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Title: सैंचुरी एरिया जैसी जगह पर भी हरे पेड़ सुरक्षित नहीं, पेड़ माफिया सक्रिय
Author: Young Flame
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6 माह से वन्य प्राणी विहार क्षेत्र में कट रहे हरे पेड़ प्रशासन गहरी नींद में स्कूल चारदीवारी के भीतर कई पेड़ों पर चली आरी डबवाली -अबूबश...

6 माह से वन्य प्राणी विहार क्षेत्र में कट रहे हरे पेड़ प्रशासन गहरी नींद में
स्कूल चारदीवारी के भीतर कई पेड़ों पर चली आरी
डबवाली-अबूबशहर वन्य प्राणी विहार क्षेत्र यानि सैंचूरी एरिया के अंतर्गत आने वाले गांव सक्ताखेड़ा के राजकीय हाई स्कूल के परिसर में पिछले 6 माह से कदम-कदम पर काटे गए हरे पेड़ों के मामले में अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। वन विभाग ने इस मामले में आंखें मूंद रखी है। इससे भी बड़ी हैरानी की बात ये है कि बिश्रोई बाहुल क्षेत्र होने के बाद भी किसी ने बैखौफ होकर स्कूल में धड़ाधड़ हरे पेड़ों पर आरी चला दी। स्कूल प्रांगण में काटे गए कुछ बेशकीमती पेड़ों को तो खुर्द-बुर्द कर दिया गया है। जबकि बड़ी संख्या में परिसर के भीतर ही कटे हुए पेड़ों की ढेरियां लगी हुई है। हालांकि जिला शिक्षा अधिकारी ने मामले की जांच के लिए खंड शिक्षा अधिकारी को आदेश दिए हैं।
स्कूल की चारदीवारी के भीतर से हरे पेड़ों के काटने का कार्य बिना विभागीय व स्कूल स्टाफ की मिलीभगत के नहीं हो सकता। ऐसे में वन विभाग विभाग पर भी सवाल उठता हैं कि जब हरे वृक्ष सैंचुरी एरिया जैसी जगह में सुरक्षित नहीं है तो जिले भर में तो हालात इससे भी खराब होंगे। कायदे से वन्य प्राणी विहार क्षेत्र होने के कारण यहां से हरे पेड़ काटना तो दूर की बात है, किसी निर्माण के लिए भी वन विभाग से एन.आ.सी. लेनी पड़ती है। जिसकी एक लम्बी-चौड़ी प्रक्रिया है। परिसर में काटे गए पेड़ों में ज्यादातर पेड़ सफेदा, काली टाली, सहतूत, सुरेश प्रजाति के बेशकीमती पेड़ हैं। स्कूल परिसर में जाकर देखे जाने पर तो स्कूली की चोरदीवारी के साथ-साथ व स्कूल परिसर के बीचों-बीच थोड़ी-थोड़ी दूरी पर पेड़ों को आरी से काटा हुआ है। पेड़ों की पेडियों को खुर्द बुर्द कर दिया गया है। कई सफेदे के बड़े वृक्षों को बीच से आरी से बड़ी ही सफाई के साथ गया है। इसके अलावा स्कूल की इमारत के पिछे वाले हिस्से में पेड़ों की सैंकड़ों मोटी पेडियों की ढेरी लगी हुई है। ज्यादातर हरे पेड़ों को चारों तरफ स्कूल की चारदीवारी के साथ-साथ काटा गया है।
बिश्रोई सभा के पदधिकारियों ने साधी चुप्पी।
इस मामले में बिश्रोई सभा के पदाधिकारियों ने पूरी तरहां से चुप्पी साध रखी है। हालांकि ये बात अलग है कि अगर इस मामले को छोड़ दें और अन्य इस प्रकार के मामलों सभा के पदाधिकारी खुलकर आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हैं। वन्य प्राणी विहार क्षेत्र को तोड़ कर जब कभी भी इसे कम्यूनिटी रिजर्व एरिया बनाने का मसला उठता है तो इसे लेकर बिश्रोई समाज के लोगों के विरोध के सुर तेज हो जाते हैं।क्योंकि  बिश्रोई समाज का पर्यावरण व वन्य जीवों से गहरा जुड़ाव माना जाता है। ऐसा भी कहा जाता है कि पर्यावरण या जीवों पर जब कभी कोई विपदा आती है तो बिश्रोई समाज के लिए इसकी रक्षा में अपनी जान देने से भी पिछे नहीं हटते हैं। अब जिस सक्ताखेड़ा गांव के राजकीय हाई स्कूल में हरे पेड़ों को काटा गया है उस गांव में आस-पास के गांवों में अच्छी-खासी तादाद में बिश्रोई समाज के लोग रहते हैं। फिर भी किसी ने पूरी तरह से बैखोफ होकर बड़ी संख्या में हरे पेड़ों की बली दे दी।
सैंचूरी एरिया में पेड़ कटने से लगातार घट रही हरियाली।
सैंचूरी एरिया में लम्बे समय से हरे पेड़ों को काटा जा रहा है। इस तरहां से धडल्ले से पेड़ काटने का कार्य बिना वन विभाग के अधिकारियों या कर्मचारियों की मिलीभगत के संभव नहीं है। इसी वजह से पिछले कुछ समय से अबूबशहर वन्य प्राणी विहार क्षेत्र में नहरों के किनारे तेजी से वृक्षों की संख्या कम हुई है। इन नहरों के किनारे  पर जाकर अगर नजर डाली जाए तो कदम-कदम पर पेड़ों को नीचे से आरी द्वारा काटे जाने के निशान मिल जाएंगे। पेड़ माफिया वृक्षों का नीचे से पहले आधा हिस्सा आरी से काट कर छोड़ देते हैं। इसके बाद पेड़ सुख कर टूट कर गिर जाता है। इसी पेड़ को बाद में माफिया लकड़ मंडी में बेच देता है।
वन विभाग ने मुंदी आंखे।
नियमों के मुताबिक हरे वृक्ष काटना बड़ा अपराध है। और अगर हरे वृक्ष वन्य प्राणी विहार जैसे क्षेत्र में काटे जाएं तो ये अपराध और भी संगीन हो जाता है। लेकिन इस मामले में वन विभाग जानबूझकर अनजान बना हुआ है। इतने दिन बीत जाने के बाद भी इस मामले में वन विभाग द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
मौके पर जाकर देखेंगे।
इस बारे में अखिल भारतीय वन्य जीव रक्षा समिति के प्रदेश सचिव इंद्रजीत बिश्रोई ने कहा कि उन्होंने स्कूल से पेड़ कटने की घटना के बारे में जरूर सुना है। लेकिन वे स्कूल में जाकर मुआयना करने के बाद ही कुछ कह सकेंगे।
फोटो: ताजा कटे हुए हरे पेड़ों की तस्वीरें जिनमें साफ-साफ नजर आ रहा है कि पेड़ों को आरी से काटा गया है व स्कूल में पूराने कटे पेड़ों की लगी ढेरियां। 
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