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Title: 11 साल जिला चैंपियन, 10 राष्ट्रीय खिलाड़ी, तैयारी कच्चे ग्राउंड पर
Author: Young Flame
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#dabwalinews.com डीडी गोयल डबवाली । सरकारें खेलों के प्रति कितनी गंभीर हैं, यह राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय डबवाली के बास्केटबॉल मै...
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डीडी गोयल
डबवाली । सरकारें खेलों के प्रति कितनी गंभीर हैं, यह राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय डबवाली के बास्केटबॉल मैदान के हालात बयां कर रहे हैं। करीब 29 साल पहले स्टेट खेलकर आई टीम के प्राइज मनी से तैयार किए गए इस मैदान को सरकारें आज तक पक्का नहीं कर पाईं। पिछले 11 साल से इस स्कूल की टीम तीन वर्गों में जिला सिरसा पर एकछत्र राज कर रही है। इसके बावजूद सरकार ने इस ओर ध्यान नहीं दिया है।
वर्ष 1986 में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की बास्केटबॉल टीम स्टेट खेलने गई थी। दस हजार रुपये की प्राइज मनी से खिलाड़ियों ने ग्राउंड तैयार किया। तब से इस विद्यालय के खिलाड़ियों ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। पिछले 11 साल से विद्यालय की टीम जिला स्तर पर अंडर-14, 17 तथा 19 वर्ग में अपराजेय रही है। विद्यालय प्रदेश को लगभग 150 राज्य स्तरीय खिलाड़ी दे चुका है। यहीं नहीं, 10 खिलाड़ी नेशनल गेम्स में भाग ले चुके हैं। इसके बावजूद विद्यालय सरकार की उदासीनता का शिकार है। खिलाड़ी कच्चे ग्राउंड पर प्रैक्टिस करने को मजबूर हैं। किट भी मुहैया नहीं हुई है। पिछले वर्ष स्कूल ने अपने स्तर पर बास्केटबॉल ग्राउंड को पक्का करने की मांग की थी, जिसे सरकार ने दरकिनार कर दिया था।
दूसरी बार मांग उठाई, जिला प्रशासन ने कागजात ही गुम कर दिए। वर्ष 2014 में स्कूल को सरकार से आस बंधी। सरकार ने भिवानी, फरीदाबाद, हिसार, जींद, झज्जर, कैथल, करनाल, कुरुक्षेत्र, पानीपत, रोहतक, सोनीपत, यमुनानगर तथा सिरसा में 172 स्कूलों में बास्केबॉल मैदान की दशा सुधारने तथा खेलों का सामान देने के लिए दो करोड़ 30 लाख रुपये जारी किए। जहां मैदान को पक्का किए जाने की आवश्यकता थी, वहां करीब चार लाख रुपये जारी किए। इस बार भी सरकार ने विद्यालय की मांग तथा खेल रिकॉर्ड को नजरअंदाज कर दिया। राज्य स्तरीय मुकाबलों में पक्का मैदान पाकर उनकी खेल शैली बदल जाती है। खिलाड़ी चोट लगने के डर से अपना सौ फीसदी प्रदर्शन नहीं कर पाते। यहीं नहीं नेशनल गेम्स में वुडन मैदान पर खेलने से परिस्थितियां ओर भी अलग हो जाती हैं।
प्रतिभा को सुविधा की दरकार
29 साल पहले प्राइज मनी से स्कूल में बनाया बास्केटबॉल ग्राउंड, सरकारें आज तक नहीं कर पाई पक्का
किसके आगे बहाएं आंसू
मैं 11 साल से डबवाली में हूं। यहां के लड़के-लड़कियां में खेलों का जनून है। बास्केटबॉल के तीनों वर्गों में हम जिला चैंपियन हैं। हर साल खिलाड़ी हरियाणा की टीम में क्वालिफाई करते हैं। फिर भी हम व्यवस्था के मारे हुए हैं। न हमारे पास मैदान है, न खिलाड़ियों के पास किट। हम अपने आंसू बहाएं तो किसके आगे।
-कुलदीप सिंह, डीपीई,
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, डबवाली
हमनें खुद डिमांड भेजी
प्रदेश को 150 से ज्यादा बास्केटबॉल खिलाड़ी देने पर हमें गर्व है। दु:ख इस बात का कि सरकार इस प्रदर्शन को नजरअंदाज किए हुए है। काबिले तारीफ प्रदर्शन पर इनाम तो दूर, सरकारें कच्चे मैदान को पक्का नहीं कर पाई। हमने खुद डिमांड भेजी। हमारे कागजात ही गुम कर दिए। खिलाड़ियों के साथ अन्याय हो रहा है।
-सुरजीत सिंह मान, प्रिंसिपल
जिला अधिकारियों से बात कर रहा हूं
राज्य तथा देश को बास्केटबॉल खिलाड़ी देने के बावजूद खिलाड़ी अब भी कच्चे मैदान पर अभ्यास करते हैं। बुनियादी सुविधाएं इस स्कूल का हक है। ये मिलनी जरूरी हैं। इस संबंध में मैं जिला अधिकारियों से बात कर रहा हूं।
-संत कुमार, बीईओ, डबवाली
स्कूल के बच्चों ने अंग्रजों को कहा था ‘गो बैक’
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय आजादी से पहले का बना हुआ है। इसी स्कूल के बच्चों ने अंग्रेजों गो बैक का नारा लगाया था। यह वही स्कूल है, जिसने देश को देवीलाल सरीखा उपप्रधानमंत्री तथा प्रकाश सिंह बादल जैसा मुख्यमंत्री दिया है। इसके अतिरिक्त न जाने कितने उद्योगपति तथा राजनेता इसी विद्यालय में क ख ग पढ़कर उच्च पदों में पहुंचे हैं।
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