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Title: बारिश के बाद ओवरफ्लो हुई भाखड़ा नहर टूटी, 400 एकड़ फसल जलमग्न
Author: Young Flame
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#Dabwalinews.com कोटला नहर भी ओवरफ्लो  लापरवाही | नहरी विभाग के लापरवाह अधिकारियों कर्मचारियों की अनदेखी से ओवरफ्लो हुई नहरें  ...

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कोटला नहर भी ओवरफ्लो 
लापरवाही | नहरी विभाग के लापरवाह अधिकारियों कर्मचारियों की अनदेखी से ओवरफ्लो हुई नहरें 
किसान पहले भी कर चुके थे लापरवाह कर्मचारियों के खिलाफ शिकायत 
 डबवाली -उपमंडल में नहरी विभाग की लापरवाही से परेशान किसानों की शिकायत सुनवाई होने से पहले ही अधिकारियों की एक ओर लापरवाही का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। रात को नहराें का निरीक्षण होने से तीन नहरें ओवरफ्लो होकर टूट गई। जिससे 400 एकड़ से अधिक फसल डूब गई जबकि कई ढाणियों में पानी भर गया है। लखुआना गांव में रात को भाखड़ा मेन ब्रांच नहर ओवरफ्लो होकर 13 नंबर बुर्जी के पास किसान गनीराम खीचड़ के खेत में टूट गई।
जिसके साथ बहने वाली लोहगढ़ माइनर लंबी माइनर भी पानी के दबाव में टूट गई। इससे दोनों नहरों का पानी खेतों से गांव की ओर बहने लगा। इस पर रात को लोगों ने प्रशासन को सूचना दी लेकिन किसी से रिस्पांस नहीं मिला। इसके बाद आसपास की ढाणियों से लोगों ने सामान सुरक्षित जगह पर पहुंचाया लेकिन दिन चढ़ने तक भी नहरी विभाग और प्रशासन का कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। जिससे किसानों ने अपने स्तर पर नहर को पाटने का काम शुरू किया। वहीं जब तक माैके पर पहुंचे नहरी विभाग के एसडीओ अशोक अरोड़ा पहुंचे तब तक दरार 70 फीट चौड़ी हाे जाने और खेतों में दूर-दूर तक पानी भर जाने के कारण मशीनें पहुंचाना मुश्किल हो गया। इसके बाद लोगों ने मिट्टी के बैग भरकर नहर पाटने का काम शुरू किया और साथ ही डेरा सेवादारों की टीम भी मौके पर पहुंची।
बारिश के बाद खेतों में पानी की जरूरत रहने से लगभग सभी मोघे किसानों ने बंद कर दिए। जिससे हेड से दूसरी नहरों का पानी कम कर मेन ब्रांच में छोड़ दिया लेकिन नहर का निरीक्षण किए जाने से रात को नहर ओवरफ्लो होकर टूट गई। लखुआना गिदड़खेड़ा के 400 एकड़ से अधिक रकबा में नरमा, ग्वार धान की फसलें खराब हाेने की आशंका है।
इन किसानों के एरिया में हुआ ज्यादा नुकसान 
नहर के कटाव वाले खेतों में पानी फसलों के ऊपर तक हो जाने से करीब 150 एकड़ फसल पूरी तरह नष्ट हो गई है जबकि नरसीराम भांभू की ढाणी डूब गई है। साथ ही कई खेतों में लगे ट्यूबवैल मोटरें अन्य नुकसान हुआ है। नहर टूटने से जगदीश खीचड़ का 15 एकड़ नरमा धान, अमित खीचड़ के 15 एकड़ में नरमा धान, अमित बिश्नोई 7 एकड़ नरमा , डॉ. रामरख सुथार रायसिंह की 30 एकड़ नरमा धान, विनोद का 7 एकड़ नरमा, राजेंद्र की 7 एकड़ नरमा, नरसीराम की ढाणी सहित 19 एकड़ नरमा डूबा, रामस्वरूप सीगड़, राधेराम रामजीलाल सीगड़ का 6 एकड़ में कटा हुआ ग्वार बह गया जबकि 24 एकड़ में नरमा की फसल डूब गई। लेकिन ढाणी उंचाई पर होने से डूबने से बच गई। इसी प्रकार गुरमेल सिंह कंग हरमेल सिंह के 4-4 एकड़ नरमा डूब गया, महावीर कारगवाल के 5-5 एकड़ में नरमा धान, राजाराम सहारण के 7-7 एकड़ नरमा धान डूब गया है।
स्टाफ कम होने से समस्या : एसडीओ
इस बारे में नहर विभाग के एसडीओ अशोक अरोड़ा ने बताया कि नहर टूटने की सूचना मिलने पर टीम मौके पर पहुंची और लोगों के सहयोग से नहर पाटने का काम पूरा कर दिया है। रात को बारिश के बाद पानी बढ़ गया था जिससे दूसरी नहरों को टूटने से बचाव के लिए मुख्य नहर में पानी छोड़ा गया था। लेकिन सभी मोघे बंद कर दिए जाने और बारिश की नमी के चलते नहर टूट गई है। इसकी मजबूती के लिए निरीक्षण किया जा रहा है लेकिन स्टाफ कम होने से कई समस्याएं रही हैँ।
राजस्व विभाग की टीम ने किया निरीक्षण 
नहर टूटने से खेतों में नुकसान की सूचना मिलने पर एसडीएम सुरेश कस्वां तहसीलदार नौरंग दास ने राजस्व विभाग की टीम को मौके पर भेजा। जिसमें कानूनगो जगदीश धारणिया के नेतृत्व में पटवारी लक्ष्मण दास ने खेतों में हुए नुकसान की स्थिति के बारे में उच्चाधिकारियों को सूचना दी। उन्होंने बताया कि किसानाें को हुए नुकसान की भरपाई के लिए आदेशानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि भाखड़ा मेन ब्रांच नहर पंजाब से प्रदेश में आती है और इस पर बने मौजगढ़ हेड से 5 ओर नहरों में पानी सप्लाई होती है। जिसके बा मेन ब्रांच राजस्थान कैनाल नहर के नीचे से होते हुए राजस्थान सीमा तक जाती है।
इसी प्रकार गांव पन्नीवाला मोरिकां में पंजाब की ओर से बहकर आने वाली फ्लडी नहर कोटला ब्रांच में भी रात को पानी भर आया। जिससे नहर ओवरफ्लो चल रही है। किसानों अमरीक सिंह, राज सिंह, राजेंद्र सिंह, सुरेंद्र सिंह, हरचरण सिंह अन्य ने बताया कि बारिश होने से किसानों की फसलों से पहले ही पानी निकासी करनी पड़ रही है जबकि नहर में पंजाब की अोर से छोड़ा गया पानी यहां पहुंच गया। इससे नहर ओवरफ्लो होने से टूटने की आशंका है। किसानों ने बताया कि कोटला नहर को लेकर कई बार किसान विरोध कर चुके हैं लेकिन इसके पानी का सदुपयोग करने के लिए कोई प्रबंधन नहीं हो रहा है।
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