्ट 15 दिन के भीतर मांगी है।
रिपोर्ट पर फैसला सरकार लेगी
इंदिरा गांधी पेयजल परियोजना के लाभ पात्रों ने दो बिल आने की शिकायत की थी। सर्वे करवाकर देखा जा रहा है कि शहर में किन लोगों के पास नियमित पेयजल कनेक्शन हैं, किनके पास नहीं। रेगुलर या फिर परियोजना वाले कनेक्शन की रिपोर्ट आने के बाद सरकार के पास भेजा जाएगा, जिस पर सरकार निर्णय लेगी।
संकेत शर्मा, उपमंडल अधिकारी, जनस्वास्थ्य विभाग, डबवाली
सरकार का फैसला दलित विरोधी

दलित समाज के विजय खनगवाल ने बताया कि सरकार का फैसला दलित विरोधी है। पिछली सरकार ने दलितों की प्यास बुझाने के लिए टंकियां, कनेक्शन दिए थे। अब सरकार गरीबों को पानी देने के नाम पर पैसा मांग रही है। उन्होंने विरोध किया तो सरकार सर्वे की नौटंकी करके अपने कर्त्तव्य की इतिश्री कर रही है।

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