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गुरुवार, जुलाई 16, 2015

347 बच्चे कंडम भवन में कर रहे शिक्षा का अध्ययन

#dabwalinews.com
 पब्लिक क्लब क्षेत्र में 60 साल पहले निर्मित पाठशाला के कंडम कमरों में पढने को मजबूर 347 बच्चों की जिंदगी दांव पर है। कंडम की घोषणा हुए करीब सात माह बीत चुके हैं। इसके बावजूद शिक्षा विभाग ने कदम नहीं उठाया। आजादी के आठ साल बाद 1955 में राजकीय प्राथमिक पाठशाला नंबर एक भवन का निर्माण हुआ था। उस समय के बने छह कमरों को विभाग ने कंडम करार दिया हुआ है। मामूली सी बरसात में कंडम कमरे टपकना शुरू हो जाते हैं। हर समय बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है। हालांकि विभाग ने कुछ समय पूर्व सर्व शिक्षा अभियान के तहत कमरों का निर्माण भी करवाया था। जिनमें से चार कमरों में कक्षाएं चल रही हैं। भ्रष्टाचार की भेंट चढ़े यह कमरे 60 साल पहले बने भवन के सामने फीके नजर आ रहे हैं। बारिश में टपकना शुरू हो जाते हैं, अभी से इनकी हालत गिरने जैसी हो गई है। यहीं नहीं इर्द-गिर्द का क्षेत्र काफी ऊंचा होने के कारण बरसाती पानी जमा हो जाता है। कई बार तो बिना बरसात के ही सीवरेज ओवरफ्लो होकर बहने लगते हैं। दोनों ही स्थितियों में अध्यापकों तथा बच्चों को पानी के बीच से गुजरकर पाठशाला पहुंचना पड़ता है।
पिछले दिनों आई बारिश में बच्चे रेहड़ी पर सवार होकर स्कूल पहुंचने को मजबूर हुए थे। उपरोक्त पाठशाला में सबसे ज्यादा संख्या दलित वर्ग के बच्चों की है। इन्हें मूलभूत सुविधाएं तक मुहैया नहीं क्यों नहीं करवाई जा रही हैं।
दूसरी ओर शिक्षा विभाग बच्चों की जिंदगी की परवाह तक नहीं कर रहा। बच्चों के परिजनों का कहना है कि बिल्डिंग करीब 60 साल पुरानी है। नेपाल में आए भीषण भूकंप के बावजूद सरकार नहीं चेती है। भूकंप के मामूली से झटके से भवन ताश के पत्तों की तरह बिखर जाएगा। अगर उनके बच्चों को कुछ हुआ तो सरकार जिम्मेवार होगी।
60 साल पुरानी बिल्डिंग
बरसात में टपकते हैं कमरे
करीब सात माह पूर्व विभाग ने भवन को कंडम करार दिया है। बारिश में पुरानों के साथ-साथ नए बने कमरे भी टपकना शुरू हो जाते हैं। इस संबंध में कई बार विभाग का पत्र लिख चुकी हूं। बारिश तथा सीवरेज का पानी भी समस्या बनता है।
शशि बाला, इंचार्ज, राजकीय प्राथमिक पाठशाला नंबर एक डबवाली
पाठशाला नंबर एक की तरह ऐसी कई इमारतें हैं, जो कंडम घोषित हैं। मेरी संबधित तकनीकी विशेषज्ञों से बात हुई है। विशेषज्ञ एस्टीमेट तैयार कर रहे हैं। जिसके बाद आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। मुझे यहां तक ज्ञात है उपरोक्त पाठशाला में नए कमरों के मुकाबले पुराने कमरों की स्थिति अच्छी है।
संत कुमार बिश्नोई, बीईओ, डबवाली

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