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Title: टीचर, दरोगा रास न आए तो बन गया नटवरलाल
Author: Young Flame
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पेपर लीक का मास्टरमाइंड विजय जेबीटी की नौकरी छोड़ बना था दिल्ली पुलिस में सब इंस्पेक्टर Dabwalinews.com रेवाड़ी। जिले के गांव भुरथल ...
पेपर लीक का मास्टरमाइंड विजय जेबीटी की नौकरी छोड़ बना था दिल्ली पुलिस में सब इंस्पेक्टर
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रेवाड़ी। जिले के गांव भुरथल के मध्यवर्गीय परिवार में जन्मे विजय कुमार ने थोड़े समय में ही अपने ऊंचे शौक पूरे करने के लिए तिकड़म लड़ा एक जेबीटी से ‘नटवरलाल’ तक का सफर तय किया। कुछ सालों में ही शातिर दिमाग विजय ने कई हथकंडे अपनाकर मोटी संपत्ति बनाई और राजनीति में भी किस्मत आजमाई।
कोसली क्षेत्र के भुरथल गांव का विजय मामूली परिवार में जन्मा और पढ़-लिखकर जेबीटी टीचर बना। टीचर की नौकरी उसे रास नहीं आई और दिल्ली पुलिस में सब इंस्पेक्टर के तौर पर भर्ती हो गया।
ऊंचे शौक रखने वाले विजय का यहां भी मन नहीं लगा और रेवाड़ी में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने के लिए एक कोचिंग सेंटर खोल लिया। शातिर दिमाग विजय ने इस दौरान अपने बेनामी धंधों से करोड़ों की संपत्ति बना ली थी। कोसली विधानसभा क्षेत्र से वह निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ने मैदान में उतरा। चुनाव में उसे महज 10 हजार वोट मिले।
बेनामी धंधों के माल से बनाई ‘फौज’
विजय ने कोचिंग सेंटर की आय के अलावा प्रतियोगी परीक्षाएं लीक करने के अपने बेनामी धंधे से मोटी कमाई की। अपने काले धन को काम में लाकर उसने कोसली इलाके में अपनी पीछे एक फौज खड़ी कर ली। सूत्रों की मानें तो वह इन युवकों को रोजगार दिलाने में कहीं न कहीं जुगाड़ लगाकर उनकी मदद करता और बाद में उनसे मोटी रकम वसूलता था।
विजय इससे पहले 2014 में आयोजित एक प्रतियोगी परीक्षा का पेपर आउट कराने के मामले में भी पुलिस के हाथ लगा था। सूत्रों के मुताबिक तब राजनीतिक पैठ और मोटी रकम खर्च करके वह बच गया था। दिल्ली और आसपास के क्षेत्र में विजय का रैकेट पेपर आउट होने के मामले में जरूर चर्चा में आता था। पेपरों की खरीद फरोख्त हर बार होती थी, चाहे पेपर आउट हुआ हो या न हो।
नौकरी छोड़ रेवाड़ी में खोला कोचिंग सेंटर, पिछले विस चुनाव में कोसली से था निर्दलीय प्रत्याशी
पीआरटी 4 लाख, एसएससी आंसर की का दाम 6 लाख
लैपटॉप, मोबाइल के रिकॉर्ड अहम सुराग
पुलिस को जांच के दौरान मोबाइल में व्हाट्सएप के जरिये दिए और लिए गए संदेशों से गिरोह के अन्य सदस्यों का भी सुराग लगा है। मौके पर मिले सभी 29 मोबाइलों की कॉल डिटेल हासिल की जा रही है। दोनों लैपटॉप से भी कुछ अहम दस्तावेज पुलिस के हाथ लगे हैं।
लैपटॉप में मिली आंसर-की
पुलिस को प्राथमिक जांच में लौपटॉप में पेपर की आंसर-की मिली है। अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड की स्कैन कॉपी और अन्य जरूरी दस्तावेज मिले हैं। अभी और गहनता से जांच की जा रही है। लैपटॉप में मिले रिकॉर्ड के आधार पर पुलिस अभ्यर्थियों से संपर्क करने में जुटी है। वहीं दस्तावेजों के जरिये छानबीन के लिए लैपटॉप को खंगाला जा रहा है।
पुलिसकर्मी और एक सॉल्वर की तलाश
डीएसपी शाकिर हुसैन के नेतृत्व में गठित एसआईटी अब मामले से जुड़े एक अन्य दिल्ली पुलिस के जवान की तलाश में जुटी है। वहीं जो सॉल्वर शहर के एक होटल में रुका था और दबिश से कुछ पहले ही मौके से फरार हुआ था, उसकी तलाश में भी पुलिस ने छापामारी शुरू कर दी है।
अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी। केवीएस पीआरटी परीक्षा की आंसर-की हासिल करने के लिए परीक्षार्थियों से चार लाख रुपये और एसएससी कांस्टेबल भर्ती परीक्षा की आंसर-के छह लाख रुपये वसूले जाने थे। एसपी ने इस मामले में जांच के लिए डीएसपी शाकिर हुसैन के नेतृत्व में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) गठित की है। एसआईटी अब मिले कागजात की सहायता से 40 लाभार्थी अभ्यर्थियों की तलाश करने के साथ ही उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की तैयारी में है।
40 लाभार्थियों के अलावा भी वाट्सएप पर सक्रिय थे गिरोह के सदस्य
डीएसपी के नेतृत्व में अब एसआईटी करेगी जांच
कोचिंग सेंटर: पेड सर्विस ‘विद गारंटी’
रेवाड़ी । शहर के हर मोड़ हर गली में कोचिंग सेटंरों के होर्डिंग्स लगे हैं या यहां वहां पोस्टर चस्पाकर स्टूडेंट्स का ध्यान खींच रहे हैं। ये कोचिंग सेंटर नौकरी की गारंटी देते युवाओं को भ्रमित कर रहे हैं। जिस तरह से पेपर लीक मामलों में इन सेंटरों की संलिप्तता सामने आ रही है उससे लगता है कि यहां गारंटी पढ़ाई की नहीं बल्कि चतुराई और जालसाजी के मकड़जाल में फंसाने की है। पीआरटी की लिखित परीक्षा से पहले प्रश्न पत्र के सही आंसर बताने वाले (सॉल्वर) में से एक रेवाड़ी स्थित निजी कोचिंग सेंटर में टीचर भी था। सुमित कुमार नामक युवक के सामने आने के बाद तो इन सेंटरों पर दी जा रही गारंटी का साफ तौर पर पता लग रहा है। ये कोचिंग सेंटर अब स्टूडेंट्स और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करवाने की बजाय युवकों को फंसाने का अड्डा बनते जा रहे हैं।
फर्जी सॉल्वर बैठा बने थे 13 जेबीटी
इससे पहले भी जिले में अलग-अलग 13 जगहों पर जेबीटी टीचर के तौर पर तैनात युवक-युवतियां भी फर्जी तरीके से अध्यापक बने थे। इस बात का खुलासा होने के बाद हाल ही में सभी जगह तैनात अध्यापक-अध्यापिकों के खिलाफ विभिन्न थाना क्षेत्रों में मुकदमे दर्ज हुए थे। परीक्षा में दी आंसरशीट पर लगे अंगूठे के निशान और नौकरी लगने के बाद मिलान के बाद फर्जी भर्ती का खुलासा हुआ था।
‘फर्जी’ गुरुजनों के हाथ में भविष्य
जिस तरह फर्जी तरह से परीक्षा में पास होने, नकल कराने के मामले सामने आ रहे हैं। उससे समाज का शिक्षित वर्ग चिंतित है। प्रो. अनिरुद्ध यादव का कहना है कि जिस रफ्तार से धोखाधड़ी कर टीचर बनने और इससे जुड़े मामले सामने आ रहे हैं उससे आशंका है कि कहीं देश का भविष्य इन फर्जी गुरुजनों के हाथ में न चला जाए।
रेवाड़ी में पकड़े गए 13 में से पांच महेंद्रगढ़ के
नारनौल। रेवाड़ी में केंद्रीय विद्यालय संगठन की परीक्षा पीआरटी का पेपर लीक मामले में पकड़े गए आरोपियों में महेंद्रगढ़ के भी कई आरोपी शामिल हैं। इनको रेवाड़ी पुलिस ने रविवार को बीएमजी माल के सामने से पकड़ा है।
रेवाड़ी पुलिस ने रविवार को केंद्रीय विद्यालय संगठन के पीआरटी पद के लिए आयोजित परीक्षा के प्रश्न पत्रों को मोटी रकम लेकर लीक करने और हल प्रश्न पत्रों को अभ्यर्थियों को उपलब्ध करवाने के लिए संगठित रूप से चल रहे गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस को सूचना मिली थी कि बीएमजी माल के सामने कुछ युवक केंद्रीय विद्यालय संगठन में पीआरटी पद के लिए होने वाली प्रवेश परीक्षा के पेपरों को आउट कर हल करके देने के एवेज में मोटी रकम वसूल करके अभ्यर्थियों को देंगे। जिस पर पुलिस ने दबिश देकर बीएमजी माल के सामने से गाड़ियों में बैठे 13 आरोपियों को दबोच लिया। इनमें महेंद्रगढ़ जिला के नौताना निवासी पवन, गुवानी निवासी सुजान सिहं, मालडा निवासी नरेंद्र सिंह, खटौटी कला निवासी राजकुमार व सुरेंद्र हैं।
कोचिंग सेंटर बन रहे स्टूडेंट्स को फंसाने का अड्डा
सॉल्वर में से एक रेवाड़ी के कोचिंग सेंटर में था प्रशिक्षक
कुल वेकेंसी: 2639, देश भर में सेंटर: 158, पीआरटी: 2666, पीआरटी (म्यूजिक): 73, समय: सुबह 09:30 से 12:00 बजे।
टीजीटी की परीक्षा दूसरी पारी में दोपहर 2 से पांच बजे तक होनी थी। टीजीटी (हिंदी, अंग्रेजी, मैथ्स, साइंस, एसएसटी, संस्कृत) की परीक्षा। सभी परीक्षाओं के लिए मई और जून में आवेदन भरे गए थे।
चार घंटे पहले किया काबू, मौके पर ही देनी थीं आंसर-की
रेवाड़ी । पीआरटी परीक्षा सुबह साढ़े नौ बजे से शुरू होनी थी। इसके लिए अभ्यर्थियों का सुबह नौ बजे से परीक्षा केंद्रों पर जमघट लगना था। इससे ठीक चार घंटे पहले ही पुलिस ने बीएमजी मॉल के पास रेड कर सरगना समेत 13 आरोपियों को धर दबोचा। पूछताछ में पता चला कि आंसर-की को परीक्षार्थियों के अभिभावकों को यहीं नकद रुपये लेने के बाद दिया जाना था। हालांकि पुलिस की रेड के बाद ऐसा हो नहीं सका।
चारों सेट एक्यूरेट यानि अंदर तक पैठ
विजय भुरथल और गिरोह के पास से जो प्रश्न पत्र और आंसर-की मिले हैं वह रविवार सुबह आए पीआरटी एग्जाम से बिल्कुल मिलते थे। यही नहीं एग्जाम के चारों सेट ए, बी, सी, डी के सभी प्रश्न तो बिल्कुल मैच कर रहे थे, वहीं उनका क्रम भी बिल्कुल सटीक था। इससे पुलिस का मानना है कि जिस शख्स ने पेपर आउट किया है वह संगठन में काफी अंदर तक पकड़ रखने वाला हो सकता है।
राजस्थान के एग्रीकल्चर एग्जाम लीक करने वाले धरे गए थे सेक्टर-4 से
इससे पहले वर्ष 2014 में राजस्थान के एग्रीकल्चर की परीक्षा लीक कराने के मामले में भी एक छुटभैया नेता समेत चार लोग धरे गए थे। हालांकि मामले में गिरफ्तारी के बाद सभी जमानत पर छूट गए थे और फिर गिरोह के सरगना और आगे की कार्रवाई का कुछ पता नहीं लग सका था। ये सभी आरोपी भी विजय भुरथल के ही गुर्गे थे और बताया जाता है कि फर्जीवाड़े का गोरखधंधा सीखने के बाद उससे अलग हुए थे। विजय पर भी दो साल पहले एक परीक्षा में पेपर लीक करने के मामले में मुकदमा गुडग़ांव के किसी थाने में भी दर्ज है।
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