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Title: रसोई में नहीं, खुले में बनता है मिड-डे मील, अभिभावकों में रोष
Author: Young Flame
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  सुनवाई हाेने पर अभिभावकों की स्कूल को ताला लगाने की चेतावनी    डबवाली डबवाली गांव स्थित राजकीय प्राइमरी स्कूल में मिड-ड...


 
सुनवाई हाेने पर अभिभावकों की स्कूल को ताला लगाने की चेतावनी 
 डबवाली
डबवाली गांव स्थित राजकीय प्राइमरी स्कूल में मिड-डे मील का खाना रसोई में बनाने की बजाए बाहर खुले में पेड़ के नीचे बनाया जाता है। बच्चों को पीने के लिए शोरायुक्त जमीनी पानी मिलता है। इसके अलावा स्कूल में कई अन्य अनियमितताएं हैं जिसे लेकर स्कूल की एसएमसी कमेटी ने आवाज उठाई है।
कमेटी प्रधान सुरेंद्र सिंह, जग्गा सिंह, जगसीर सिंह, अमृतपाल सिंह, जसवीर कौर, मनजीत कौर, राजवीर कौर ने बताया कि स्कूल में मिड-डे मील का खाना पेड़ के नीचे खुले आंगन में बनाया जाता है। इस कारण उसमें पत्ते गिर जाते हैं, उड़ती हुई धूल मिट्टी खाने में चली जाती है। यही गंदा खाना बच्चों को परोस दिया जाता है। बच्चों के लिए पीने का पानी जमीनी है। उसमें टीडीएस की मात्रा बहुत ज्यादा है। इससे बच्चे अक्सर घर आकर पेट में दर्द होने की शिकायत करते हैं। उन्होंने बताया कि स्कूल के शौचालयों में पानी तक का प्रबंध नही है जिससे सफाई नहीं होने के कारण उनमें बदबू रहती है। स्कूल में जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे रहते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग के अधिकारियों सरकार ने सुनवाई नहीं की तो अभिभावक लामबंद होकर धरना प्रदर्शन करेंगे और स्कूल को ताला लगा देंगे।
रुकीहै आर्थिक सहायता
एसएमसीकमेटी सदस्यों के मुताबिक कई बच्चों को आर्थिक सहायता के तौर पर दी जाने वाली राशि भी कई बच्चों को डेढ़ वर्ष से नहीं मिली है। उन्होंने आरोप लगाया कि एसएमसी कमेटी जब अव्यवस्थाओं को लेकर मुख्याध्यापिका से बात करती है तो उनका जवाब होता है कि सरकारी स्कूलों में ऐसा होता है। उन्होंने मुख्याध्यापिका के तबादले की भी मांग की।
रसाेई घर के लिए ग्रांट मांगी है
स्कूल में रसोई नहीं है।
 एक कमरे को खाना बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। गर्मी धुएं के कारण कई बार बाहर खाना बनाना पड़ता है। रसोई घर के लिए ग्रांट विभाग से मांगी है। पीने के लिए जलघर के पानी का कनेक्शन लगा है। जमीनी पानी अन्य कार्यों में प्रयोग किया जाता है। आईडी की कमी के कारण कुछ बच्चों की आर्थिक सहायता रूकी हुई है जिसे जल्द रिलीज करवाया जाएगा।'' छिंद्रपालकौर, मुख्याध्यापिका, राजकीय प्राइमरी स्कूल 
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