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Title: हिंदी भी नहीं पढ़ पाए तीसरी, चौथी के बच्चे
Author: Young Flame
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बीईओ के नेतृत्व में चार सदस्यीय टीम का औचक निरीक्षण डबवाली। प्राथमिक पाठशाला के बच्चे न तो राष्ट्रभाषा हिंदी पढ़ सकते हैं और न ही लिख सक...
बीईओ के नेतृत्व में चार सदस्यीय टीम का औचक निरीक्षण
डबवाली। प्राथमिक पाठशाला के बच्चे न तो राष्ट्रभाषा हिंदी पढ़ सकते हैं और न ही लिख सकते हैं। अंग्रेजी तो बहुत दूर की बात है। शनिवार को बीईओ संत कुमार बिश्नोई ने औचक्क निरीक्षण करके गांव डबवाली की प्राथमिक पाठशाला में एजूकेशन की पोल खोल दी। संबंधित टीचरों को फटकार लगाई। कार्रवाई के लिए रिपोर्ट को उच्च अधिकारियों के पास भेजा जाएगा। बीईओ संत कुमार बिश्नोई, एबीआरसी मनोज कुमार, पवन कुमार तथा सर्वशक्ति के साथ गांव डबवाली स्थित प्राथमिक पाठशाला में पहुंचे। चौथी कक्षा में उन्होंने बच्चों की होमवर्क कापियां चेक की। होमवर्क संतोषजनक नहीं मिला। उन्होंने बच्चों को हिंदी पढ़ने के लिए कहा। कक्षा में बैठे 30 बच्चों में से महज दो बच्चे टूटी-फूटी हिंदी पढ़ पाए। बीईओ ने टीम के साथ तीसरी कक्षा का भी निरीक्षण किया। इस कक्षा में पढ़ने वाले बच्चे हिंदी नहीं पढ़ पाए। बीईओ ने 22, 36 तथा 50 को हिंदी में लिखने के लिए कहा। दो बच्चे ही हिंदी में उपरोक्त संख्या को शब्दों में लिख पाए। शेष मुंह लटकाकर बैठे रहे। बीईओ ने संबंधित टीचरों से मंथली असेस्मेंट टेस्ट की उत्तर पुस्तिकाएं मांगी। टीचर रिकॉर्ड पेश नहीं कर पाए। कार्य संतोषजनक नहीं मिलने पर बीईओ ने संबंधित कक्षाओं के टीचरों को लताड़ लगाई। बीईओ ने टीचर अर्चना की चौथी ए क्लास भी देखी। कार्य संतोषजनक मिलने पर प्रशंसा की। पाठशाला में पीने के लिए पानी न होने तथा सफाई का बुरा हाल होने पर इंचार्ज को दिशा-निर्देश दिए।
मिड-डे मील का निरीक्षण
बीईओ ने मिड-डे मील का भी निरीक्षण किया। मेन्यू अनुसार बनी दाल-रोटी का स्वाद चखा। बीईओ ने संबंधित कुक का मेडिकल सर्टिफिकेट मांगा। पाठशाला सर्टिफिकेट नहीं दिखा पाई। जवाब में बीईओ के सामने प्रश्न खड़ा हो गया कि क्या कुक का मेडिकल होता है? मिड-डे मील इंचार्ज ने इस संबंध में किसी तरह के आदेश न मिलने की बात कही। जिस पर बीईओ ने कहा कि वे कई बार आदेश दे चुके हैं।
बीईओ ने कुक को हाथ धोकर भोजन तैयार करने के निर्देश दिए। साथ में मेडिकल करवाने के आदेश जारी किए। इस मौक पर एसएमसी कमेटी प्रधान सुरेंद्र कुमार ने बीईओ को खस्ता हाल कमरों का भी ध्यान करवाया।
पाठशाला के बच्चे न तो हिंदी पढ़ सकें और न ही लिख सकें। कार्य संतोषजनक नहीं। मैं उच्च अधिकारियों को रिपोर्ट करूंगा। प्राथमिक पाठशाला में 9 कमरे कंडम हैं। इसके अतिरिक्त पांच कमरों की एक अतिरिक्त बिल्डिंग भी कंडम हालत में हैं। पाठशाला की ओर से कागजी कार्रवाई की गई है। मैं भी लिखूंगा।
-संत कुमार बिश्नोई, बीईओ, डबवाली
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