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Title: ‘बाबा रामदेव को लाइसेंस, फिर हमें क्यों नहीं’
Author: Young Flame
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#dabwalinews.com  बाबा रामदेव आयुर्वेदिक दवाइयां तैयार करते हैं, उन्हें बेचते भी हैं। बाबा के पास यह काम करने की कोई डिग्री नहीं। आरएमपी...
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 बाबा रामदेव आयुर्वेदिक दवाइयां तैयार करते हैं, उन्हें बेचते भी हैं। बाबा के पास यह काम करने की कोई डिग्री नहीं। आरएमपी भारत की आयुर्वेदिक पद्धति को संजीवनी दे रहे हैं, लेकिन उन्हें काम करने की अनुमति नहीं। प्रदेश में दो लाख 84 हजार आरएमपी हैं। जो आयुर्वेदिक एवं यूनानी पद्धति परिषद से मान्यता चाहते हैं। अगर मान्यता मिलती है तो सरकार को भी करोड़ों रुपये राजस्व की प्राप्ति होगी। प्रदेश के आरएमपी 19 जुलाई को सीएम मनोहर लाल खट्टर के सिरसा आगमन पर यह मांग उनके आगे रखेंगे। यह कहना है हरियाणा चिकित्सा अनुभव संगठन के प्रदेशाध्यक्ष लालचंद शर्मा का। वे सोमवार को बिश्नोई धर्मशाला में एकजुट हुए आरएमपी को संबोधित करने के बाद पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि 1963 के नियमानुसार हरियाणा, पंजाब तथा हिमाचल में आरएमपी पर एक जैसा कानून था। 1973 के बाद हरियाणा में आईएमए के विरोध में उतरने के बाद सरकार ने आरएमपी पर पाबंदी लगा दी। 1996 में भजनलाल की सरकार ने नोटिफिकेशन जारी करते हुए आरएमपी का पंजीकरण शुरू किया। प्रति आरएमपी 2288 रुपये की फीस भरवाई। एक-दो दिन में ही सरकार को 66 लाख रुपये की आय हुई। आईएमए के विरोध के चलते सरकार ने एक बार फिर पाबंदी लगाई। पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला ने कामगार विधेयक प्रस्तुत किया। आईएमए विरोध में अदालत में चला गया। एक बार फिर आरएमपी के पंजीकरण पर रोक लगा दी गई। प्रदेशाध्यक्ष के अनुसार आरएमपी सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलना चाहते हैं। नशा तथा कन्या भ्रूण हत्या जैसी बुराई को जड़ से खत्म करने के लिए सरकार के साथ खड़े हैं। अगर उनका कोई साथी उपरोक्त कार्य में संलिप्त मिलता है, तो उसकी सदस्यता भी रद करने को तैयार हैं। एक सवाल का जवाब देते हुए शर्मा के अनुसार आरएमपी को विभिन्न तरह की भ्रांतिया फैलाकर बदनाम किया जा रहा है। जबकि केंद्रीय चिकित्सा परिषद के अनुसार आरएमपी प्राथमिक उपचार कर सकता है। विभिन्न तरह की दवाइयां भी बेच सकता है। उनके अनुसार आज भारत की आयुर्वेदिक पद्धति के साथ-साथ जड़ी बूटियों को अमेरिका जैसे देश पेटेंट करवाकर मार्केट में उतार रहे हैं। जबकि आयुर्वेदिक पद्धति का जन्मदाता पिछड़ रहा है।
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