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शुक्रवार, जुलाई 24, 2015

कॉटन बेल्ट में व्हाइट फ्लाई की घुसपैठ

किसानों से बोले अधिकारी, आपने ओवरडोज दवाइयां प्रयोग की, सहनशील हो गए हैं कीट
#dabwalinews.com 
डबवाली। कॉटन बेल्ट में व्हाइट फ्लाई की घुसपैठ ने किसानों के मात्थे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। उमस भरे वातावरण से चिंता ज्यादा बढ़ गई है। कृषि विभाग के अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को पांच गांवों का दौरा कर किसानों से बातचीत कर उन्हें जागरूक किया।
एसडीओ नरेश शर्मा, खंड कृषि अधिकारी सुखदेव सिंह के नेतृत्व में चार सदस्यीय टीम ने गोरीवाला, झुट्टीखेड़ा, चकजालू, रिसालियाखेड़ा तथा बनवाला का दौरा किया। उपरोक्त गांवों में कॉटन के खेतों में जाकर किसानों से सीधी बात की। अधिकारियों ने इसके लिए किसानों को जिम्मेवार ठहराया। अधिकारियों ने कहा कि दवाइयों की ओवरडोज के चलते व्हाइट फ्लाई जैसे कीट सहनशील हो गए हैं। दवाइयों का प्रभाव बहुत कम हो गया है। कीटों की नई जनरेशन फसलों के लिए घातक साबित हो रही है।
उन्होंने किसानों को विभाग की हिदायत के अनुसार ही दवाइयों का प्रयोग करने की सलाह दी।
खंड कृषि अधिकारी सुखदेव सिंह ने बताया कि विभिन्न कंपनियों के प्रतिनिधि डीलरों की मार्फत अपना व्यापारिक टारगेट पूरा करने के लिए किसानों पर दवाइयां थोप रहे हैं। किसान बहकावे में आकर दो-तीन प्रकार की दवाइयां मिक्स कर उनका प्रयोग कर रहा है, जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए। इससे कृषि को तगड़ा झटका लगा है। कॉटन का घटता रकबा इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। पिछले वर्ष पूर्व उपमंडल में 72 हजार हेक्टेयर भूमि पर कॉटन का उत्पादन हुआ था। इस बार रकबा बढ़ने की अपेक्षा कम हो गया। 68 हजार हेक्टेयर भूमि पर कॉटन की रोपाई हुई है।
यह है पहचान
व्हाइट फ्लाई मच्छर के सामान होती है। इस पर मोम की परत चढ़ी होती है। इसका जीवन चक्र 12 दिनों का होता है। अत्यधिक तापमान में नमी के साथ इसका विस्तार तेजी से होता है। कॉटन उत्पादन में प्रदेश का हार्ट कहे जाने वाले डबवाली एरिया में यह तीव्रता से बढ़ती जा रही है। एक पत्ते पर व्हाइट फ्लाई की संख्या छह से पार होना सबसे खतरनाक माना गया है। गोरीवाला, झुट्टीखेड़ा तथा चकजालू में इसका प्रभाव सबसे अधिक है।
ऐसे करें बचाव
व्हाइट फ्लाई पत्ते से रस चूसती है। इससे फंगस हो जाता है। धीरे-धीरे पत्ता सिकुड जाता है। कृषि विशेषज्ञ सुखदेव सिंह के अनुसार किसान बहकावे में न आकर रिसर्च सेंटर की बात को मानें। पांच एमएल नीम ऑयल (1500 पीपीएम) में एक लीटर पानी मिश्रित करके प्रभावित फसल पर स्प्रे करें।
डीलरों पर नकेल कसने की करेंगे मांग
कृषि अधिकारियों के अनुसार ऐसी शिकायतें निरंतर मिल रही हैं कि दवा बेचने के चक्कर में डीलर दो से तीन दवाएं किसानों को थमा रहा हैं। रोग के बारे में सीमित ज्ञान की वजह से महज डीलर के कहने पर किसान स्प्रे कर रहे हैं, जिसका प्रभाव नहीं हो रहा। डीलरों की डॉक्टरी सलाह बंद करवाकर उन पर नकेल कसने के लिए उच्च अधिकारियों से अनुमति मांगी जाएगी।
विभाग ने मांगी रिपोर्ट
कॉटन पर कीटों के आक्रमण से हरियाणा कृषि विभाग ने रिपोर्ट मांगी है। एक सप्ताह तक चलने वाले अभियान की प्रतिदिन रिपोर्ट स्थानीय अधिकारियों को विभाग से सांझी करनी होगी। किसानों से बातचीत की तस्वीरें तथा वीडियो व्हाट्स एप या ई-मेल करनी होगी।

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