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Title: विज के महकमे से सीएम का किनारा, डिमांड पर ध्यान नहीं
Author: Young Flame
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60 बेड के अस्पताल में 30 बेड वर्किंग में, आधे हो रहे कबाड़ द्वितीय तल पर बने ब्लड बैंक और अन्य वार्डों पर लटका रहता है ताला मांगे उपक...
60 बेड के अस्पताल में 30 बेड वर्किंग में, आधे हो रहे कबाड़
द्वितीय तल पर बने ब्लड बैंक और अन्य वार्डों पर लटका रहता है ताला
मांगे उपकरण और मैनपॉवर थी, मिला कुछ और
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 सीएम मनोहर लाल खट्टर डबवाली में 40 करोड़ रुपये की लागत से आठ एकड़ भूमि पर 100 बिस्तर का सिविल अस्पताल बनाने की उम्मीद जगा गए हैं। अगर सरकार मौजूदा सिविल अस्पताल के हालातों पर गौर करें तो त्रिवेणी संगम के निवासियों को बेहतर चिकित्सीय सुविधाएं मिल सकती हैं। विशेषज्ञों की कुर्सियां वर्षों से खाली पड़ी हैं। अस्पताल में उपकरण तक नहीं। 60 बिस्तर के सिविल अस्पताल में आधे कबाड़ हो रहे हैं। खुलासा हुआ कि सीएम के दौरे से पहले अस्पताल की दशा सुधारने के लिए प्रदेश सरकार के मंत्री अनिल विज के महकमे ने डिमांड मांगी थी, जिस पर सीएम ने विचार तक नहीं किया।
23 दिसंबर 1995 को डबवाली में हुए भीषण अग्निकांड के मृतकों की याद में सिविल अस्पताल का निर्माण किया गया था। आज तक सरकारें अग्निकांड पीड़ितों का इलाज अस्पताल में संभव नहीं करवा पाई हैं। यहीं नहीं इलाके के लोगों के लिए भी कोई सुविधा नहीं है। वर्ष 2011 में सर्वाधिक ओपीडी के मामले में अस्पताल प्रदेश भर में पहले स्थान पर गिना गया था। इसके बावजूद सरकार ने लोगों के उपचार के लिए सुविधाएं मुहैया नहीं करवाई। पिछले 13 वर्षों से सरकार ने अस्पताल को रेडियोलोजिस्ट ही नहीं दिया। वर्ष 2002 में डबवाली से रेडियोलोजिस्ट का तबादला हो गया था। वर्ष 2005 में तबदील हुए रेडियोग्राफर की जगह सरकार ने नई नियुक्ति नहीं है। कांट्रेक्ट बेस पर कार्य चलाया जा रहा था। पिछले कुछ समय से वह भी बंद है। ऐसे में लोगों को एक्स-रे के लिए निजी केंद्रों का मुंह ताकना पड़ रहा है। अग्निकांड पीड़ितों के लिए आए फिजियोथेरेपिस्ट के जाने के आठ साल बाद भी कोई नियुक्ति नहीं है। पिछले करीब दो वर्ष से बाल रोग विशेषज्ञ नहीं है। ऐसे में नवजात बच्चों को उपचार के लिए निजी अस्पतालों में रेफर करना पड़ता है। नेत्र रोग विशेषज्ञ, फिजिशयन, सर्जन के पद भी रिक्त हैं। यहां तक की पैथोलोजिस्ट न होने के कारण ब्लड बैंक शुरू नहीं हो पाया है। जबकि प्रदेश में सबसे ज्यादा रक्तदान कैंप डबवाली क्षेत्र में लगते हैं। डबवाली के बाशिंदों को 60 बिस्तर के अस्पताल वाली सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही हैं।
घोषणा कुछ आैर...
सीएम मनोहर लाल खट्टर के सिरसा दौरे से पहले स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के महकमें ने जिला स्वास्थ्य अधिकारियों से डिमांड मांगी थी। इसे दरकिनार करते हुए सीएम ने 100 बिस्तर का अस्पताल घोषित कर दिया। महकमे को भेजी डिमांड में डबवाली स्थित सिविल अस्पताल के लिए पंद्रह लाख कीमत की डिजिटल एक्स-रे मशीन, आठ लाख रुपये कीमत की अल्ट्रासाउंड मशीन, एक करोड़ रुपये की लागत वाली सीटी स्कैन मशीन, तीन करोड़ रुपये लागत की एमआरआई मशीन, 10 लाख रुपये कीमत का ब्लड बैंक का सामान मांगा था। इसके साथ-साथ सिविल अस्पताल में छह प्राइवेट रूम, छह ओपीडी रूम, एंबुलेंस तथा सरकारी वाहनों के लिए पार्किंग शेड के निर्माण के लिए 25 लाख रुपये मांगे थे। यही नहीं, डबवाली में प्वाइजनिंग तथा इमरजेंसी केसों के लिए 12 लाख रुपये कीमत के दो वेंटिलेटरों की मांग की थी। इसके साथ-साथ 12 लाख रुपये कीमत का नवजात बच्चों के लिए आईसीयू, पीएचसी देसूजोधा, गंगा के साथ-साथ सबसेंटर सकताखेड़ा की बिल्डिंग के लिए तीन करोड़ रुपये मांगे थे। बेशक सीएम ने पूरे जिला सिरसा के लिए तोहफों की बरसात की हो, लेकिन डबवाली सिविल अस्पताल में मैनपाॅवर की डिमांड से वे किनारा कर गए।
चार चिकित्सकों और विशेषज्ञों की थी मांग
जिला स्वास्थ्य विभाग ने 60 बेड अस्पताल के नॉमर्स के मुताबिक केजुअलटी के लिए चार चिकित्सक मांगे थे, इसके अतिरिक्त विशेषज्ञों की मांग भी की थी। रेडियोग्राफर, ओटीए, चार लैब टेक्निशियन के साथ-साथ दो असिस्टेंट, अकाउंटेंट, क्लर्क, डाटा एंट्री ऑपरेटर, छह वार्ड कर्मचारी, छह स्वीपर, माली, धोबी, सिक्योरिटी गार्ड्स की मांग की थी। इन मांगों को दरकिनार करते हुए सरकार ने 100 बिस्तर का सिविल अस्पताल घोषित कर दिया है। इसके लिए आठ एकड़ भूमि की शर्त रखी है। नगर परिषद लिमिट में आठ एकड़ खाली जमीन नहीं है। वर्तमान में सिविल अस्पताल चार एकड़ में चल रहा है। एक अतिरिक्त फ्लोर बनाकर अस्पताल को 100 बिस्तर करने के कयास लगाए जा रहे हैं।

हमने डिपार्टमेंट को डिमांड भेजी थी। इस संबंध में निर्णय सरकार को लेना था। सीएम ने 100 बैड का अस्पताल अनाउंंस किया है। जैसे डिपार्टमेंट के आदेश होंगे, उसके अनुसार कार्य किया जाएगा।
-सुरेंद्र नैन, सीएमओ, सिरसा
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